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Home कृषि समाचार

बिहार के mango man एक ही बाग में उगा दीं 92 दुर्लभ आम की किस्में

मुजफ्फरपुर के विकास यादव ने नौकरी छोड़कर खेती को चुना, अब उनके बाग में देश-विदेश की 92 आम किस्में मौजूद हैं।

Rahul by Rahul
June 24, 2026
in कृषि समाचार, लेख, सफ़लता की कहानी
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mango
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मुजफ्फरपुर, बिहार: बिहार की मिट्टी हमेशा से मेहनती किसानों और अनोखे कृषि प्रयोगों के लिए जानी जाती रही है। इसी धरती से अब एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने न केवल किसानों का ध्यान खींचा है, बल्कि फल प्रेमियों और कृषि विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है। मुजफ्फरपुर जिले के मरवां प्रखंड स्थित रकसा गांव में रहने वाले किसान विकास कुमार यादव ने अपने आम के बाग में 92 अलग-अलग किस्मों के आम उगाकर एक नई पहचान बनाई है। आज लोग उन्हें प्यार और सम्मान से मैंगो मैन (mango man) के नाम से जानते हैं।

आम को फलों का राजा कहा जाता है, लेकिन विकास यादव ने इस राजा की 92 किस्मों को एक ही बाग में जगह देकर खेती की दुनिया में एक अलग मिसाल पेश की है। उनका यह बाग अब केवल आम उत्पादन का केंद्र नहीं रहा, बल्कि किसानों, छात्रों और फल प्रेमियों के लिए सीखने की जगह बन चुका है।

खेती से बचपन का रिश्ता

विकास कुमार यादव एक किसान परिवार से आते हैं। उनके लिए खेती कोई नया काम नहीं था, बल्कि यह उनके जीवन का हिस्सा रही है। स्कूल के दिनों में ही उन्हें पौधे लगाने और उन्हें बढ़ते देखने का शौक था। वे टमाटर और मिर्च के पौधे लगाया करते थे और उनकी देखभाल में काफी रुचि लेते थे।

धीरे-धीरे यही शौक उनके जीवन का लक्ष्य बन गया। विकास बताते हैं कि खेती उनके लिए सिर्फ कमाई का जरिया नहीं, बल्कि दिल से जुड़ा काम है। इसी लगन ने उन्हें आम की अलग-अलग किस्मों पर प्रयोग करने की प्रेरणा दी।

नौकरी छोड़कर खेती को चुना

खेती में पूरी तरह उतरने से पहले विकास यादव ने लगभग पांच वर्षों तक कृषि क्षेत्र में काम किया। उन्होंने बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में कई संस्थाओं और कंपनियों के साथ कृषि विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम किया। इस दौरान वे किसानों की समस्याओं को करीब से समझ पाए।

उन्होंने देखा कि कई किसान मेहनत तो बहुत करते हैं, लेकिन उन्हें सही पौधे, सही सलाह और अच्छी गुणवत्ता वाली रोपण सामग्री नहीं मिल पाती। इसी समस्या ने उनके मन में बदलाव की सोच पैदा की।

साल 2023 में उन्होंने करीब 8.5 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़ दी और अपने गांव लौटकर खेती को पूरा समय देने का फैसला किया। यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन विकास के लिए खेती उनका जुनून था। उन्होंने नौकरी की सुरक्षा के बजाय खेती की संभावनाओं पर भरोसा किया।

2014 से शुरू हुआ आम (Mango) की किस्मों का प्रयोग

विकास यादव ने साल 2014 में आम (mango) की अलग-अलग किस्मों पर काम शुरू किया। उन्होंने भारत के कई हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से भी आम की किस्में मंगाईं और उन्हें स्थानीय जलवायु में परखना शुरू किया।

