इंडिया फार्मा 2026 का 9वां संस्करण दो दिवसीय विचार-विमर्श के बाद सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषधि विभाग द्वारा एफआईसीआई और भारतीय फार्मास्युटिकल एलायंस के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य भारत के फार्मास्युटिकल और बायोफार्मा क्षेत्र को नई दिशा देना रहा।
कार्यक्रम के दूसरे दिन चर्चाएं मुख्य रूप से रणनीतिक निवेश, मजबूत वित्तपोषण प्रणाली और भविष्योन्मुखी नवाचार पर केंद्रित रहीं। उद्योग, वित्त, शिक्षा और नीति क्षेत्र के विशेषज्ञों ने मिलकर इस बात पर जोर दिया कि भारत को फार्मा क्षेत्र में अगली छलांग के लिए बेहतर फंडिंग, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और तेज निर्णय प्रक्रिया की जरूरत है।
सम्मेलन में दोनों दिनों में 800 से अधिक प्रतिनिधियों और 60 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं ने 10 सत्रों में भाग लिया। इन सत्रों में फार्मास्युटिकल नवाचार को आगे बढ़ाने के लिए निवेश और तकनीक के तालमेल पर विशेष चर्चा हुई।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए औषधि विभाग के संयुक्त सचिव सत्यप्रकाश टीएल ने कहा कि भविष्य के विकास के लिए तीन प्रमुख स्तंभ—वित्तपोषण, अवसंरचना और गति—अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि भारत वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति और मजबूत कर सके।
“एक जीवंत फार्मा वित्तपोषण पारिस्थितिकी तंत्र का विकास” विषय पर आयोजित सत्र में विशेषज्ञों ने कहा कि फार्मा नवाचार के लिए समय पर और रणनीतिक निवेश बेहद जरूरी है। डॉ. शिवकुमार कल्याणरमन ने बताया कि देश में अनुसंधान वित्तपोषण का ढांचा तेजी से विकसित हो रहा है, जिसमें अनुदान और निजी निवेश दोनों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इसके अलावा वेंचर कैपिटल, प्राइवेट इक्विटी, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप जैसे विकल्पों पर भी चर्चा हुई, जो फार्मा कंपनियों के लिए नए अवसर खोल रहे हैं। विशेषज्ञों ने यह भी माना कि लंबे रिसर्च चक्र, उच्च जोखिम और नियामकीय चुनौतियां इस क्षेत्र के सामने बड़ी बाधाएं हैं, जिन्हें दूर करने के लिए नवाचार-आधारित वित्तपोषण मॉडल जरूरी हैं।
उद्योग जगत के प्रमुख नेताओं ने भी भविष्य की रणनीति पर अपने विचार रखे। दिलीप संघवी ने कहा कि फार्मा नवाचार में जोखिम अधिक होता है, इसलिए जोखिम साझा करने की व्यवस्था और निरंतर निवेश जरूरी है। वहीं पंकज पटेल ने नई दवाओं के विकास के लिए मजबूत वित्तीय समर्थन और बेहतर बाजार पहुंच की जरूरत बताई।
विशेषज्ञों ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत ने जेनेरिक दवाओं और टीकों के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बनाई है, लेकिन अब अगला कदम नवीन दवाओं और अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीकों में नेतृत्व स्थापित करना है।
‘इंडिया फार्मा 2026’ के निष्कर्ष के रूप में यह स्पष्ट हुआ कि भारत को फार्मास्युटिकल क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने के लिए साहसिक निवेश, मजबूत सहयोग और नवाचार-आधारित विकास मॉडल अपनाना होगा।

