डिजिटल युग में बढ़ते ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से संसाधन प्रबंधन एवं उपभोक्ता विज्ञान विभाग, कॉलेज ऑफ कम्युनिटी साइंस द्वारा “डिजिटल फ्रॉड और उपभोक्ता संरक्षण: जागरूकता, रोकथाम और कानूनी उपाय” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में डिजिटल सुरक्षा और उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के अधिवक्ता इंद्रप्रीत सिंह सोहल रहे, जिन्होंने डिजिटल धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों और उनसे बचाव के उपायों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आज के समय में फिशिंग, ओटीपी स्कैम, फर्जी लिंक और ऑनलाइन लेन-देन से जुड़ी धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, इसलिए उपभोक्ताओं को सतर्क रहना बेहद जरूरी है।
अपने व्याख्यान में उन्होंने बताया कि किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचना चाहिए और ओटीपी या बैंक से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऑनलाइन लेन-देन करते समय केवल विश्वसनीय और सुरक्षित प्लेटफॉर्म का ही उपयोग करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने साइबर फ्रॉड की स्थिति में उपलब्ध कानूनी उपायों और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया के बारे में भी प्रतिभागियों को विस्तार से जानकारी दी।
इस कार्यक्रम में कॉलेज ऑफ कम्युनिटी साइंस और कॉलेज ऑफ बेसिक साइंस के संकाय सदस्यों और कर्मचारियों ने भाग लिया। व्याख्यान के दौरान प्रतिभागियों ने डिजिटल सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर वक्ता से सवाल पूछे और उनसे महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त किए।
इस अवसर पर कॉलेज ऑफ कम्युनिटी साइंस की डीन डॉ. किरण बैंस ने उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए कहा कि डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता आज के समय की आवश्यकता है। उन्होंने इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन के लिए विभाग के प्रयासों की सराहना की।
कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष डॉ. शरणबीर कौर बल ने मुख्य वक्ता का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह व्याख्यान प्रतिभागियों के लिए अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक रहा। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए विभाग के संकाय सदस्यों की भी सराहना की। यह व्याख्यान सभी प्रतिभागियों के लिए डिजिटल सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण के बारे में उपयोगी जानकारी प्रदान करने वाला साबित हुआ।

