भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली स्थित आईसीएआर कन्वेंशन सेंटर के भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम हॉल में ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑन वुमेन इन एग्री-फूड सिस्टम्स (GCWAS–2026) का उद्घाटन किया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सम्मेलन का उद्देश्य कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करना और उनके नेतृत्व को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण तथा कई राज्यों में स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण ने शासन और विकास में महिलाओं की भागीदारी को नई मजबूती दी है।
उन्होंने बताया कि दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत देशभर में 10 करोड़ से अधिक महिलाओं को 90 लाख से ज्यादा स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संगठित किया गया है। इन प्रयासों का परिणाम है कि लगभग 3 करोड़ महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं, जिनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक है। सरकार आने वाले वर्षों में 6 करोड़ महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है।
कृषि अनुसंधान और शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर प्रकाश डालते हुए चौहान ने कहा कि भुवनेश्वर स्थित आईसीएआर-केंद्रीय महिला कृषि संस्थान वर्ष 1996 से महिलाओं की कृषि में भूमिका को सशक्त करने के लिए कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि कृषि अनुसंधान सेवा में महिलाओं की भागीदारी 2006-07 में 7.9 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में लगभग 41 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो कृषि विज्ञान और नवाचार में महिलाओं की बढ़ती ताकत को दर्शाती है।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि भविष्य की कृषि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और नेतृत्व से और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि महिला किसानों की प्रेरणादायक कहानियों को व्यापक रूप से साझा किया जाना चाहिए, ताकि समाज में उनके योगदान के प्रति जागरूकता बढ़े।
राष्ट्रपति ने उन महिला किसानों का भी उल्लेख किया जिन्हें जैविक खेती, बीज संरक्षण और सामुदायिक नेतृत्व के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। इनमें कमला देवी रोंगमेई, महाराष्ट्र की ‘सीड मदर’ रहीबाई सोमा पोपेरे, बिहार की ‘किसान चाची’ राजकुमारी देवी और ओडिशा की कमला पुजारी शामिल हैं।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2026 को “इंटरनेशनल ईयर ऑफ द वुमन फार्मर” घोषित किए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि यह पहल कृषि क्षेत्र में लैंगिक असमानताओं को दूर करने और महिलाओं के नेतृत्व को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
राष्ट्रपति ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए चल रही सरकारी योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत खोले गए 57 करोड़ बैंक खातों में से 56 प्रतिशत खाते महिलाओं के नाम हैं, जबकि मुद्रा योजना के 68 प्रतिशत लाभार्थी भी महिलाएं हैं। इसके अलावा नमो ड्रोन दीदी योजना और ‘लखपति दीदी’ मिशन जैसी पहलें ग्रामीण महिलाओं को नई आर्थिक संभावनाएं प्रदान कर रही हैं।
ट्रस्ट फॉर एडवांसमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (TAAS) के अध्यक्ष डॉ. आर. एस. परोड़ा ने कहा कि यह सम्मेलन कृषि मूल्य श्रृंखला के हर चरण—उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और बाजार संपर्क—में महिलाओं की परिवर्तनकारी भूमिका को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने जोर दिया कि केवल प्रतिनिधित्व पर्याप्त नहीं है, बल्कि महिलाओं को नेतृत्व की जिम्मेदारी भी सौंपी जानी चाहिए।
कार्यक्रम में पूर्व जैव प्रौद्योगिकी सचिव डॉ. रेणु स्वरूप, कनेक्ट4इम्पैक्ट एडवाइजरी ग्रुप की अध्यक्ष डॉ. एग्नेस कालीबाता, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट, पीपीवीएंडएफआरए के अध्यक्ष डॉ. त्रिलोचन मोहापात्रा सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
“ड्राइविंग प्रोग्रेस, अटेनिंग न्यू हाइट्स” थीम पर आयोजित इस सम्मेलन में भारत और विदेशों से 700 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए हैं। तीन दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (12-14 मार्च 2026) में नीति संवाद, तकनीकी सत्र और इंटरएक्टिव मंच आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें लैंगिक समानता, आर्थिक सशक्तिकरण, तकनीक तक पहुंच, नेतृत्व विकास और समावेशी कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखला जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।
सम्मेलन के दौरान महिला-केंद्रित कृषि तकनीकों और नवाचारों की प्रदर्शनी भी आयोजित की गई है, जिसमें महिला उद्यमियों और स्टार्ट-अप्स को अपने समाधान प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है। इस वैश्विक मंच के माध्यम से महिलाओं के लिए अनुकूल नीतियों और कार्यक्रमों को मजबूत करने की दिशा में ठोस सुझाव और रणनीति तैयार करने की उम्मीद जताई जा रही है।

