निजी टीवी चैनलों पर प्रसारित होने वाले कंटेंट को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। पिछले पांच वर्षों में कार्यक्रम और विज्ञापन संहिता के उल्लंघन के 140 से अधिक मामलों में कार्रवाई की गई है। यह जानकारी सरकार द्वारा जारी आंकड़ों में सामने आई है, जिसमें 2021 से 2025 के बीच कुल 144 मामलों में विभिन्न प्रकार की कार्रवाई दर्ज की गई है।
केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 के तहत सभी निजी चैनलों को यह सुनिश्चित करना होता है कि उनके कार्यक्रमों में अश्लीलता, धर्म या समुदायों पर आपत्तिजनक टिप्पणी, सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने वाली सामग्री या किसी व्यक्ति/समूह की मानहानि करने वाला कंटेंट प्रसारित न हो। इसके साथ ही विज्ञापनों में भी अभद्र, भ्रामक या अपमानजनक प्रस्तुति से बचना अनिवार्य है।
सरकार ने उल्लंघनों पर कार्रवाई के लिए तीन-स्तरीय शिकायत निवारण तंत्र लागू किया है। पहले स्तर पर प्रसारक स्वयं शिकायत का समाधान करता है, दूसरे स्तर पर स्व-नियामक संस्थाएं और तीसरे स्तर पर केंद्र सरकार निगरानी और कार्रवाई करती है।
आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में 35 मामलों में सलाह, 50 मामलों में चेतावनी, 54 मामलों में माफी स्क्रॉल चलाने के आदेश और 3 मामलों में चैनलों को ऑफ-एयर करने का निर्देश दिया गया। इसके अलावा एक चैनल की अनुमति रद्द करने और एक मामले में अस्वीकरण जारी करने का आदेश भी दिया गया।
सरकार समय-समय पर चैनलों को संहिता का पालन सुनिश्चित करने के लिए एडवाइजरी भी जारी करती है, ताकि प्रसारण की गुणवत्ता और सामाजिक जिम्मेदारी बनी रहे।
टीवी के अलावा अन्य मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी निगरानी रखी जा रही है। प्रिंट मीडिया को भारतीय प्रेस परिषद की आचार संहिता का पालन करना होता है, जबकि डिजिटल मीडिया के लिए आईटी नियम 2021 के तहत तीन-स्तरीय नियामक व्यवस्था लागू है।
सरकार का कहना है कि इन सख्त नियमों का उद्देश्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ समाज में जिम्मेदार और संतुलित मीडिया वातावरण बनाए रखना है।

