नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरते हुए LPG टैंकर ‘नंदा देवी’ गुजरात के वडीनार बंदरगाह पर पहुंच गया है। यह जहाज़ अपने साथ 47 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) लेकर आया है, जो देश की ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।
इससे एक दिन पहले ही ‘शिवालिक’ नाम का एक और LPG टैंकर गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचा था। ‘शिवालिक’ करीब 46 हजार मीट्रिक टन LPG लेकर आया था, जो लगभग 32.4 लाख घरेलू सिलेंडरों (14.2 किलोग्राम) के बराबर है। अधिकारियों के अनुसार, यह मात्रा भारत की कुल दैनिक LPG आयात जरूरत का एक बड़ा हिस्सा पूरा करने में सक्षम है।
दरअसल, होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के चलते इस क्षेत्र में जोखिम बढ़ गया है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही थी। ऐसे में ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ जैसे जहाज़ों का सुरक्षित भारत पहुंचना रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जहाज़रानी मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने पहले ही इन जहाज़ों के आगमन को लेकर जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ के क्रमशः 16 और 17 मार्च को भारत पहुंचने की उम्मीद है, जो अब सही साबित हुई है। सिन्हा ने यह भी कहा कि फ़ारसी खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में किसी भी अप्रिय घटना की कोई सूचना नहीं मिली है।
उन्होंने बताया कि फ़ारसी खाड़ी में भारतीय ध्वज वाले कुल 24 जहाज़ मौजूद थे, जिनमें से ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ सुरक्षित रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य पार कर भारत की ओर रवाना हुए और अब अपने गंतव्य तक पहुंच चुके हैं। यह स्थिति भारत के लिए राहत देने वाली है, क्योंकि इस समय वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सुरक्षित आपूर्ति भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करती है और घरेलू बाजार में LPG की उपलब्धता को स्थिर बनाए रखने में मदद करती है। खासतौर पर ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर, ‘नंदा देवी’ और ‘शिवालिक’ जैसे टैंकरों का सुरक्षित आगमन भारत के लिए न सिर्फ एक लॉजिस्टिक सफलता है, बल्कि यह देश की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती का भी संकेत देता है।

