• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home कृषि समाचार

कक्षा से खेत और उद्योग तक: FAI ने SGT यूनिवर्सिटी के कृषि छात्रों को उर्वरक क्षेत्र की दी जानकारी

From classroom to farm and industry: FAI introduces SGT University agriculture students to the fertilizer sector

Emran Khan by Emran Khan
August 22, 2026
in कृषि समाचार
0
FAI_Director General_Fertiliser Orientation Program at SGT University

FAI_Director General_Fertiliser Orientation Program at SGT University

0
SHARES
2
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

भारतीय कृषि के बदलते स्वरूप, मिट्टी की सेहत, उर्वरक प्रबंधन और कृषि क्षेत्र में बढ़ते रोजगार के अवसरों को लेकर युवाओं को जागरूक करने की दिशा में फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) ने महत्वपूर्ण पहल की है। FAI के नॉर्दर्न रीजन ने गुरुग्राम स्थित SGT यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (FASC) के सहयोग से अंतिम और प्री-फाइनल वर्ष के कृषि छात्रों के लिए विशेष फर्टिलाइजर ओरिएंटेशन प्रोग्राम का आयोजन किया।

कार्यक्रम में कुल 138 कृषि छात्रों ने हिस्सा लिया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी देना नहीं था, बल्कि उन्हें देश के उर्वरक उद्योग, कृषि उत्पादन, मिट्टी के स्वास्थ्य, नई उर्वरक तकनीकों और इस क्षेत्र में उपलब्ध करियर के अवसरों से भी परिचित कराना था।

कार्यक्रम का उद्घाटन SGT यूनिवर्सिटी के प्रो-चांसलर प्रो. बी.जे. राव ने किया। इस दौरान FAI के महानिदेशक डॉ. सुरेश कुमार चौधरी ने मुख्य वक्ता के रूप में छात्रों को संबोधित किया और कृषि क्षेत्र के सामने मौजूद चुनौतियों तथा युवाओं के लिए उपलब्ध संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।

खाद सुरक्षा सीधे जुड़ी है खाद्य सुरक्षा से

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में प्रो. बी.जे. राव ने कहा कि देश की खाद सुरक्षा सीधे तौर पर खाद्य सुरक्षा से जुड़ी हुई है। यदि किसानों को आवश्यक पोषक तत्व और उर्वरक समय पर उपलब्ध नहीं होंगे तो कृषि उत्पादन और उत्पादकता पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा।

उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए पौधों की शारीरिक क्रियाओं, पोषक तत्वों के अवशोषण और फसल उत्पादकता बढ़ाने में उर्वरकों की भूमिका को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया।

प्रो. राव ने कहा कि कृषि विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए यह समझना जरूरी है कि पौधे किस प्रकार पोषक तत्वों का उपयोग करते हैं और अलग-अलग फसलों तथा मिट्टी की परिस्थितियों के अनुसार पोषक तत्वों की आवश्यकता किस प्रकार बदलती है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह के कार्यक्रम विद्यार्थियों को कृषि विज्ञान के साथ-साथ कृषि उद्योग में हो रहे बदलावों से भी लगातार अपडेट रखने में मदद करेंगे।

उनके अनुसार, विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले कृषि छात्रों और उद्योग के बीच संवाद बढ़ने से विद्यार्थियों को वास्तविक कृषि क्षेत्र की चुनौतियों और संभावनाओं को समझने का अवसर मिलता है।

सीमित कृषि भूमि में बढ़ाना होगा उत्पादन

FAI के महानिदेशक डॉ. सुरेश कुमार चौधरी ने अपने मुख्य वक्तव्य में भारत में कृषि उत्पादन बढ़ाने की चुनौती पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश का शुद्ध कृषि क्षेत्र लगभग 140 मिलियन हेक्टेयर है और इसमें भविष्य में बहुत अधिक विस्तार की गुंजाइश नहीं है।

ऐसी स्थिति में बढ़ती आबादी और खाद्य जरूरतों को पूरा करने के लिए कृषि उत्पादन बढ़ाने का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता उत्पादकता में वृद्धि है।

डॉ. चौधरी ने कहा कि सीमित कृषि भूमि से अधिक उत्पादन हासिल करने के लिए केवल पारंपरिक उर्वरकों पर निर्भर रहने की बजाय कृषि क्षेत्र को पोषण प्रबंधन के अधिक आधुनिक और विविध विकल्पों की ओर बढ़ना होगा।