शुरुआत में यह काम आसान नहीं था। हर किस्म की अपनी जरूरत होती है। किसी पौधे को अधिक देखभाल चाहिए होती है, तो किसी को अलग मिट्टी या मौसम की जरूरत होती है। लेकिन विकास ने धैर्य नहीं छोड़ा। उन्होंने पौधों की वृद्धि, फल देने की क्षमता, स्वाद, रोग-प्रतिरोधक क्षमता और स्थानीय वातावरण में टिकने की क्षमता को ध्यान से समझा।

आज उनके बाग में 92 किस्मों के आम मौजूद हैं। इनमें भारत की लोकप्रिय किस्मों के साथ जापान, ऑस्ट्रेलिया, थाईलैंड, पाकिस्तान और अन्य देशों की दुर्लभ किस्में भी शामिल हैं।

बाग में मौजूद हैं देश-विदेश की खास किस्में

विकास यादव के बाग में मियाजाकी, केन्सिंगटन प्राइड, अनवर रटोल, अटाउल्फो, आर2ई2, पिको, अल्फांसो, कैरी, फेयरचाइल्ड, मल्लिका, अम्रपाली, नाओमी और ऑस्टिन जैसी किस्में मौजूद हैं। इसके अलावा सेंसेशन, डंकन, येलो डायमंड, गोल्डन क्वीन, रेड एम्परर, सनराइज, फ्लोरिगन, रोजा, सब्रे, ब्लैक मैंगो, किंग मैंगो, गोल्ड नगेट, प्राइड ऑफ बर्मा और चोक अनान जैसी प्रजातियां भी उनके बाग की शोभा बढ़ा रही हैं।

इन किस्मों की खासियत केवल नाम तक सीमित नहीं है। किसी आम का रंग आकर्षक है, किसी की खुशबू अलग है, किसी का स्वाद बेहद मीठा है, तो कोई लंबे समय तक खराब नहीं होता। यही विविधता उनके बाग को खास बनाती है।

Neelam Mango की खास पहचान

विकास यादव के बाग में neelam mango भी उगाया जा रहा है। नीलम आम भारत में अपनी सुगंध, स्वाद और देर से पकने वाली खासियत के कारण जाना जाता है। यह किस्म किसानों के लिए उपयोगी मानी जाती है क्योंकि इसकी बाजार में अच्छी मांग रहती है।

Neelam Mango का आकार सामान्य होता है, लेकिन इसका स्वाद मीठा और खुशबूदार होता है। यह आम उन लोगों को काफी पसंद आता है जो पारंपरिक स्वाद के साथ अच्छी शेल्फ लाइफ चाहते हैं। इसी वजह से किसान नीलम आम के पौधों में रुचि दिखा रहे हैं।

Dasheri Mango की मांग भी लगातार बढ़ी

भारत में जब स्वादिष्ट आमों की बात होती है तो dasheri mango का नाम जरूर लिया जाता है। दशहरी आम अपनी मिठास, पतले छिलके, सुगंध और रेशारहित गूदे के कारण बेहद लोकप्रिय है। उत्तर भारत में इसकी मांग हमेशा अच्छी रहती है।

विकास यादव की नर्सरी में dasheri mango plant की भी मांग देखी जा रही है। कई किसान अपने खेतों या बागों में दशहरी आम लगाना चाहते हैं क्योंकि इसकी बाजार में पहचान मजबूत है। आम प्रेमियों के बीच भी दशहरी का स्वाद अलग जगह रखता है।

dasheri mango price मौसम, गुणवत्ता, आकार और बाजार की मांग के अनुसार बदलती रहती है। आम के सीजन में अच्छी क्वालिटी का दशहरी आम बेहतर दाम दिला सकता है। यही कारण है कि किसान Dasheri Mango Plant लगाने में रुचि लेते हैं।

तीन स्वाद वाले आम का दावा

विकास यादव का दावा है कि उनके बाग में एक ऐसा पेड़ भी है, जिसके फल में तीन अलग-अलग स्वाद महसूस किए जा सकते हैं। यह दावा किसानों और फल प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

