महाराष्ट्र के नासिक जिले में प्याज की थोक कीमतों में आई भारी गिरावट ने किसानों को गहरे संकट में डाल दिया है। देश के सबसे बड़े प्याज उत्पादक क्षेत्रों में से एक इस इलाके में हजारों किसान अपनी उपज को लागत से भी कम कीमत पर बेचने को मजबूर हैं। हालात इतने खराब हैं कि कई किसान अपनी फसल को मंडियों तक ले जाने से भी बच रहे हैं, जबकि कुछ बेहतर दाम की उम्मीद में स्टॉक रोककर बैठे हैं।
नासिक जिले में पांच लाख से अधिक किसान इस गिरावट से प्रभावित हुए हैं। जिले की 17 प्रमुख APMC मंडियों में प्याज के दाम लगातार नीचे जा रहे हैं। एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी, लासलगांव में इस समय थोक कीमतें 800 से 1,000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रही हैं। यह कीमतें किसानों की उत्पादन लागत से काफी कम हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
येओला तहसील के पटोदा गांव के किसान सचिन कुंभार्कर की कहानी इस संकट की गंभीरता को बयां करती है। उन्होंने 11 एकड़ जमीन पर रबी प्याज की खेती के लिए करीब 2 लाख रुपये का कर्ज लिया था। उम्मीद थी कि अच्छी कीमत मिलने पर वह न सिर्फ कर्ज चुका देंगे, बल्कि मुनाफा भी कमा सकेंगे। लेकिन मौजूदा हालात ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। उन्होंने हाल ही में 30 क्विंटल प्याज 900 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बेची, जबकि उनकी लागत 1,700 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा थी। ऐसे में उन्हें सीधा नुकसान झेलना पड़ा है।
सचिन बताते हैं कि अगर यही स्थिति बनी रही तो कर्ज चुकाना मुश्किल हो जाएगा। पहले से ही उन पर 50,000 रुपये का पुराना कर्ज है, जो अब और बोझ बनता जा रहा है। यह केवल एक किसान की कहानी नहीं है, बल्कि पूरे जिले में लगभग हर किसान इसी तरह की मुश्किलों से जूझ रहा है।
निफाड़ तहसील के मारलगोई गांव के किसान संदीप फपाले ने अपनी फसल तो तैयार कर ली है, लेकिन वह उसे मंडी तक ले जाने से हिचक रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा कीमतों पर बेचने का मतलब सीधा घाटा है। ऐसे में वे इंतजार कर रहे हैं कि शायद बाजार में सुधार आए और उन्हें बेहतर दाम मिल सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में प्याज की अधिक आपूर्ति और मांग में कमी के कारण कीमतों में यह गिरावट आई है। इसके अलावा निर्यात में कमी और भंडारण की सीमित सुविधाएं भी इस समस्या को बढ़ा रही हैं।
किसानों की मांग है कि सरकार इस संकट में हस्तक्षेप करे और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) या अन्य राहत उपाय लागू करे, ताकि उन्हें नुकसान से बचाया जा सके। अगर जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो यह संकट और गहरा सकता है और किसानों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर डाल सकता है।

