भारतीय कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में तकनीकी नवाचार, निवेश, मूल्य संवर्धन और वैश्विक साझेदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) द्वारा ICC Global Business Summit 2026 का आयोजन किया जा रहा है। दो दिवसीय यह वैश्विक सम्मेलन 18 और 19 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित ताज पैलेस में आयोजित होगा।
सम्मेलन के दूसरे संस्करण में भारत और विदेशों से 1,000 से अधिक प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। इनमें विभिन्न देशों के सरकारी प्रतिनिधि, राजदूत, वरिष्ठ नीति-निर्माता, उद्योग जगत के प्रमुख, CEO, वैश्विक निवेशक, उद्योग संघों के प्रतिनिधि और विशेषज्ञ शामिल होंगे। सम्मेलन में 15 से अधिक देशों की भागीदारी प्रस्तावित है।
समिट के दौरान कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, ऊर्जा एवं ग्रीन टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, वित्तीय सेवाएं, IT, कम्युनिकेशन एवं AI, डिफेंस एवं एयरोस्पेस, हेल्थकेयर एवं फार्मा, केमिकल्स एवं पेट्रोकेमिकल्स, माइनिंग एवं मेटल्स तथा सर्कुलर इकोनॉमी जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा होगी।
कृषि और फूड सिस्टम पर विशेष सत्र
ICC Global Business Summit के तहत 19 सितंबर 2026 को सुबह 9:30 बजे कृषि और खाद्य क्षेत्र पर एक विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। इस सत्र का विषय है—
“Transforming Agriculture & Food Systems: Innovation, Investment and Global Partnerships for Sustainable Growth”
इस विशेष सत्र में कृषि और खाद्य प्रणाली में हो रहे बदलावों, नई तकनीकों, निवेश के अवसरों, वैश्विक साझेदारी और किसानों की आय बढ़ाने के उपायों पर व्यापक चर्चा होगी।
भारत में कृषि और खाद्य क्षेत्र करोड़ों लोगों की आजीविका से जुड़ा है। इसके साथ ही यह ग्रामीण रोजगार, खाद्य सुरक्षा, कृषि आधारित उद्योग, मूल्य संवर्धन और निर्यात के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में कृषि क्षेत्र को अधिक आधुनिक, टिकाऊ और वैश्विक बाजारों के अनुरूप बनाने पर सम्मेलन में विशेष जोर रहेगा।
जलवायु परिवर्तन और वैश्विक बदलाव बन रहे नई चुनौती
कृषि क्षेत्र आज कई नई चुनौतियों का सामना कर रहा है। जलवायु परिवर्तन, भू-राजनीतिक घटनाक्रम, वैश्विक व्यापार में बदलाव, उपभोक्ताओं की बदलती पसंद, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और नई तकनीकों का तेजी से विकास कृषि एवं खाद्य प्रणाली को प्रभावित कर रहे हैं।
ऐसे वातावरण में केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। उत्पादन से लेकर भंडारण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, परिवहन और बाजार तक पूरी एग्रीकल्चर वैल्यू चेन को मजबूत करने की आवश्यकता है।
ICC के अनुसार, कृषि क्षेत्र में लचीली और आधुनिक वैल्यू चेन विकसित करना, खाद्य प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना, गुणवत्ता एवं ट्रेसबिलिटी में सुधार करना, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना और किसानों तथा कृषि व्यवसायों के लिए घरेलू एवं वैश्विक बाजारों तक पहुंच बढ़ाना महत्वपूर्ण प्राथमिकताएं हैं।
डिजिटल एग्रीकल्चर और AI से बदलेगी खेती
विशेष सत्र में Digital Agriculture और AgriTech Innovation पर विशेष चर्चा की जाएगी। आधुनिक कृषि में डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेंसर, डेटा एनालिटिक्स और प्रिसिजन फार्मिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।
प्रिसिजन एग्रीकल्चर के माध्यम से खेत की वास्तविक जरूरत के अनुसार पानी, उर्वरक और कृषि इनपुट के इस्तेमाल को अधिक सटीक बनाया जा सकता है। वहीं AI आधारित तकनीकें मौसम पूर्वानुमान, फसल निगरानी, रोग एवं कीट पहचान और उत्पादन संबंधी निर्णयों में सहायता कर सकती हैं।
सम्मेलन में इस बात पर विचार किया जाएगा कि इन तकनीकों को बड़े किसानों के साथ-साथ छोटे और सीमांत किसानों तक किस प्रकार पहुंचाया जाए, ताकि डिजिटल कृषि का लाभ व्यापक स्तर पर मिल सके।
फूड प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर जोर
भारत में कृषि उत्पादन का बड़ा हिस्सा प्राथमिक कृषि उत्पाद के रूप में बाजार में पहुंचता है। यदि इन उत्पादों का प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन किया जाए तो किसानों और कृषि व्यवसायों के लिए अतिरिक्त आर्थिक अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
ICC के विशेष सत्र में फूड प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और इंटीग्रेटेड सप्लाई चेन को मजबूत करने पर चर्चा होगी।
बेहतर प्रसंस्करण से कृषि उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार करने में मदद मिल सकती है।
फल, सब्जियां, मसाले, अनाज, दालें, डेयरी और अन्य कृषि उत्पादों में प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के माध्यम से रोजगार और ग्रामीण उद्योगों के विस्तार की भी बड़ी संभावनाएं हैं।
निवेश और वैश्विक बाजारों पर भी होगी चर्चा
कृषि एवं खाद्य क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए निजी और संस्थागत निवेश की भूमिका महत्वपूर्ण है। सम्मेलन में निवेश आकर्षित करने, बाजार पहुंच बढ़ाने और Free Trade Agreements (FTAs) से मिलने वाले अवसरों पर भी चर्चा होगी।
