कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा देशभर में संचालित ‘खेत बचाओ अभियान’ किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने और कृषि भूमि की उत्पादकता बनाए रखने के उद्देश्य से शुरू किया गया यह अभियान अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। 4 जून 2026 तक इस अभियान के माध्यम से देशभर के 9.42 लाख से अधिक किसानों को जागरूकता कार्यक्रमों, प्रशिक्षण सत्रों और व्यवहारिक प्रदर्शनों से जोड़ा जा चुका है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ते रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग के कारण मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। ऐसे में ‘खेत बचाओ अभियान’ किसानों को वैज्ञानिक खेती और संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन की दिशा में प्रेरित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।
17 हजार से अधिक जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन
अभियान के तहत अब तक देशभर में 17,834 जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा चुका है। इन कार्यक्रमों में लगभग 6.98 लाख किसानों ने भाग लेकर मृदा स्वास्थ्य, संतुलित उर्वरक उपयोग और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के बारे में जानकारी प्राप्त की।
इन कार्यक्रमों में किसानों को बताया गया कि केवल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर रहने से मिट्टी की उर्वरता धीरे-धीरे कम होती जाती है। विशेषज्ञों ने किसानों को मृदा परीक्षण आधारित खेती अपनाने, जैविक पोषक तत्वों का उपयोग बढ़ाने और फसल की आवश्यकता के अनुसार उर्वरकों का संतुलित प्रयोग करने की सलाह दी।
कृषि वैज्ञानिकों ने यह भी समझाया कि स्वस्थ मिट्टी ही अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता वाली फसल का आधार है। यदि मृदा स्वास्थ्य को सुरक्षित रखा जाए तो खेती की लागत कम होने के साथ-साथ किसानों की आय में भी वृद्धि संभव है।
प्रशिक्षण कार्यक्रमों से किसानों को मिल रही वैज्ञानिक जानकारी
अभियान के अंतर्गत किसानों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए 3,698 प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन प्रशिक्षणों में 1,57,438 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
प्रशिक्षण कार्यक्रमों के दौरान किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन, मृदा परीक्षण तकनीक, जैविक खेती, सूक्ष्म पोषक तत्वों के महत्व तथा पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने किसानों को यह भी बताया कि फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए केवल अधिक मात्रा में उर्वरक डालना समाधान नहीं है। सही समय, सही मात्रा और सही प्रकार के पोषक तत्वों का उपयोग ही टिकाऊ खेती की कुंजी है।
8,850 प्रदर्शनों के जरिए व्यवहारिक प्रशिक्षण
किसानों को केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित न रखते हुए अभियान के तहत 8,850 डेमोंस्ट्रेशन (प्रदर्शन) आयोजित किए गए। इन प्रदर्शनों में किसानों को खेत स्तर पर वैज्ञानिक तकनीकों का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से जैविक उर्वरकों, हरी खाद, कंपोस्ट, वर्मी-कंपोस्ट, फसल अवशेष प्रबंधन तथा वैकल्पिक पोषक स्रोतों के उपयोग की तकनीकों को प्रदर्शित किया गया। इसके अलावा समेकित पोषक तत्व प्रबंधन प्रणाली के लाभों को भी किसानों के सामने प्रस्तुत किया गया।
इन प्रदर्शनों का उद्देश्य किसानों को यह दिखाना था कि संतुलित उर्वरक उपयोग और जैविक विकल्पों को अपनाकर खेती की लागत कम की जा सकती है तथा मिट्टी की गुणवत्ता को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
पंचायत स्तर तक पहुंचा अभियान
‘खेत बचाओ अभियान’ की सबसे बड़ी विशेषता इसकी व्यापक जनभागीदारी है। अभियान के तहत 5,237 पंच, सरपंच और जिला परिषद सदस्यों को भी जोड़ा गया है।
गांव स्तर पर जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से अभियान की पहुंच और प्रभाव दोनों बढ़े हैं। पंचायत प्रतिनिधि किसानों को जागरूक करने, प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भागीदारी बढ़ाने और कृषि विभाग की योजनाओं को गांव तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब स्थानीय नेतृत्व किसी अभियान से जुड़ता है, तो उसका प्रभाव अधिक व्यापक और स्थायी होता है।
उर्वरक डीलरों और किसान संगठनों की भी अहम भूमिका
कृषि मंत्रालय ने अभियान के तहत उर्वरक विक्रेताओं और इनपुट डीलरों को भी सक्रिय रूप से जोड़ा है। अब तक 9,609 इनपुट डीलरों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।
इन कार्यक्रमों का उद्देश्य किसानों तक सही जानकारी पहुंचाना और उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना है। उर्वरक डीलर किसानों के साथ सीधे संपर्क में रहते हैं, इसलिए उनकी भूमिका जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इसके अलावा किसान उत्पादक संगठन (FPO), स्वयं सहायता समूह (SHG) और किसान हित समूह (FIG) भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बने हैं। इन संगठनों के माध्यम से 8,383 किसानों तक वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन की जानकारी पहुंचाई गई है।
जनसंपर्क और डिजिटल माध्यमों से बढ़ी पहुंच
अभियान को व्यापक स्तर पर प्रचारित करने के लिए देशभर में 60,477 स्थानों पर बैनर, पोस्टर और होर्डिंग्स लगाए गए हैं।
इसके साथ ही 1,027 रेडियो और सामुदायिक रेडियो कार्यक्रमों तथा 240 टीवी और डिजिटल मीडिया कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों और आम जनता को अभियान के उद्देश्यों से अवगत कराया गया है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग से अभियान की पहुंच में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विभिन्न सोशल मीडिया माध्यमों के जरिए अब तक लगभग 3.50 करोड़ लोगों तक ‘खेत बचाओ अभियान’ का संदेश पहुंच चुका है।
टिकाऊ कृषि और स्वस्थ मिट्टी की दिशा में बड़ा कदम
अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग अपनाने के लिए प्रेरित करना, मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा देना और कृषि भूमि की दीर्घकालिक उत्पादकता को सुरक्षित रखना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वर्तमान समय में मिट्टी के स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में कृषि उत्पादन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए संतुलित उर्वरक उपयोग और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाना समय की आवश्यकता बन गया है।
‘खेत बचाओ अभियान’ इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है। लाखों किसानों की भागीदारी यह संकेत देती है कि देश का किसान अब केवल अधिक उत्पादन ही नहीं, बल्कि स्वस्थ मिट्टी, बेहतर पर्यावरण और टिकाऊ कृषि की दिशा में भी गंभीरता से आगे बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में यह अभियान भारतीय कृषि को अधिक उत्पादक, पर्यावरण-अनुकूल और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

