पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के कृषि क्षेत्र पर भी दिखने लगा है। गैस (LNG) सप्लाई में कमी के कारण IFFCO के दो प्रमुख फर्टिलाइजर प्लांट—आंवला और कलोल—अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। इससे यूरिया उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
क्या है पूरा मामला?
- पश्चिम एशिया में तनाव और समुद्री मार्गों में बाधा से LNG सप्लाई प्रभावित
- गैस की कमी के कारण IFFCO के प्लांट बंद
- उत्पादन रुकने से यूरिया की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है
खरीफ सीजन में बढ़ सकती है दिक्कत
भारत में खरीफ सीजन के दौरान यूरिया की मांग काफी ज्यादा रहती है।
- हर साल लगभग 170–180 लाख टन यूरिया की खपत
- खेती का रकबा बढ़ने से मांग में और इजाफा संभव
ऐसे में उत्पादन प्रभावित होने से किसानों को समय पर खाद मिलने में परेशानी हो सकती है।
सरकार का क्या कहना है?
सरकार के अनुसार, देश में फिलहाल पर्याप्त उर्वरक भंडार मौजूद है:
- यूरिया: 53.08 लाख मीट्रिक टन
- डीएपी: 21.80 लाख मीट्रिक टन
- एनपीके और एमओपी भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध
लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर सप्लाई और उत्पादन पर दबाव जारी रहा, तो खरीफ के पीक समय में कमी महसूस हो सकती है।
आयात पर निर्भरता बनी चुनौती
भारत उर्वरकों और उनके कच्चे माल के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है।
पश्चिम एशिया में संकट के कारण:
- आयात प्रभावित हो रहा है
- कच्चे माल की कमी से घरेलू उत्पादन पर असर
किसानों पर क्या असर पड़ेगा?
- खाद के लिए लंबी कतारें लग सकती हैं
- समय पर यूरिया नहीं मिलने से बुवाई प्रभावित हो सकती है
- फसल उत्पादन और आय पर असर पड़ने की संभावना
पश्चिम एशिया का यह संकट भारत के किसानों के लिए नई चुनौती बन सकता है। ऐसे में सरकार और संबंधित एजेंसियों के लिए जरूरी होगा कि समय रहते सप्लाई को संतुलित रखें, ताकि खरीफ सीजन में किसानों को खाद की कमी का सामना न करना पड़े।