उन्होंने ऑर्गेनिक, बायो, नैनो, फोर्टिफाइड और कस्टमाइज्ड फर्टिलाइजर्स जैसे विकल्पों की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके अनुसार, भविष्य की कृषि में फसल और मिट्टी की विशिष्ट जरूरतों के आधार पर पोषक तत्वों का अधिक वैज्ञानिक और संतुलित उपयोग महत्वपूर्ण होगा।

यह बदलाव न केवल फसल उत्पादकता बढ़ाने में मदद कर सकता है, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता और दीर्घकालिक कृषि स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।

मिट्टी की सेहत बनी बड़ी चुनौती

कार्यक्रम में मिट्टी के स्वास्थ्य को कृषि क्षेत्र की महत्वपूर्ण चुनौतियों में शामिल किया गया। लंबे समय तक असंतुलित पोषक तत्वों के इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरता और उसकी उत्पादन क्षमता प्रभावित हो सकती है।

ऐसे में कृषि स्नातकों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो जाती है। भविष्य में किसानों को सही फसल के लिए सही पोषक तत्व, सही मात्रा और सही समय पर उर्वरक इस्तेमाल करने की सलाह देने में प्रशिक्षित कृषि विशेषज्ञ महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

FAI का जोर भी वैज्ञानिक और संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने पर रहा है। विश्वविद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों को उर्वरक उद्योग और पोषक तत्व प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी देने से वे आगे चलकर किसानों और कृषि उद्योग के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बन सकते हैं।

आयात पर निर्भरता भी महत्वपूर्ण मुद्दा

डॉ. चौधरी ने भारत की उर्वरक क्षेत्र में कच्चे माल और तैयार उर्वरकों के आयात पर महत्वपूर्ण निर्भरता की ओर भी छात्रों का ध्यान आकर्षित किया।

वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक परिस्थितियों में तेजी से बदलाव के बीच उर्वरक और कच्चे माल की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। इसके बावजूद भारत के उर्वरक उद्योग ने सरकार के साथ मिलकर किसानों के लिए उर्वरकों की उपलब्धता बनाए रखने के प्रयास किए हैं।

उन्होंने कहा कि हाल के भू-राजनीतिक व्यवधानों के बावजूद किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में उद्योग और सरकार के बीच सहयोग महत्वपूर्ण रहा है।

यह मुद्दा कृषि छात्रों के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उर्वरक की उपलब्धता केवल उत्पादन का विषय नहीं है। इसका संबंध अंतरराष्ट्रीय बाजार, कच्चे माल की कीमत, समुद्री परिवहन, ऊर्जा लागत, आयात नीति और सरकारी नीतियों से भी है।

कृषि छात्रों के लिए रोजगार के बड़े अवसर

कार्यक्रम में डॉ. सुरेश कुमार चौधरी ने कृषि छात्रों के लिए एक सकारात्मक संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में रोजगार और करियर के बहुत बड़े अवसर मौजूद हैं, लेकिन बड़ी संख्या में कृषि स्नातक अभी इन अवसरों का पूरी तरह लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।

कृषि अब केवल खेत में फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रह गई है। उर्वरक, बीज, कृषि रसायन, जैविक उत्पाद, बायोफर्टिलाइजर, नैनो तकनीक, कृषि मशीनरी, एग्रीटेक, ड्रोन, डिजिटल कृषि, कृषि परामर्श, अनुसंधान, सप्लाई चेन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे अनेक क्षेत्र कृषि स्नातकों के लिए नए करियर विकल्प उपलब्ध करा रहे हैं।

उन्होंने छात्रों से इन अवसरों को पहचानने और कृषि उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुसार अपने कौशल को विकसित करने का आह्वान किया।

उनका संदेश विशेष रूप से अंतिम और प्री-फाइनल वर्ष के विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि इसी चरण में विद्यार्थी उच्च शिक्षा, नौकरी, उद्यमिता या अनुसंधान जैसे करियर विकल्पों को लेकर निर्णय लेना शुरू करते हैं।

