भारत के पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के 38वें स्थापना दिवस समारोह में केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने उभरती वैश्विक चुनौतियों के बीच साइबर सुरक्षा को और मजबूत करने पर जोर दिया। इस अवसर पर उन्होंने देशव्यापी निवेशक जागरूकता अभियान ‘मिशन जागरूक’ का भी शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य निवेशकों को सुरक्षित और जिम्मेदार निवेश के प्रति जागरूक बनाना है।
अपने मुख्य भाषण में वित्त मंत्री ने कहा कि डिजिटल और तकनीकी विस्तार के इस दौर में साइबर हमलों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी बड़े स्टॉक एक्सचेंज, डिपॉजिटरी या ब्रोकर पर साइबर हमला सफल होता है, तो इससे न केवल बाजारों में भारी व्यवधान आ सकता है, बल्कि निवेशकों का भरोसा भी गहरे स्तर पर प्रभावित हो सकता है। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीकें साइबर हमलों को अधिक तेज, जटिल और स्वायत्त बना रही हैं, जिससे खतरे कई गुना बढ़ गए हैं।
श्रीमती सीतारमण ने कहा कि केवल सेबी ही नहीं, बल्कि सभी विनियमित संस्थाओं को इस खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क और तैयार रहना होगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जैसे-जैसे हमले के तरीके विकसित हो रहे हैं, उसी गति से सुरक्षा तंत्र को भी मजबूत करना अनिवार्य है।
वित्त मंत्री ने सोशल मीडिया पर बढ़ते फर्जी निवेश वीडियो और ऐप्स को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि ‘डीपफेक AI’ के जरिए नेताओं और विशेषज्ञों की नकली पहचान बनाकर निवेशकों को गुमराह किया जा रहा है, जो एक गंभीर चुनौती है। इस संदर्भ में उन्होंने सेबी द्वारा लागू किए गए साइबर सुरक्षा और साइबर रेजिलिएंस फ्रेमवर्क की सराहना की और इसे और सशक्त बनाने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने सेबी की डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल फॉरेंसिक प्रयोगशाला की भी प्रशंसा की, जो AI और मशीन लर्निंग तकनीकों के जरिए बाजार में होने वाली धोखाधड़ी और हेरफेर का पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके साथ ही ‘सेबी चेक’ जैसी पहल को भी उन्होंने निवेशकों के लिए उपयोगी बताया, जो उन्हें धन हस्तांतरण से पहले मध्यस्थों की सत्यता जांचने में मदद करती है।
निवेशक जागरूकता पर जोर देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सेबी को क्षेत्रीय भाषाओं में बड़े पैमाने पर अभियान चलाने चाहिए, ताकि देश के हर वर्ग तक सही जानकारी पहुंच सके। उन्होंने कहा कि वित्तीय साक्षरता को मजबूत किए बिना सुरक्षित निवेश संभव नहीं है।
श्रीमती सीतारमण ने बिना पंजीकृत “फिन-फ्लुएंसर्स” के खिलाफ सेबी की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि खुदरा निवेशकों के भरोसे का दुरुपयोग किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। उन्होंने जिम्मेदार वित्तीय शिक्षा के लिए एक सुदृढ़ ढांचा विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
वित्त मंत्री ने नियामकीय ढांचे को लेकर भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि अत्यधिक जटिल नियमों के बजाय “सिद्धांत-आधारित विनियमन” (Principle-based regulation) को बढ़ावा देना चाहिए, जिससे पारदर्शिता और दक्षता दोनों सुनिश्चित हो सकें। साथ ही, उन्होंने सार्वजनिक परामर्श और बाजार प्रतिभागियों के साथ संवाद को मजबूत बनाए रखने की सराहना की।
कार्यक्रम में सेबी के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने बताया कि पिछले वर्षों में सेबी ने स्क्रीन-आधारित ट्रेडिंग, डीमैटेरियलाइजेशन और कॉरपोरेट गवर्नेंस जैसे कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश में 5,900 से अधिक सूचीबद्ध कंपनियां और 14 करोड़ से ज्यादा निवेशक हैं, जो भारतीय बाजार की बढ़ती ताकत को दर्शाते हैं।
समारोह के अंत में यह स्पष्ट संदेश सामने आया कि तकनीकी विकास के इस दौर में निवेशकों की सुरक्षा, जागरूकता और भरोसा बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। ‘मिशन जागरूक’ जैसे अभियान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे, जो भारत के निवेशक आधार को और मजबूत बनाएंगे।