वैश्विक बाजार में भारतीय कृषि उत्पादों की मांग बढ़ाने के लिए गुणवत्ता, खाद्य सुरक्षा, ट्रेसबिलिटी, मानकीकरण और प्रतिस्पर्धी कीमत जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हैं।
ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप भारतीय कृषि और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को तैयार करना सम्मेलन के प्रमुख एजेंडों में शामिल रहेगा।
किसानों की आय और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर फोकस
कृषि क्षेत्र में तकनीकी बदलाव और निवेश का अंतिम उद्देश्य किसानों तथा पूरी कृषि मूल्य श्रृंखला को अधिक लाभकारी बनाना है। नई तकनीकों को अपनाने से उत्पादन लागत कम करने, उत्पादकता बढ़ाने और बाजार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
वहीं बेहतर सप्लाई चेन और प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से किसानों को अपनी उपज के लिए नए बाजार उपलब्ध हो सकते हैं। इससे कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन बढ़ाने और किसानों की आय में सुधार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
सम्मेलन में इस बात पर भी विचार किया जाएगा कि कृषि अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी समाधानों को बाजार की वास्तविक जरूरतों से कैसे जोड़ा जाए।
‘Build Solutions for the World’ पर जोर
विशेष सत्र का एक महत्वपूर्ण एजेंडा “Build Solutions for the World” है। इसका उद्देश्य भारतीय कृषि और खाद्य क्षेत्र में विकसित हो रहे नवाचारों एवं समाधानों को वैश्विक स्तर पर ले जाने की संभावनाओं पर चर्चा करना है।
भारत में डिजिटल कृषि, कृषि मशीनरी, खाद्य प्रसंस्करण, जैविक एवं टिकाऊ कृषि, सप्लाई चेन टेक्नोलॉजी और कृषि आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म के क्षेत्र में कई नए समाधान विकसित हो रहे हैं। इन्हें वैश्विक बाजार की जरूरतों के अनुरूप विकसित करके भारत कृषि तकनीक और खाद्य समाधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उद्योग, सरकार और किसानों को एक मंच पर लाएगा सम्मेलन
ICC के अनुसार, विशेष सत्र में नीति-निर्माता, एग्रीबिजनेस लीडर्स, फूड प्रोसेसर, निवेशक, टेक्नोलॉजी इनोवेटर्स, किसान संगठनों और अंतरराष्ट्रीय हितधारकों को एक मंच पर लाया जाएगा।
इसका उद्देश्य कृषि मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने, तकनीक अपनाने की गति बढ़ाने, निवेश के नए अवसर पैदा करने और भारतीय कृषि एवं खाद्य उत्पादों के लिए घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों को विस्तार देने पर संवाद स्थापित करना है।
समिट में प्रतिभागियों को वैश्विक प्रतिनिधियों के साथ B2B और B2G नेटवर्किंग के अवसर भी मिलेंगे। इससे कृषि एवं खाद्य क्षेत्र की कंपनियों, निवेशकों और संस्थानों के बीच संभावित साझेदारी के नए रास्ते खुल सकते हैं।
1,000 से अधिक प्रतिनिधियों के जुटने की उम्मीद
ICC Global Business Summit का दूसरा संस्करण पहले संस्करण की तुलना में बड़े स्तर पर आयोजित किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, इसमें 1,000 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।
समिट में सरकार और उद्योग जगत के वरिष्ठ नेताओं के साथ वैश्विक कंपनियों एवं निवेशकों की भागीदारी इसे व्यापार और निवेश की दृष्टि से महत्वपूर्ण मंच बना सकती है।
कृषि एवं फूड प्रोसेसिंग पर होने वाला विशेष सत्र इस व्यापक सम्मेलन में इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की कृषि अर्थव्यवस्था अब केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रह गई है। कृषि से जुड़े उद्योगों में प्रोसेसिंग, टेक्नोलॉजी, लॉजिस्टिक्स, निर्यात, डिजिटल सेवाओं और निवेश की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
कृषि अर्थव्यवस्था को ट्रिलियन-डॉलर स्तर तक ले जाने का एजेंडा
ICC के विशेष सत्र का व्यापक एजेंडा “Building the Next Trillion-Dollar Agriculture & Food Economy” है। इसके तहत स्मार्ट फार्मिंग, डिजिटल कृषि, कृषि-तकनीक, खाद्य प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, एकीकृत सप्लाई चेन, निवेश, बाजार पहुंच और वैश्विक व्यापार को कृषि विकास से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा।
भारत की कृषि और खाद्य अर्थव्यवस्था के सामने आने वाले वर्षों में उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ उत्पाद की गुणवत्ता, मूल्य संवर्धन, तकनीकी दक्षता, टिकाऊपन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की चुनौती होगी।
ऐसे में नई दिल्ली में आयोजित होने वाला ICC Global Business Summit 2026 कृषि क्षेत्र के विभिन्न हितधारकों के बीच संवाद और साझेदारी का महत्वपूर्ण मंच बन सकता है। विशेष रूप से 19 सितंबर को होने वाला कृषि एवं फूड सिस्टम सत्र भारतीय कृषि को तकनीक, निवेश और वैश्विक बाजारों से जोड़ने की दिशा में नई संभावनाओं पर चर्चा का अवसर प्रदान करेगा।
समिट: ICC Global Business Summit 2026
तारीख: 18-19 सितंबर 2026
स्थान: ताज पैलेस, नई दिल्ली
कृषि एवं फूड प्रोसेसिंग विशेष सत्र: 19 सितंबर 2026, सुबह 9:30 बजे
विषय: Transforming Agriculture & Food Systems: Innovation, Investment and Global Partnerships for Sustainable Growth
