महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तहत संचालित मिशन पोषण 2.0 के माध्यम से भारत की पोषण व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है। यह मिशन समन्वय, तकनीक और सामुदायिक सहभागिता के जरिए कुपोषण की चुनौती से निपटने का एक व्यापक प्रयास बनकर उभरा है।
वर्ष 2018 में शुरू हुए पोषण अभियान ने पोषण को एक कल्याणकारी विषय से आगे बढ़ाकर मानव पूंजी विकास और राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में स्थापित किया है। अब मिशन पोषण 2.0 के तहत आंगनवाड़ी सेवाओं, किशोरी योजनाओं और पोषण अभियान को एकीकृत कर समग्र पोषण ढांचा तैयार किया गया है।
डिजिटल क्रांति के तहत ‘पोषण ट्रैकर’ जैसे प्लेटफॉर्म ने निगरानी प्रणाली को सशक्त बनाया है। वर्तमान में देशभर के 14 लाख से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों और लगभग 9 करोड़ लाभार्थियों की लगभग रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है, जिससे सेवाओं की पारदर्शिता और प्रभावशीलता में सुधार हुआ है।
मिशन के तहत बच्चों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं तथा किशोरियों को पूरक पोषण उपलब्ध कराया जा रहा है। संशोधित पोषण मानकों के अनुसार अब आहार में प्रोटीन, विटामिन और सूक्ष्म पोषक तत्वों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही आंगनवाड़ी केंद्रों और ग्राम स्तर पर पोषण वाटिकाओं की स्थापना से स्थानीय स्तर पर पौष्टिक आहार की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE) को भी मिशन का अहम हिस्सा बनाया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए खेल-आधारित और सहभागितापूर्ण शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है। ‘नवचेतना’ और ‘आधारशिला’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों के समग्र विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है।
तकनीकी नवाचारों के साथ ही पोषण ट्रैकर में फेसियल रिकग्निशन और आधार आधारित सत्यापन जैसी सुविधाओं से लाभार्थियों की सही पहचान और सेवाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित की जा रही है। इसके अलावा, नई हेल्पलाइन (1515) के जरिए शिकायत निवारण प्रणाली को भी मजबूत किया गया है।
मिशन पोषण 2.0 का एक प्रमुख पहलू इसे जन आंदोलन के रूप में विकसित करना है। ‘पोषण माह’ और ‘पोषण पखवाड़ा’ जैसे अभियानों के माध्यम से देशभर में व्यापक जनजागरूकता फैलाई जा रही है। अप्रैल 2026 में आयोजित पोषण पखवाड़ा का मुख्य विषय “जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क विकास को अधिकतम करना” रखा गया है, जो बच्चों के शुरुआती विकास पर विशेष जोर देता है।
सरकार का मानना है कि पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छता को एक साथ जोड़कर ही कुपोषण की समस्या का स्थायी समाधान संभव है। मिशन पोषण 2.0 इसी समग्र दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ते हुए भारत को एक स्वस्थ, सशक्त और विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

