भारत में दूध और डेयरी उत्पादों की खपत केवल एक गिलास दूध तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह अब रोजमर्रा की भोजन संस्कृति का अहम हिस्सा बन चुकी है। हाल ही में जारी लैक्टोग्राफी रिपोर्ट (FY 2025–26) के अनुसार देश के 75.8 प्रतिशत भारतीय अब ‘एक्टिव डेयरी कंज्यूमर’ हैं, यानी ऐसे परिवार जो नियमित रूप से दूध के साथ-साथ दही, पनीर, घी, मक्खन, लस्सी, योगर्ट और चीज जैसे कई डेयरी उत्पादों का सेवन करते हैं।
रिपोर्ट बताती है कि भारतीय घरों में अब केवल दूध नहीं बल्कि कई डेयरी उत्पादों का एक पूरा “डेयरी बास्केट” तैयार हो रहा है। इन सक्रिय उपभोक्ताओं में दही 80 प्रतिशत के साथ सबसे लोकप्रिय उत्पाद है। इसके बाद पनीर (76%), मक्खन (74%) और घी (71%) का स्थान है। इसके अलावा लस्सी (63%), चीज (58%), योगर्ट (57%) और पारंपरिक दूध से बने मिठाइयों (55%) की भी अच्छी खपत देखी जा रही है।
अलग-अलग क्षेत्रों में अलग डेयरी परंपरा
भारत में डेयरी उत्पादों का उपयोग हर क्षेत्र में अलग-अलग रूप में दिखाई देता है। दक्षिण भारत में जहां दही चावल और छाछ भोजन का अहम हिस्सा हैं, वहीं उत्तर भारत में रायता और दही रोजमर्रा के खाने में प्रमुख रूप से शामिल होते हैं। इस तरह दही पूरे देश में सबसे आम और लोकप्रिय डेयरी उत्पाद के रूप में सामने आया है।
रिपोर्ट के अनुसार पनीर, जो पहले मुख्य रूप से उत्तर भारतीय व्यंजनों तक सीमित माना जाता था, अब पूरे देश में लोकप्रिय हो चुका है। आज यह विभिन्न क्षेत्रीय व्यंजनों में उपयोग किया जा रहा है और शाकाहारी लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रोटीन स्रोत बनकर उभरा है।
पारंपरिक स्वाद और आधुनिक जीवनशैली का मेल
भारतीय घरों में घी, मक्खन और दूध से बनी पारंपरिक मिठाइयों का महत्व आज भी बना हुआ है। ये उत्पाद केवल स्वाद ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव का भी प्रतीक हैं। त्योहारों और पारिवारिक अवसरों पर इनका उपयोग आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
इसके साथ ही डेयरी उत्पाद आधुनिक जीवनशैली के साथ भी तेजी से जुड़ रहे हैं। खासकर शहरी और युवा उपभोक्ताओं के बीच दूध आधारित स्मूदी, प्रोटीन शेक और कैफे-स्टाइल पेय तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। अब दूध और डेयरी पेय केवल बच्चों के लिए नहीं बल्कि फिटनेस, ऊर्जा और पोषण के लिए भी अपनाए जा रहे हैं।
बदलती उपभोक्ता पसंद को समझना जरूरी
रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए गोडरेज जर्सी के मार्केटिंग प्रमुख शांतनु राज ने कहा कि भारत अब “सिर्फ एक गिलास दूध” की अवधारणा से आगे बढ़ चुका है। डेयरी क्षेत्र तेजी से एक मल्टी-प्रोडक्ट और वैल्यू-एडेड श्रेणी के रूप में विकसित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि आज उपभोक्ता ऐसे उत्पाद चाहते हैं जो स्वाद के साथ-साथ पोषण, सुविधा और आधुनिक जीवनशैली की जरूरतों को भी पूरा करें। कंपनियां भी अब इसी दिशा में नए-नए उत्पाद विकसित कर रही हैं, जिनमें अधिक प्रोटीन और बेहतर पोषण पर ध्यान दिया जा रहा है।
भारतीय भोजन में डेयरी की मजबूत भूमिका
रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि डेयरी उत्पाद भारतीय घरों में पोषण का एक मजबूत आधार बने हुए हैं। चाहे पारंपरिक थाली हो, घर का नाश्ता, त्योहारों की मिठाइयां या फिर जिम के बाद का प्रोटीन शेक—दूध और उससे बने उत्पाद हर जगह अपनी जगह बना रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत में डेयरी उत्पादों की मांग और विविधता दोनों बढ़ने की संभावना है, क्योंकि उपभोक्ता अब स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्य और पोषण पर भी अधिक ध्यान दे रहे हैं।
इस तरह डेयरी आज केवल एक खाद्य पदार्थ नहीं बल्कि भारतीय जीवनशैली और पोषण व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।

