खेती में लगातार हो रहे बदलाव और मौसम की मार के बीच अब वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए एक बड़ी राहत तैयार की है। जलवायु परिवर्तन, कम पानी और बढ़ती गर्मी जैसी चुनौतियों से जूझ रहे किसानों के लिए अब अरारोट की एक नई और उन्नत किस्म ‘श्री आद्या’ सामने आई है। इस किस्म को ICAR केंद्रीय कंद फसल अनुसंधान संस्थान, तिरुवनंतपुरम के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है, जो न सिर्फ ज्यादा उत्पादन देती है बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी अच्छी पैदावार देने में सक्षम है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, ‘श्री आद्या’ किस्म समय पर बुवाई और सिंचित परिस्थितियों के लिए बेहद उपयुक्त है। यह किस्म करीब 7 महीनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को जल्दी लाभ मिल सकता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी उच्च उत्पादकता है—किसान इससे प्रति हेक्टेयर 30 से 50 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, इसमें स्टार्च की रिकवरी भी ज्यादा होती है, जिससे यह प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के लिए भी काफी उपयोगी मानी जा रही है। यही कारण है कि यह किस्म किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
अगर अरारोट की खेती की बात करें तो इसके लिए गर्म और नम जलवायु सबसे बेहतर मानी जाती है। 20 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान इसके विकास के लिए आदर्श होता है। मिट्टी की बात करें तो दोमट या बलुई दोमट मिट्टी, जिसमें जल निकासी अच्छी हो, सबसे उपयुक्त रहती है। खेती शुरू करने से पहले खेत की 2-3 बार जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी बना लेना चाहिए और उसमें सड़ी हुई गोबर की खाद मिलानी चाहिए।
अरारोट की बुवाई के लिए अप्रैल-मई का समय सबसे अच्छा माना जाता है। इसकी रोपाई कंद (ट्यूबर) के टुकड़ों से की जाती है, इसलिए स्वस्थ और रोगमुक्त कंद का चयन करना जरूरी है। पौधों की रोपाई कतार से कतार 45 से 60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे 30 से 45 सेंटीमीटर की दूरी पर करनी चाहिए, जिससे पौधों को पर्याप्त जगह और पोषण मिल सके।
अरारोट सिर्फ एक फसल नहीं, बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर एक उपयोगी पौधा भी है। इसका इस्तेमाल आयुर्वेदिक दवाओं में किया जाता है। अरारोट का अर्क अपच, दमा, जलन, मूत्र रोग, खून की कमी और पेचिश जैसी समस्याओं में लाभकारी माना जाता है। इसके अलावा बुजुर्गों और बच्चों की कमजोरी दूर करने में भी यह काफी उपयोगी है। अरारोट से बना स्टार्च एक हर्बल टॉनिक की तरह काम करता है, जो कफ को कम करता है और दिल के मरीजों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है।
कुल मिलाकर, ‘श्री आद्या’ किस्म आने वाले समय में किसानों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है। बदलते मौसम के बीच यह किस्म न सिर्फ खेती को आसान बनाएगी, बल्कि किसानों की आमदनी बढ़ाने का भी मजबूत जरिया बनेगी।

