भारत की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) यात्रा को नई गति देते हुए इंडिया एआई मिशन के सहयोग से विकसित स्वदेशी वीडियो स्टोरी जनरेटिंग एआई मॉडल ‘वार्या’ (Varya) को लॉन्च कर दिया गया है। एआई-नेटिव ट्रांसफॉर्मेशन कंपनी अवतार (AVTAAR.AI) द्वारा विकसित यह मॉडल किफायती, तेज और सांस्कृतिक रूप से भारत-केंद्रित वीडियो निर्माण समाधान प्रदान करने का दावा करता है। कंपनी के अनुसार, ‘वार्या’ वीडियो निर्माण की जटिल प्रक्रिया को बेहद सरल बनाते हुए 50 चरणों से घटाकर केवल 4 चरणों में पूरा कर सकता है, जिससे यह मौजूदा वैश्विक वीडियो एआई मॉडलों की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक लागत-कुशल साबित होता है।
नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस अत्याधुनिक एआई मॉडल का औपचारिक अनावरण किया गया। कार्यक्रम में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन, अवतार की नेतृत्व टीम और तकनीकी विशेषज्ञ मौजूद रहे। इस लॉन्च को भारत की स्वदेशी एआई क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
भारत की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया मॉडल
अवतार के अनुसार ‘वार्या’ को विशेष रूप से भारतीय उपयोगकर्ताओं और भारत की विविध सामाजिक-सांस्कृतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। यह मॉडल केवल सामान्य वीडियो निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के विभिन्न क्षेत्रों, भाषाओं, त्योहारों, खान-पान, परिधानों, समुदायों और जीवनशैली से जुड़े संदर्भों को समझने और उनके अनुरूप दृश्य सामग्री तैयार करने की क्षमता रखता है।
कंपनी का कहना है कि ‘वार्या’ भारत की वास्तविक सांस्कृतिक विविधता को प्रतिबिंबित करने में सक्षम है। उदाहरण के लिए, यदि कोई शिक्षक ग्रामीण विद्यालय के लिए शैक्षणिक वीडियो बनाना चाहता है, कोई एमएसएमई अपने उत्पाद का विज्ञापन तैयार करना चाहता है या कोई सरकारी संस्था जन-जागरूकता अभियान चलाना चाहती है, तो ‘वार्या’ कुछ ही मिनटों में उच्च गुणवत्ता वाली वीडियो सामग्री तैयार कर सकता है।
वीडियो निर्माण को बनाया बेहद आसान
‘वार्या’ का सबसे बड़ा आकर्षण इसकी सरल कार्यप्रणाली है। कंपनी ने इसे “Idea → Video → Story” यानी “विचार से वीडियो और वीडियो से कहानी” की अवधारणा पर विकसित किया है।
उपयोगकर्ता केवल अपना विचार टेक्स्ट के रूप में लिख सकता है या कोई तस्वीर अपलोड कर सकता है। इसके बाद एआई उस इनपुट को वीडियो में बदल देता है। आवश्यकता पड़ने पर उपयोगकर्ता अतिरिक्त क्लिप जोड़कर वीडियो को आगे बढ़ा सकता है और पूरी कहानी तैयार कर सकता है।
इस तकनीक के जरिए एक साधारण टेक्स्ट प्रॉम्प्ट को विज्ञापन, शैक्षणिक सामग्री, प्रशिक्षण वीडियो, सार्वजनिक सूचना संदेश, शॉर्ट फिल्म या सोशल मीडिया कंटेंट में बदला जा सकता है। इससे वीडियो निर्माण के लिए महंगे सॉफ्टवेयर, तकनीकी विशेषज्ञता और लंबी एडिटिंग प्रक्रिया की जरूरत काफी हद तक कम हो जाती है।
50 चरणों से घटकर सिर्फ 4 चरणों में वीडियो निर्माण
कंपनी के अनुसार ‘वार्या’ की सबसे बड़ी तकनीकी उपलब्धि इसकी डिस्टिल्ड वीडियो जनरेशन तकनीक है। पारंपरिक वीडियो एआई मॉडल आमतौर पर वीडियो तैयार करने के लिए 50 या उससे अधिक कम्प्यूटेशनल चरणों का उपयोग करते हैं। इससे समय और संसाधनों की खपत बढ़ जाती है।
हालांकि ‘वार्या’ इस प्रक्रिया को केवल 4 चरणों में पूरा करता है। इसके बावजूद आउटपुट की गुणवत्ता लगभग समान बनी रहती है। यही कारण है कि यह मॉडल तेज गति से वीडियो तैयार करने के साथ-साथ कम लागत में बेहतर परिणाम देने में सक्षम है।
अवतार द्वारा साझा किए गए आंतरिक बेंचमार्क के अनुसार ‘वार्या’ लगभग 0.48 रुपये प्रति सेकंड की लागत पर वीडियो तैयार कर सकता है। कंपनी का दावा है कि यह कई वैश्विक वीडियो एआई मॉडलों की तुलना में लगभग दस गुना अधिक लागत-कुशल है।
इंडिया एआई मिशन का बड़ा योगदान
