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हिमालय की हरियाली पर संकट! दो साल में 2.27% घटा ट्री कवर, संसद में सामने आई चिंताजनक रिपोर्ट

Fiza by Fiza
March 14, 2026
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हिमालय की हरियाली पर संकट! दो साल में 2.27% घटा ट्री कवर, संसद में सामने आई चिंताजनक रिपोर्ट
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भारतीय हिमालयी क्षेत्र के पर्यावरण को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। केंद्र सरकार की ताज़ा जानकारी के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ट्री कवर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री Kirti Vardhan Singh ने राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि साल 2021 से 2023 के बीच हिमालयी क्षेत्र में ट्री कवर 2.27 प्रतिशत कम हुआ है। यह जानकारी India State of Forest Report 2023 (ISFR 2023) के आंकड़ों के आधार पर दी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 में हिमालयी क्षेत्र का कुल ट्री कवर 15,427.11 वर्ग किलोमीटर था, जो 2023 में घटकर 15,075.5 वर्ग किलोमीटर रह गया। यानी दो वर्षों में लगभग 351 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पेड़ों की संख्या कम हो गई। विशेषज्ञों के मुताबिक यह गिरावट हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर संकेत हो सकती है, क्योंकि यह क्षेत्र जलवायु संतुलन, जैव विविधता और जल स्रोतों के संरक्षण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

हिमालयी क्षेत्र में शामिल राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में Jammu and Kashmir, Ladakh, Uttarakhand, Himachal Pradesh, Sikkim और उत्तर-पूर्व के कई राज्य शामिल हैं। कुल मिलाकर इस क्षेत्र में 13 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश आते हैं, जहां के जंगल जलवायु परिवर्तन से लड़ने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

हालांकि इस गिरावट के बीच एक राहत की बात भी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक जंगलों में मौजूद कुल कार्बन स्टॉक में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2021 में जहां कार्बन स्टॉक 3,272.68 मिलियन टन था, वहीं 2023 में यह बढ़कर 3,273.10 मिलियन टन हो गया। कार्बन स्टॉक का बढ़ना पर्यावरण के लिहाज से सकारात्मक माना जाता है, क्योंकि यह दर्शाता है कि जंगल वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को सोखने की क्षमता रखते हैं और जलवायु परिवर्तन को कम करने में मदद करते हैं।

इस मुद्दे पर मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि जंगलों की स्थिति को केवल हरियाली या ट्री कवर के आधार पर नहीं आंका जा सकता। उन्होंने बताया कि जंगलों का स्वास्थ्य कई पारिस्थितिक और जैव-भौतिक मानकों पर निर्भर करता है। इनमें मिट्टी की गुणवत्ता, मिट्टी की गहराई, मिट्टी का कटाव, वनस्पतियों की विविधता और जंगलों को होने वाले प्राकृतिक या मानवजनित खतरे जैसे कई पहलू शामिल होते हैं।

जंगलों की स्थिति का आकलन करने का काम Forest Survey of India (FSI) करता है। यह संस्था समय-समय पर विस्तृत अध्ययन करके जंगलों से जुड़े आंकड़े जुटाती है और देश में वन संपदा की वास्तविक स्थिति को सामने लाती है। इन अध्ययनों के जरिए यह समझने की कोशिश की जाती है कि किस क्षेत्र में जंगल मजबूत हो रहे हैं और कहां पर्यावरणीय दबाव बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र में तेजी से बढ़ता शहरीकरण, सड़क और जलविद्युत परियोजनाएं, पर्यटन का दबाव और जलवायु परिवर्तन जैसे कारक ट्री कवर में गिरावट के प्रमुख कारण हो सकते हैं। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस नीतियों और स्थानीय स्तर पर सतत विकास की रणनीतियों की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।

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