भारत सरकार द्वारा बागवानी क्षेत्र में तकनीकी नवाचार, उत्पादन गुणवत्ता और किसानों की दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से देशभर में फलों और सब्जियों के लिए उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence – CoEs) स्थापित किए जा रहे हैं। एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के तहत अब तक कुल 58 CoE देश के विभिन्न राज्यों में स्वीकृत किए जा चुके हैं। यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
CoE: किसानों के लिए प्रशिक्षण और तकनीक का केंद्र
ये उत्कृष्टता केंद्र बागवानी क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को प्रदर्शित करने, प्रशिक्षण देने और पौध सामग्री के उत्पादन के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा देने का कार्य कर रहे हैं। इनका मुख्य उद्देश्य किसानों, उद्यमियों और कृषि विस्तार अधिकारियों को व्यावहारिक ज्ञान और प्रशिक्षण प्रदान करना है, जिससे उत्पादकता, गुणवत्ता और स्थिरता में सुधार हो सके।
इज़राइल, नीदरलैंड और न्यूजीलैंड के साथ सहयोग
भारत सरकार ने इज़राइल, नीदरलैंड और न्यूजीलैंड जैसे देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते किए हैं ताकि उनके तकनीकी ज्ञान और अनुभव का लाभ भारत के बागवानी क्षेत्र को मिल सके। विशेष रूप से भारत-इज़राइल कृषि परियोजना (Indo-Israel Agricultural Project – IIAP) के तहत कई राज्यों में CoE की स्थापना की गई है, जिनमें जल प्रबंधन, पौध संरक्षण और गुणवत्ता उत्पादन के लिए इज़रायली तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
राज्यवार स्वीकृत CoE की स्थिति (31 जुलाई 2025 तक)
कुछ प्रमुख राज्यों में स्वीकृत CoE की संख्या इस प्रकार है:
- महाराष्ट्र: 7
- हरियाणा: 6
- पंजाब: 6
- कर्नाटक: 5
- गुजरात और उत्तर प्रदेश: 4-4
- हिमाचल प्रदेश, केरल, उत्तराखंड, असम, मेघालय, मिजोरम, गोवा, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और लद्दाख सहित कई राज्यों में भी एक-एक CoE स्वीकृत किए गए हैं।
मंगलुरु क्षेत्र के लिए फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं
सरकार ने स्पष्ट किया है कि कर्नाटक के मंगलुरु क्षेत्र में फिलहाल किसी नए बागवानी उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
कृषि में शोध से खेत तक ज्ञान का सेतु
CoEs आधुनिक कृषि अनुसंधान को जमीन स्तर पर लागू करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। किसान इन केंद्रों के माध्यम से नई किस्में, उन्नत उत्पादन तकनीकें और पानी की दक्षता बढ़ाने वाले उपायों को सीखकर अपनी खेती में सुधार कर रहे हैं।
फलों और सब्जियों की उत्पादकता, गुणवत्ता और निर्यात क्षमता को बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा CoE जैसे कदम बागवानी क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय सहयोग और तकनीकी हस्तांतरण से न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि भारत की कृषि प्रतिस्पर्धा भी वैश्विक स्तर पर मजबूत होगी।

