वैश्विक स्तर पर गैस आपूर्ति में आई बाधाओं के कारण यूरिया उत्पादन पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह स्थिति इस बात की याद दिलाती है कि खाद्य सुरक्षा किस तरह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और भू-राजनीतिक परिस्थितियों से जुड़ी हुई है।
कृषि प्रौद्योगिकी क्षेत्र से जुड़े Vivek Raj, जो Panama Corporation के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं, ने कहा कि जब उर्वरक संयंत्र अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाते और उत्पादन करीब 60 प्रतिशत तक सीमित हो जाता है, तो इसका सीधा असर किसानों, खाद्य कीमतों और अंततः आम उपभोक्ताओं पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियां यह संकेत देती हैं कि कृषि क्षेत्र को अधिक मजबूत और लचीला बनाने की आवश्यकता है। यदि कृषि प्रणाली को बाहरी झटकों से सुरक्षित बनाना है तो नई तकनीकों को तेजी से अपनाना होगा। उनके अनुसार आधुनिक तकनीकें किसानों को बेहतर उत्पादन और अधिक स्थिर आय प्राप्त करने में मदद कर सकती हैं।
विवेक राज ने कहा कि कृषि क्षेत्र में एक मजबूत “एग्री-टेक स्टैक” विकसित करने की जरूरत है, जिसमें डेटा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत कृषि प्रणालियों को शामिल किया जाए। इससे खेती को अधिक वैज्ञानिक और परिणाम-आधारित बनाया जा सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रिसिजन फार्मिंग और नियंत्रित वातावरण में की जाने वाली खेती जैसी आधुनिक प्रणालियां किसानों की पारंपरिक इनपुट पर निर्भरता को कम कर सकती हैं। इन तकनीकों की मदद से उत्पादन का अनुमान अधिक सटीक लगाया जा सकता है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में उतार-चढ़ाव के बावजूद खेती की स्थिरता बनाए रखी जा सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत जैसे देश में, जहां कृषि करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार है और अर्थव्यवस्था में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है, वहां कृषि को तकनीक से जोड़ना भविष्य की जरूरत बन गया है। डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक खेती प्रणालियों के समन्वय से एक ऐसी कृषि व्यवस्था विकसित की जा सकती है जो बाहरी संकटों से कम प्रभावित हो और किसानों, बाजारों तथा उपभोक्ताओं के लिए अधिक भरोसेमंद साबित हो।

