֍:किसानों के लिए लाभकारी है प्राकृतिक खेती§ֆ:प्राकृतिक खेती बिना रसायनों के इस्तेमाल पर होती है. इसमें देसी गाय का काफी महत्व होता है, जिससे खेती की लागत कम होती है. प्राकृतिक खेती में देसी गाय के गोबर से बनी खाद और अन्यज प्राकृतिक तरीके से बनाए गए कीटनाशी आदि का इस्तेसमाल किया जाता है, जिससे उपजे उत्पा द स्वाइस्य्मे के लिए किसी वरदान की तरह माने जाते हैं.§֍:बाजार में प्राकृतिक खेती की बढ़ती डिमांड§ֆ:शरीर के लिए बेहतर और पोषक तत्वों से भरपूर होने की वजह से प्राकृतिक उत्पाकदों की मांग बहुत अधिक होती है. इसी के साथ महंगे दामों पर बिकते हैं. लेकिन, अभी प्राकृतिक खेती से उत्पातदन बेहद कम होता है. प्राकृतिक खेती का आधार देसी गाय इसलिए है, क्यों कि देसी गाय के एक ग्राम गोबर में 300 से 500 करोड़ तक सूक्ष्म जीवाणु मौजूद होते हैं§֍:सीएम सैनी ने कही ये बात§ֆ:सीएम नायब सैनी ने कहा कि हमारी सरकार की कोशिशों के चलते प्रदेश में 500 से ज्या दा गौशालाएं हो गई हैं. इन गौशालाओं में सरकार ने चारे की व्यवस्था करने का भी प्रावधान किया है. समाज के अनेक दानी सज्जन गायों के अभियान में भरपूर सहयोग करते हैं. सीएम ने कहा कि अब पंचायती भूमि पर भी गौशालाएं खोली जा सकती हैं. इसके अलावा जो कोई गौशाला के लिए भूमि देगा, उसकी सीएलयू की भी जरूरत नहीं है. गौशाला में शेड बनाने का भी प्रावधान सरकार द्वारा किया जा रहा है.§भारत में किसानों को खेती और पशु पालन के लिए कई योजनाओं द्वारा प्रोत्साहित किया जाता है. अब हरियाणा सरकार राज्य के किसान, जो पशु पालन की शुरुआत गाय के साथ करना चाहते हैं और जो किसान प्राकृतिक खेती करना चाहते हैं उनके लिए खुशखबर लेकर आई है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्यि सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कथन के अनुसार गंगा की स्वच्छता, गाय के संवर्धन को लेकर लगतार कोशिश कर रही है. मुख्यमंत्री ने इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में आयोजित बृज रस कथा के अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने गौ सेवा का बजट 40 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 400 करोड रुपए किया है. इसके अलावा अपने घरों में गाय पालने वाले किसानों को सरकार 30,000 रुपये की राशि दे रही है.

