FPO Exclusive Interview: भारत में किसान उत्पादक संगठन यानी एफपीओ आज छोटे और सीमांत किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आ रहे हैं। एफपीओ के माध्यम से किसान न केवल संगठित होकर अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त कर रहे हैं, बल्कि खेती, पशुपालन, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और बाजार से जुड़कर अपनी आय बढ़ाने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। खास बात यह है कि आज कई महिलाएं और युवा भी एफपीओ से जुड़कर ग्रामीण उद्यमिता की नई पहचान बना रहे हैं।
इसी कड़ी में फसल क्रांति ने गाजियाबाद में भोजपुर मिल्क फार्म प्रोड्यूसर लिमिटेड कंपनी का संचालन कर रहे एफपीओ डायरेक्टर ललित त्यागी से विशेष बातचीत की। इस बातचीत में उन्होंने एफपीओ की शुरुआत, किसानों को मिलने वाले लाभ, महिलाओं की भागीदारी, संचालन की चुनौतियों और एफपीओ वैन के माध्यम से गांव-गांव तक किसानों को जोड़ने के प्रयासों पर विस्तार से जानकारी दी। पेश हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश।
प्रश्न 1. भोजपुर मिल्क फार्म प्रोड्यूसर लिमिटेड कंपनी की शुरुआत कैसे हुई?
भोजपुर मिल्क फार्म प्रोड्यूसर लिमिटेड कंपनी की शुरुआत वर्ष 2016 में नाबार्ड के सहयोग से हुई थी। इस एफपीओ को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को संगठित करके उन्हें बेहतर बाजार, उचित मूल्य और नियमित आय से जोड़ना था। भारत सरकार द्वारा 10 हजार एफपीओ बनाने की जो पहल की गई है, उसका उद्देश्य भी यही है कि किसान अकेले संघर्ष करने के बजाय समूह बनाकर काम करें और अपनी आय बढ़ा सकें।
हमारे क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान पशुपालन और दूध उत्पादन से जुड़े हुए हैं, लेकिन पहले उन्हें अपने दूध और अन्य कृषि उत्पादों का सही दाम नहीं मिल पाता था। बिचौलियों पर निर्भरता अधिक थी और बाजार तक सीधी पहुंच सीमित थी। इसी समस्या को देखते हुए भोजपुर मिल्क फार्म प्रोड्यूसर लिमिटेड कंपनी की स्थापना की गई, ताकि किसान एक संगठित मंच से जुड़कर दूध उत्पादन, पशुपालन, कृषि उत्पादों और ग्रामीण उद्यमिता को मजबूत बना सकें।
आज एफपीओ किसानों को केवल दूध बेचने का माध्यम नहीं दे रहा, बल्कि उन्हें प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी, बेहतर नस्ल, पशु आहार, उत्पाद की गुणवत्ता और बाजार से जुड़ने का अवसर भी उपलब्ध करा रहा है।
प्रश्न 2. एफपीओ के साथ जुड़ने से किसानों को कैसे फायदा मिलेगा?
एफपीओ के साथ जुड़ने से किसान को कई स्तरों पर लाभ मिलता है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसान अकेला नहीं रहता, बल्कि एक संगठित समूह का हिस्सा बन जाता है। जब किसान समूह में काम करते हैं, तो उनकी खरीद और बिक्री दोनों की ताकत बढ़ जाती है।
एफपीओ से जुड़े किसान दूध, सब्जी, अनाज, दाल, फल, पशु आहार या अन्य उत्पादों को सीधे बाजार तक पहुंचा सकते हैं। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होती है और किसानों को अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलता है। इसके अलावा एफपीओ किसानों को समय-समय पर प्रशिक्षण भी देता है, जिससे वे आधुनिक खेती, पशुपालन, गुणवत्ता सुधार और लागत कम करने के तरीके सीखते हैं। कई किसान पहले केवल उत्पादन तक सीमित थे, लेकिन एफपीओ से जुड़ने के बाद वे वैल्यू एडिशन की ओर बढ़ रहे हैं। उदाहरण के लिए दूध से दही, पनीर, घी जैसे उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। इससे किसान को कच्चा माल बेचने के बजाय तैयार उत्पाद का अच्छा मूल्य मिलता है।
एफपीओ किसानों को सरकारी योजनाओं, बैंक लोन, सब्सिडी, मशीनरी, पशुपालन सुविधाओं और बाजार जानकारी से भी जोड़ता है। इससे किसान की लागत घटती है और आमदनी बढ़ती है। यही कारण है कि एफपीओ किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में एक मजबूत माध्यम बन रहा है।
प्रश्न 3. महिलाएं एफपीओ के साथ कैसे जुड़ सकती हैं, और अपने उत्पादों को कैसे बाजार तक पहुंचा सकती हैं?