‘वार्या’ का विकास इंडिया एआई मिशन के सहयोग से संभव हो पाया है। अवतार उन चुनिंदा भारतीय कंपनियों में शामिल थी जिन्हें स्वदेशी फाउंडेशनल एआई क्षमताओं के निर्माण के लिए इंडिया एआई मिशन द्वारा समर्थन दिया गया था।
राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध कराई गई रियायती एआई कंप्यूटिंग अवसंरचना ने कंपनी को बड़े पैमाने पर अनुसंधान और मॉडल प्रशिक्षण में मदद की। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उदाहरण दर्शाता है कि सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए एआई संसाधन भारतीय स्टार्टअप्स और डीप-टेक कंपनियों के लिए किस प्रकार नवाचार का आधार बन सकते हैं।
भारत की एआई महत्वाकांक्षा का प्रतीक
लॉन्च कार्यक्रम में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि ‘वार्या’ का लॉन्च भारत की एआई यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि इंडिया एआई मिशन का उद्देश्य केवल तकनीक विकसित करना नहीं, बल्कि देश में मजबूत एआई इकोसिस्टम तैयार करना है।
उन्होंने कहा कि ‘वार्या’ अनुसंधान-आधारित नवाचार और स्वदेशी तकनीकी क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह दिखाता है कि भारतीय कंपनियां वैश्विक स्तर की तकनीक विकसित करने में सक्षम हैं। सरकार का लक्ष्य ऐसे और अधिक फाउंडेशनल मॉडल विकसित करना है जो देश की आवश्यकताओं के अनुरूप हों और बड़े पैमाने पर उपयोग किए जा सकें।
एआई को सभी के लिए सुलभ बनाने पर जोर
अवतार के सीईओ और सह-संस्थापक श्रावंत अलुरु ने कहा कि भारत जैसे देश में एआई की सफलता केवल सबसे बड़े मॉडल बनाने से नहीं, बल्कि सबसे अधिक कुशल और किफायती मॉडल विकसित करने से तय होगी।
उन्होंने कहा कि 1.4 अरब लोगों वाले देश में एआई तकनीक तभी प्रभावी होगी जब वह आम नागरिकों, छोटे व्यवसायों, शिक्षकों, छात्रों और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच सके। ‘वार्या’ इसी सोच का परिणाम है।
उनके अनुसार आने वाले समय में करोड़ों कहानियां, विज्ञापन, शैक्षणिक सामग्री, सेवाएं और डिजिटल अनुभव एआई की मदद से तैयार किए जाएंगे। इसलिए जरूरी है कि यह तकनीक केवल कुछ कंपनियों तक सीमित न रहकर सभी के लिए उपलब्ध हो।
शिक्षा, ई-कॉमर्स और डिजिटल सेवाओं में होगा उपयोग
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘वार्या’ का उपयोग कई क्षेत्रों में किया जा सकता है। शिक्षा क्षेत्र में शिक्षक और संस्थान कम लागत में वीडियो आधारित पाठ्य सामग्री तैयार कर सकेंगे। ई-कॉमर्स कंपनियां अपने उत्पादों के लिए आकर्षक विज्ञापन वीडियो बना सकेंगी। सरकारी विभाग नागरिकों के लिए जन-जागरूकता सामग्री तैयार कर सकेंगे।
इसके अलावा मीडिया, मनोरंजन, डिजिटल मार्केटिंग, प्रशिक्षण, स्वास्थ्य और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में भी इस तकनीक का व्यापक उपयोग संभव है। भारत जैसे बहुभाषी और विविधतापूर्ण देश में यह तकनीक स्थानीय जरूरतों के अनुरूप वीडियो सामग्री तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
क्या है डिस्टिल्ड वीडियो जनरेशन तकनीक?
‘वार्या’ की सफलता के पीछे डिस्टिल्ड वीडियो जनरेशन तकनीक काम करती है। मशीन लर्निंग की इस प्रक्रिया में एक छोटा और तेज “स्टूडेंट मॉडल” एक बड़े और जटिल “टीचर मॉडल” से सीखता है। इससे अनावश्यक गणनाएं कम हो जाती हैं और मॉडल कम संसाधनों में लगभग समान गुणवत्ता का परिणाम देने लगता है।
वीडियो एआई के क्षेत्र में भारत में पहली बार इस तकनीक का बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया है। यही वजह है कि ‘वार्या’ तेज, किफायती और व्यापक उपयोग के लिए उपयुक्त माना जा रहा है।
भारत में एआई को जनसामान्य तक पहुंचाने की दिशा में ‘वार्या’ का लॉन्च एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह न केवल देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा, बल्कि भारतीय कंपनियों को वैश्विक एआई प्रतिस्पर्धा में नई पहचान भी दिला सकता है।