उद्योग और विश्वविद्यालय के बीच संवाद जरूरी

FAI द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू विश्वविद्यालय और उर्वरक उद्योग के बीच संवाद स्थापित करना भी रहा। अक्सर कृषि शिक्षा में छात्रों को वैज्ञानिक सिद्धांतों और पाठ्यक्रम आधारित जानकारी मिलती है, लेकिन उद्योग के वास्तविक कामकाज, उत्पादन प्रक्रियाओं, बाजार की जरूरतों और रोजगार के अवसरों की जानकारी सीमित होती है।

ऐसे कार्यक्रम छात्रों को कक्षा से बाहर निकलकर वास्तविक उद्योग की दुनिया को समझने का अवसर प्रदान करते हैं।

उर्वरक उद्योग के विशेषज्ञों द्वारा छात्रों को दी गई जानकारी से विद्यार्थियों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि वे अपनी शैक्षणिक योग्यता को उद्योग की जरूरतों के साथ कैसे जोड़ सकते हैं।

सात विशेषज्ञ प्रस्तुतियों से मिली जानकारी

कार्यक्रम के दौरान उर्वरक क्षेत्र और CFQC&TI, फरीदाबाद से जुड़े विशेषज्ञों द्वारा कुल सात प्रस्तुतियां दी गईं। इन प्रस्तुतियों में उर्वरक क्षेत्र के विभिन्न तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं पर छात्रों को जानकारी दी गई।

इससे विद्यार्थियों को उर्वरक उद्योग की संरचना, कृषि में उर्वरकों की भूमिका और क्षेत्र में हो रहे तकनीकी बदलावों को समझने का अवसर मिला।

कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने छात्रों को केवल पारंपरिक उर्वरक उपयोग तक सीमित जानकारी देने के बजाय बदलती तकनीक और आधुनिक पोषक तत्व प्रबंधन की दिशा से भी परिचित कराया।

क्विज प्रतियोगिता में छात्रों ने दिखाया ज्ञान

कार्यक्रम को विद्यार्थियों के लिए अधिक संवादात्मक और रोचक बनाने के उद्देश्य से एक क्विज प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। इसमें छात्रों ने कृषि और उर्वरक क्षेत्र से संबंधित विषयों पर अपने ज्ञान का प्रदर्शन किया।

क्विज में बेहतर प्रदर्शन करने वाले तीन छात्रों को FAI के प्रकाशन पुरस्कार के रूप में प्रदान किए गए। इस पहल से छात्रों को कृषि और उर्वरक क्षेत्र से संबंधित जानकारी को प्रतियोगितात्मक तरीके से समझने और सीखने का अवसर मिला।

विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने भी किया संबोधित

कार्यक्रम में डॉ. पूजा पंत, डीन, FASC तथा डॉ. आर.के. यादव, प्रोफेसर (NRM), FASC, SGT यूनिवर्सिटी ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया।

उन्होंने छात्रों को कृषि शिक्षा के दौरान व्यावहारिक ज्ञान, नवीन तकनीकों और उद्योग की आवश्यकताओं पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। शिक्षकों ने इस प्रकार के कार्यक्रमों को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और उनके करियर मार्गदर्शन के लिए उपयोगी बताया।

1955 से कृषि क्षेत्र में सक्रिय है FAI

फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) की स्थापना वर्ष 1955 में हुई थी। यह एक प्रमुख गैर-लाभकारी संगठन है, जो देश के उर्वरक क्षेत्र से जुड़े विभिन्न हितधारकों का प्रतिनिधित्व करता है। इसमें उर्वरक निर्माता, आयातक, तकनीकी सेवा प्रदाता, उपकरण आपूर्तिकर्ता और शोधकर्ता शामिल हैं।

FAI का उद्देश्य उर्वरक क्षेत्र की परिचालन दक्षता को बेहतर बनाना और संतुलित एवं वैज्ञानिक उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देना है। संगठन उद्योग और सरकार के बीच संवाद स्थापित करने तथा नीति निर्माण के लिए आवश्यक सुझाव उपलब्ध कराने में भी भूमिका निभाता है।

FAI के चार क्षेत्रीय कार्यालय, तकनीकी विभाग, प्रशिक्षण कार्यक्रम, विशेष अध्ययन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग इसे उर्वरक क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनाते हैं।

