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Home कृषि समाचार

बायोप्लास्टिक से बदलेगी भारत की हरित तस्वीर, विश्व पर्यावरण दिवस पर लखनऊ से शुरू हुई ऐतिहासिक पहल

Bioplastics will transform India's green landscape, a historic initiative launched in Lucknow on World Environment Day

Emran Khan by Emran Khan
June 6, 2026
in कृषि समाचार
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बायोप्लास्टिक से बदलेगी भारत की हरित तस्वीर, विश्व पर्यावरण दिवस पर लखनऊ से शुरू हुई ऐतिहासिक पहल
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विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी नवाचार और हरित विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। देश की अग्रणी चीनी कंपनी बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड (BCML) और लखनऊ कैंटोनमेंट बोर्ड ने संयुक्त रूप से “बायोयुग ग्रीन कमांड 2026” का शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य भारत में बायोप्लास्टिक के उपयोग को बढ़ावा देना, प्लास्टिक प्रदूषण को कम करना और टिकाऊ विकास को नई गति देना है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि देश के रक्षा मंत्री Rajnath Singh रहे, जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण और जैव-आधारित अर्थव्यवस्था के महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पर्यावरण की रक्षा केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और भविष्य की आर्थिक मजबूती से भी जुड़ा हुआ विषय है। उन्होंने बायोप्लास्टिक को प्लास्टिक प्रदूषण की चुनौती का प्रभावी समाधान बताते हुए इसके व्यापक उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।

प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ बड़ा अभियान

आज दुनिया भर में प्लास्टिक प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन चुका है। नदियों, समुद्रों, खेतों और यहां तक कि मानव शरीर में भी माइक्रोप्लास्टिक के कण पाए जा रहे हैं। रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वैज्ञानिक शोधों से यह स्पष्ट हो चुका है कि माइक्रोप्लास्टिक मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। उन्होंने बताया कि नवजात शिशुओं के रक्त में भी माइक्रोप्लास्टिक कणों की मौजूदगी दर्ज की गई है, जो इस संकट की गंभीरता को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि प्लास्टिक का अंधाधुंध उपयोग केवल पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचा रहा, बल्कि समुद्री जीवों, जैव विविधता और आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। ऐसे समय में बायोप्लास्टिक जैसी पर्यावरण-अनुकूल तकनीकें भविष्य का रास्ता दिखाती हैं।

गन्ने से बनेगा पर्यावरण का रक्षक

कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू था पीएलए (Poly Lactic Acid) आधारित बायोप्लास्टिक को बढ़ावा देना। पीएलए एक जैविक और कम्पोस्टेबल प्लास्टिक है, जिसे गन्ने जैसे कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। यह पारंपरिक प्लास्टिक की तरह वर्षों तक पर्यावरण में नहीं रहता, बल्कि समय के साथ प्राकृतिक रूप से विघटित हो जाता है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि यदि प्लास्टिक के स्थान पर पीएलए आधारित उत्पादों का उपयोग बढ़ाया जाए तो न केवल पर्यावरण को राहत मिलेगी, बल्कि किसानों के लिए आय के नए अवसर भी पैदा होंगे। उन्होंने इसे “बायो इकोनॉमी” की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया, जो कृषि और उद्योग के बीच मजबूत संबंध स्थापित करेगा।

किसानों के लिए खुलेगा नया अवसर

कार्यक्रम में बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक Vivek Saraogi ने कहा कि भारत ऐसे दौर में खड़ा है जहां आर्थिक विकास और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को साथ लेकर चलना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बायोप्लास्टिक उद्योग न केवल पर्यावरण संरक्षण में योगदान देगा, बल्कि नए उद्योगों, रोजगार और किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

वहीं कंपनी की कार्यकारी निदेशक Avantika Saraogi ने कहा कि पिछली सदी पेट्रोलियम आधारित उद्योगों की थी, लेकिन आने वाला समय किसानों और कृषि आधारित जैविक संसाधनों का होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि बायोमटेरियल्स और बायोप्लास्टिक भारत को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देंगे।

महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण का अवसर

इस अवसर पर आईटीआई की छात्राओं को सम्मानित भी किया गया। यह सम्मान “बिल्डिंग स्किल्स-ट्रांसफॉर्मिंग फ्यूचर्स” परियोजना के तहत दिया गया, जिसके माध्यम से युवतियों को बायोप्लास्टिक आधारित 3डी प्रिंटिंग तकनीक का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। लखीमपुर खीरी में संचालित इस परियोजना का उद्देश्य महिलाओं को आधुनिक तकनीकी कौशल देकर रोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराना है।

आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी नई ताकत

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) की चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया और अन्य क्षेत्रों में भू-राजनीतिक तनाव के कारण कई बार कच्चे माल की उपलब्धता प्रभावित होती है, जिससे उद्योगों पर असर पड़ता है। लेकिन यदि भारत अपने गन्ने, कृषि अवशेषों और जैविक संसाधनों से बायोप्लास्टिक तैयार करता है, तो विदेशी निर्भरता कम होगी और देश अधिक आत्मनिर्भर बन सकेगा।

उन्होंने यह भी बताया कि जैव-आधारित अर्थव्यवस्था न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से लाभकारी है, बल्कि आर्थिक सुरक्षा को भी मजबूत बनाती है। जिस प्रकार एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम ने ऊर्जा क्षेत्र में भारत की निर्भरता कम की है, उसी तरह बायोप्लास्टिक उद्योग भविष्य में देश की औद्योगिक और पर्यावरणीय जरूरतों को पूरा कर सकता है।

भारत के हरित भविष्य की ओर एक कदम

“बायोयुग ग्रीन कमांड 2026” केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत में टिकाऊ विकास और हरित अर्थव्यवस्था की दिशा में एक व्यापक अभियान के रूप में देखा जा रहा है। इसमें नीति निर्माताओं, उद्योग जगत, शोध संस्थानों और विभिन्न संगठनों की भागीदारी यह संकेत देती है कि देश अब पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को अपनाने के लिए गंभीरता से आगे बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बायोप्लास्टिक के उपयोग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिला, तो इससे प्लास्टिक प्रदूषण में कमी आएगी, किसानों की आय बढ़ेगी, नए रोजगार पैदा होंगे और भारत वैश्विक स्तर पर हरित नवाचार का अग्रणी देश बन सकता है। विश्व पर्यावरण दिवस पर शुरू हुई यह पहल आने वाले वर्षों में पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

 

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