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। महिलाएं पशुपालन, दूध उत्पादन, अचार, पापड़, मसाले, हस्तनिर्मित उत्पाद, जैविक खाद, सब्जी उत्पादन और छोटे खाद्य प्रसंस्करण कार्यों में पहले से सक्रिय हैं। जरूरत केवल उन्हें सही मंच, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने की है।
महिलाएं एफपीओ की सदस्य बनकर अपनी भागीदारी शुरू कर सकती हैं। इसके लिए वे स्वयं सहायता समूह, महिला समूह या व्यक्तिगत सदस्य के रूप में एफपीओ से जुड़ सकती हैं। एफपीओ महिलाओं को उत्पाद तैयार करने, पैकिंग, ब्रांडिंग, गुणवत्ता सुधार और बिक्री की प्रक्रिया के बारे में प्रशिक्षण देता है।
आज बाजार में स्थानीय और शुद्ध उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। यदि महिलाएं दूध से बने उत्पाद, देसी घी, पनीर, अचार, मसाले, मोटे अनाज से बने उत्पाद या जैविक सामान तैयार करती हैं, तो एफपीओ उनके उत्पादों को गांव से बाहर बड़े बाजार तक पहुंचाने में मदद कर सकता है। एफपीओ के माध्यम से महिलाएं केवल मजदूर या उत्पादक नहीं रहतीं, बल्कि उद्यमी बनती हैं। इससे उनकी अपनी आय बनती है, परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और गांव में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलता है। हमारा प्रयास है कि अधिक से अधिक महिलाएं एफपीओ से जुड़ें और अपने कौशल को आय में बदलें।
प्रश्न 4. हालिया समय में वो कौन सी कमियां हैं जो एफपीओ संचालन के दौरान सामने आती हैं?
एफपीओ किसानों के लिए बहुत अच्छा मॉडल है, लेकिन इसके संचालन में कुछ चुनौतियां भी सामने आती हैं। सबसे बड़ी कमी किसानों में जागरूकता की है। कई किसान अभी भी एफपीओ की पूरी भूमिका को नहीं समझ पाए हैं। उन्हें लगता है कि यह केवल एक संस्था है, जबकि वास्तव में एफपीओ किसानों की अपनी कंपनी होती है, जिसमें किसान ही सदस्य और मालिक होते हैं।
दूसरी चुनौती भरोसे और नियमित भागीदारी की है। कई बार किसान शुरुआत में जुड़ते हैं, लेकिन नियमित बैठक, प्रशिक्षण या सामूहिक बिक्री में सक्रिय नहीं रहते। एफपीओ तभी सफल होता है जब किसान मिलकर काम करें और अपनी उपज को संगठित रूप से बाजार तक पहुंचाएं।
तीसरी बड़ी चुनौती प्रबंधन और पूंजी की होती है। एफपीओ को चलाने के लिए प्रशिक्षित टीम, लेखा-जोखा, बाजार संपर्क, परिवहन, स्टोरेज और प्रोसेसिंग जैसी सुविधाओं की जरूरत होती है। छोटे एफपीओ के लिए शुरुआती दौर में यह सब जुटाना आसान नहीं होता।
इसके अलावा बाजार में प्रतिस्पर्धा, उत्पाद की गुणवत्ता, पैकिंग और समय पर भुगतान भी महत्वपूर्ण विषय हैं। इन चुनौतियों को दूर करने के लिए किसानों को जागरूक करना, प्रशिक्षण देना, सरकारी योजनाओं से जोड़ना और एफपीओ को पेशेवर तरीके से चलाना जरूरी है। अगर किसान सक्रिय भागीदारी करें, तो एफपीओ की ये कमियां धीरे-धीरे ताकत में बदल सकती हैं।
प्रश्न 5. फसल क्रांति के माध्यम से आप किसानों को क्या संदेश देना चाहेंगे?
फसल क्रांति के माध्यम से मैं किसानों से कहना चाहूंगा कि आज समय बदल रहा है। केवल उत्पादन करने से किसान की आय नहीं बढ़ेगी, बल्कि उत्पादन के साथ संगठन, गुणवत्ता, प्रोसेसिंग और बाजार से जुड़ना भी जरूरी है। एफपीओ इसी बदलाव का मजबूत माध्यम है।
किसानों को चाहिए कि वे अकेले काम करने के बजाय समूह में आगे बढ़ें। जब किसान संगठित होते हैं, तो उनकी आवाज मजबूत होती है, लागत कम होती है और बाजार में बेहतर भाव मिलने की संभावना बढ़ती है। एफपीओ किसानों को खेती और पशुपालन को व्यवसाय के रूप में अपनाने की दिशा दिखाता है।
आज दूध उत्पादन, जैविक खेती, सब्जी उत्पादन, मोटे अनाज, खाद्य प्रसंस्करण और महिला उद्यमिता में बड़ी संभावनाएं हैं। यदि किसान एफपीओ से जुड़कर इन क्षेत्रों में काम करें, तो वे अपनी आय को बेहतर कर सकते हैं और गांव में रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकते हैं।
मेरा किसानों से यही संदेश है कि एफपीओ को अपनी कंपनी समझें, उससे जुड़ें, बैठकों में भाग लें, प्रशिक्षण लें और अपने उत्पाद को सीधे बाजार तक पहुंचाने की कोशिश करें। किसान जब संगठित होकर काम करेगा, तभी उसकी आय बढ़ेगी और गांव की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
फसल क्रांति जैसे मंच किसानों की आवाज को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। इसके लिए मैं फसल क्रांति का धन्यवाद करता हूं और किसानों से आग्रह करता हूं कि वे नई जानकारी, नई तकनीक और एफपीओ मॉडल को अपनाकर अपने भविष्य को मजबूत बनाएं।

