डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (पूसा) के वैज्ञानिकों ने पशुपालन क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल की है। पहली बार IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) तकनीक के जरिए साहीवाल नस्ल की 4 बछियाओं का सफल जन्म कराया गया है। इस उपलब्धि को देशी नस्ल सुधार और डेयरी सेक्टर के लिए अहम कदम माना जा रहा है।
क्या है खास?
- IVF तकनीक से उच्च गुणवत्ता वाली देशी नस्ल तैयार
- कुल 4 बछियाओं का सफल जन्म
- कम समय में बेहतर नस्ल के पशु तैयार करने में मदद
कहां हुआ जन्म?
- 3 बछियाएं पिपराकोठी स्थित देशी नस्ल संवर्धन केंद्र में
- 1 बछिया मोतिहारी (चकिया गौशाला) में जन्मी
किसानों को क्या होगा फायदा?
- बेहतर नस्ल के पशु जल्दी मिलेंगे
- दूध उत्पादन में बढ़ोतरी होगी
- पशुपालन से आय बढ़ेगी
वैज्ञानिकों का क्या कहना है?
विशेषज्ञों के अनुसार, IVF तकनीक में सामान्य गाय को “सरोगेट मदर” बनाकर उच्च नस्ल के बछड़े-बछिया तैयार किए जा सकते हैं। इससे नस्ल सुधार की प्रक्रिया काफी तेज हो जाती है।
देशी नस्ल क्यों बेहतर?
- भारतीय जलवायु के अनुसार ज्यादा अनुकूल
- बीमारियों का खतरा कम
- A2 दूध, जो पाचन और स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता है
आगे की योजना
विश्वविद्यालय अब इस तकनीक को किसानों तक पहुंचाने की तैयारी कर रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा पशुपालक इसका लाभ उठा सकें।
निष्कर्ष
IVF तकनीक के जरिए साहीवाल नस्ल का यह सफल प्रयोग देश में डेयरी क्षेत्र को नई दिशा दे सकता है। इससे न केवल नस्ल सुधार तेजी से होगा, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