संगठन उत्पादन, वितरण, स्थिरता और उर्वरक उपयोग दक्षता में निरंतर सुधार के लिए विभिन्न गतिविधियों का संचालन करता है। इसके अलावा FAI द्वारा प्रकाशित जर्नल और शोध सामग्री भी कृषि एवं उर्वरक क्षेत्र में महत्वपूर्ण संदर्भ के रूप में उपयोग की जाती हैं।

कृषि के भविष्य में युवाओं की अहम भूमिका

SGT यूनिवर्सिटी में आयोजित यह कार्यक्रम ऐसे समय में हुआ है जब भारतीय कृषि तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रही है। जलवायु परिवर्तन, मिट्टी की सेहत, सीमित कृषि भूमि, बढ़ती उत्पादन लागत, पोषक तत्वों के असंतुलित उपयोग और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला जैसी चुनौतियां कृषि क्षेत्र के सामने हैं।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए केवल तकनीक पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि प्रशिक्षित और जागरूक कृषि मानव संसाधन भी जरूरी होगा। कृषि विश्वविद्यालयों और उद्योग के बीच इस तरह का संवाद भविष्य के कृषि विशेषज्ञों को बेहतर तरीके से तैयार कर सकता है।

FAI का यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए इस मायने में भी महत्वपूर्ण रहा कि इसमें उर्वरक को केवल एक कृषि इनपुट के रूप में नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा, मिट्टी के स्वास्थ्य, कृषि उत्पादकता, ऊर्जा, वैश्विक व्यापार और रोजगार से जुड़े व्यापक क्षेत्र के रूप में समझने का अवसर मिला।

कुल मिलाकर, SGT यूनिवर्सिटी में आयोजित फर्टिलाइजर ओरिएंटेशन प्रोग्राम ने कृषि छात्रों को उर्वरक उद्योग की मौजूदा स्थिति और भविष्य की संभावनाओं से जोड़ने का काम किया। कार्यक्रम में जहां एक ओर खाद सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा के बीच संबंध को रेखांकित किया गया, वहीं दूसरी ओर छात्रों को आधुनिक उर्वरक विकल्पों, मिट्टी की सेहत और कृषि क्षेत्र में उपलब्ध करियर अवसरों के बारे में जानकारी दी गई।

FAI और कृषि शिक्षण संस्थानों के बीच इस प्रकार की साझेदारी आने वाले समय में और महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे छात्रों को उद्योग की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार करने, वैज्ञानिक उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने और कृषि क्षेत्र के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करने में मदद मिलेगी। सीमित कृषि भूमि से अधिक उत्पादन हासिल करने की भारत की चुनौती के बीच वैज्ञानिक पोषण प्रबंधन और प्रशिक्षित कृषि युवाओं का संयोजन देश की भविष्य की खाद्य सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

 

Tags: AgricultureFAIFamingfertilizer
Previous Post

उर्वरक उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए ऊर्जा दक्षता जरूरी, FAI के बिहार कार्यशाला में तकनीकी उन्नयन और अनुभव साझा करने पर जोर

Next Post

Mission Cotton Productivity: 32 लाख किसानों के लिए ‘White Gold’ की नई उम्मीद, जानिए कैसे मिलेगा फायदा

Next Post
Mission Cotton Productivity

Mission Cotton Productivity: 32 लाख किसानों के लिए ‘White Gold’ की नई उम्मीद, जानिए कैसे मिलेगा फायदा

Recent Posts

  • Guava Development Scheme: किसानों को बाग लगाने पर मिल सकती है सरकारी मदद, जानिए Subsidy, Eligibility और Application Process
  • Banana Development Scheme: किसानों को Banana Farming पर कैसे मिलेगी सरकारी मदद? जानें Subsidy, Eligibility और Application Process की पूरी जानकारी
  • Mango Development Scheme: किसानों को आम का बाग लगाने के लिए मिलेगी सरकारी मदद, जानें Subsidy से Online Application तक पूरी जानकारी
  • Mission Cotton Productivity: 32 लाख किसानों के लिए ‘White Gold’ की नई उम्मीद, जानिए कैसे मिलेगा फायदा
  • कक्षा से खेत और उद्योग तक: FAI ने SGT यूनिवर्सिटी के कृषि छात्रों को उर्वरक क्षेत्र की दी जानकारी

Recent Comments

No comments to show.
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Quick Links

  • Privacy policy
  • Terms and Conditions

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.