आगामी 21 जून को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने भारतीय परंपरा, स्वास्थ्य और आधुनिक जीवनशैली को एक सूत्र में पिरोते हुए ‘स्वधा’ नामक विशेष वेलनेस वियर कलेक्शन लॉन्च किया है। यह अनूठा संग्रह योग, स्वास्थ्य, आराम और सस्टेनेबल फैशन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। खादी उत्कृष्टता केंद्र (सीओईके) द्वारा विकसित इस कलेक्शन का लोकार्पण केवीआईसी के चेयरमैन मनोज गोयल ने नई दिल्ली के हौज खास स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (एनआईएफटी) परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान किया।
यह कलेक्शन ऐसे समय में लॉन्च किया गया है जब दुनिया भर में योग और प्राकृतिक जीवनशैली के प्रति लोगों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। भारत की दो महान विरासतों—योग और खादी—को एक मंच पर लाने वाला यह संग्रह न केवल भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा को प्रदर्शित करता है, बल्कि आधुनिक उपभोक्ताओं की जरूरतों को भी ध्यान में रखता है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केवीआईसी के चेयरमैन श्री मनोज गोयल ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस आज एक वैश्विक आंदोलन बन चुका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव पर वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता दी थी। तब से हर वर्ष दुनिया के सैकड़ों देशों में योग दिवस मनाया जाता है और करोड़ों लोग योग को अपने जीवन का हिस्सा बना रहे हैं।
उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने की एक प्राचीन भारतीय पद्धति है। योग व्यक्ति को मानसिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक संतुलन प्रदान करता है। इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए ‘स्वधा’ वेलनेस वियर कलेक्शन तैयार किया गया है, ताकि लोग योग और स्वस्थ जीवनशैली को और अधिक सहजता से अपना सकें।
श्री गोयल ने कहा कि योग और खादी दोनों ही भारतीय जीवन दर्शन के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। जहां योग व्यक्ति के भीतर संतुलन और स्वास्थ्य का संचार करता है, वहीं खादी आत्मनिर्भरता, स्वदेशी भावना, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ‘स्वधा’ कलेक्शन इन दोनों विचारधाराओं का सुंदर संगम है, जो आधुनिक भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक ताकत को दर्शाता है।
उन्होंने बताया कि ‘स्वधा’ शब्द अथर्ववेद से प्रेरित है। इसका अर्थ है सहजता, आराम, आत्मिक संतुष्टि और प्राकृतिक संतुलन। इसी दर्शन को ध्यान में रखते हुए इस कलेक्शन को डिजाइन किया गया है। इसके सभी परिधान सादगी, उपयोगिता, आराम और बहुउद्देशीय उपयोग को प्राथमिकता देते हैं। यह संग्रह न केवल योगाभ्यास के लिए उपयुक्त है, बल्कि दैनिक जीवन में भी आसानी से पहना जा सकता है।
‘स्वधा’ वेलनेस वियर कलेक्शन में कुल नौ प्रकार के परिधान शामिल किए गए हैं। इन कपड़ों को विशेष रूप से इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि पहनने वाले को अधिकतम आराम और गतिशीलता मिल सके। योग करते समय शरीर की गतिविधियों में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए इनके पैटर्न और डिजाइन पर विशेष ध्यान दिया गया है। अधिकांश परिधान फ्री-साइज और जेंडर-न्यूट्रल हैं, जिससे वे पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए समान रूप से उपयोगी हैं।
इस संग्रह में इस्तेमाल किए गए खादी फैब्रिक की गुणवत्ता इसकी सबसे बड़ी विशेषता है। खादी प्राकृतिक रूप से सांस लेने योग्य (ब्रीदेबल), हल्की, मुलायम और त्वचा के अनुकूल होती है। यह गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडक और सर्दियों में हल्की गर्माहट प्रदान करती है। यही कारण है कि विशेषज्ञ खादी को वेलनेस और योग परिधानों के लिए आदर्श कपड़ा मानते हैं। प्राकृतिक रेशों से तैयार होने के कारण यह पर्यावरण के लिए भी अनुकूल है और सतत विकास के सिद्धांतों को मजबूत करती है।
‘स्वधा’ कलेक्शन में उपयोग की गई खादी देश की तीन प्रतिष्ठित खादी संस्थाओं से प्राप्त की गई है। इनमें तमिलनाडु की गांधीग्राम खादी एंड वी.आई. पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट, केरल की पय्यानूर फिरका ग्रामोदय खादी संघ तथा पंजाब की क्षेत्रीय पंजाब खादी मंडल शामिल हैं। इन संस्थानों से जुड़े कारीगरों और बुनकरों की मेहनत तथा पारंपरिक कौशल ने इस संग्रह को विशिष्ट पहचान प्रदान की है।
कार्यक्रम के दौरान श्री गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ अभियानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन पहलों ने खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र को नई ऊर्जा और नई पहचान दी है। आज खादी केवल ग्रामीण भारत का उत्पाद नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एक मजबूत ब्रांड के रूप में स्थापित हो रही है।
उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र ने 1.87 लाख करोड़ रुपये की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की है। यह अब तक का सबसे बड़ा कारोबार है, जिसने इस क्षेत्र के इतिहास में नया अध्याय जोड़ा है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देशभर के लाखों कारीगरों, बुनकरों, स्वयं सहायता समूहों, ग्रामीण उद्यमियों और खादी संस्थानों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।
श्री गोयल ने आगे बताया कि इस क्षेत्र ने अब 2.51 लाख करोड़ रुपये के टर्नओवर का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। उनका मानना है कि यदि वर्तमान गति बनी रही तो आने वाले वर्षों में यह लक्ष्य भी हासिल कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र न केवल आर्थिक विकास में योगदान दे रहा है, बल्कि रोजगार सृजन और ग्रामीण आत्मनिर्भरता को भी मजबूती प्रदान कर रहा है।
उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान समय में खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र देशभर में लगभग 2.04 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध करा रहा है। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं, ग्रामीण युवा और पारंपरिक कारीगर शामिल हैं। इस प्रकार यह क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक समावेशन को भी बढ़ावा दे रहा है।
गौरतलब है कि खादी उत्कृष्टता केंद्र (सीओईके) की स्थापना वर्ष 2021 में खादी और ग्रामोद्योग आयोग तथा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (एनआईएफटी) के संयुक्त सहयोग से की गई थी। इस केंद्र का उद्देश्य खादी को आधुनिक फैशन, डिजाइन नवाचार, ब्रांड विकास और बाजार की बदलती मांगों के अनुरूप विकसित करना है। केंद्र लगातार ऐसे उत्पाद विकसित कर रहा है जो युवा पीढ़ी और वैश्विक उपभोक्ताओं को आकर्षित कर सकें।
‘स्वधा’ वेलनेस वियर कलेक्शन इसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह संग्रह स्वास्थ्य, योग, भारतीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और सतत जीवनशैली के मूल्यों को एक साथ प्रस्तुत करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के नवाचार खादी को नई पहचान देने के साथ-साथ युवाओं के बीच इसकी लोकप्रियता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
कार्यक्रम में केवीआईसी, सीओईके और एनआईएफटी के वरिष्ठ अधिकारी, डिजाइन विशेषज्ञ, कर्मचारी और अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। सभी ने ‘स्वधा’ कलेक्शन की सराहना करते हुए इसे भारतीय परंपरा और आधुनिक फैशन के सफल समन्वय का उदाहरण बताया। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से पहले लॉन्च किया गया यह विशेष संग्रह न केवल योग प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा, बल्कि खादी को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।