उनका मानना है कि खेती में प्रयोग करना जरूरी है। अगर किसान नई तकनीक, नई किस्म और बेहतर देखभाल अपनाएं, तो खेती से अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। विकास का यह प्रयोग बताता है कि गांवों में भी नवाचार की कोई कमी नहीं है।

नर्सरी से किसानों को मिल रहा फायदा

आम (mango) की खेती के साथ विकास यादव एक नर्सरी भी चला रहे हैं। उनकी नर्सरी से बिहार के अलावा कई दूसरे राज्यों के किसान पौधे खरीदने आते हैं। पड़ोसी देश नेपाल से भी खरीदार उनके यहां पहुंचते हैं।

विकास का कहना है कि किसानों का भरोसा ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है। वे किसानों को केवल पौधे नहीं देते, बल्कि उन्हें पौधों की देखभाल, रोपाई, खाद, सिंचाई और रोग प्रबंधन की जानकारी भी देते हैं। इससे किसानों को सही शुरुआत मिलती है।

खेती से बन रहा स्थायी रोजगार

विकास यादव बताते हैं कि खर्च निकालने के बाद उन्हें हर महीने लगभग 30 से 40 हजार रुपये तक की आय हो जाती है। आम के सीजन में यह कमाई और बढ़ जाती है। नर्सरी, पौधों की बिक्री और फल उत्पादन मिलकर उनकी आय का मजबूत आधार बनाते हैं।

यह कहानी उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है जो खेती को कम लाभ वाला काम समझते हैं। विकास ने दिखाया है कि अगर खेती को योजना, ज्ञान और धैर्य के साथ किया जाए, तो यह सम्मानजनक और लाभकारी काम बन सकती है।

किसानों के लिए सीख

विकास यादव की सफलता किसानों को कई बातें सिखाती है। पहली बात, खेती में केवल परंपरागत तरीके से आगे बढ़ना काफी नहीं है। नई किस्मों, बेहतर पौधों और वैज्ञानिक सोच को अपनाना जरूरी है।

दूसरी बात, किसानों को बाजार की मांग समझनी चाहिए। जैसे dasheri mango, Neelam Mango, अल्फांसो और अम्रपाली जैसी किस्मों की अपनी-अपनी बाजार पहचान है। अगर किसान सही किस्म चुनें और पौधों की अच्छी देखभाल करें, तो आम की खेती से अच्छी आमदनी हो सकती है।

तीसरी बात, गुणवत्ता सबसे जरूरी है। अच्छा पौधा ही अच्छे बाग की नींव रखता है। इसलिए किसानों को हमेशा भरोसेमंद नर्सरी से ही पौधे लेने चाहिए।

मुजफ्फरपुर का बाग बना आकर्षण का केंद्र

आज रकसा गांव का यह आम बाग किसानों, कृषि छात्रों और फल प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है। लोग यहां अलग-अलग किस्मों को देखने, उनके बारे में जानने और पौधे खरीदने आते हैं।

विकास कुमार यादव की कहानी केवल एक किसान की सफलता नहीं है, बल्कि यह बिहार की कृषि क्षमता का उदाहरण भी है। उन्होंने साबित किया है कि गांव में रहकर भी बड़ा काम किया जा सकता है।

निष्कर्ष

विकास कुमार यादव ने अपने जुनून, मेहनत और नई सोच से मुजफ्फरपुर को एक खास पहचान दी है। 92 किस्मों वाला उनका आम बाग यह बताता है कि खेती में संभावनाएं बहुत हैं, बस जरूरत है सही सोच और लगातार प्रयास की।

Dasheri Mango, Dasheri Mango Plant, Dasheri Mango Price और Neelam Mango जैसे लोकप्रिय नामों के साथ उनका बाग किसानों को नई दिशा दिखा रहा है। विकास यादव सच में बिहार के “मैंगो मैन” हैं, जिन्होंने आम की खेती को एक नई ऊंचाई दी है।

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