नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड यानी NFL ने खरीफ सीजन के दौरान फर्टिलाइज़र बिक्री में नया रिकॉर्ड बनाया है। कंपनी के मुताबिक, खरीफ 2019 के अप्रैल से सितंबर के दौरान NFL ने कुल 27 लाख टन फर्टिलाइज़र की बिक्री की। यह पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में करीब 25 फीसदी अधिक है। कंपनी ने इसे अपने इतिहास की सबसे बड़ी खरीफ सीजन बिक्री बताया।
फर्टिलाइज़र की बिक्री में इस तेज बढ़ोतरी से देश में उर्वरकों की मजबूत मांग का संकेत मिलता है। खास तौर पर यूरिया और डाइ-अमोनियम फॉस्फेट यानी DAP की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। कंपनी ने कहा कि यह उपलब्धि ऐसे समय में हासिल हुई, जब उसकी विजयपुर इकाई में तकनीकी समस्याओं के कारण यूरिया उत्पादन भी प्रभावित हुआ था।
खरीफ सीजन में 27 लाख टन फर्टिलाइज़र की बिक्री
NFL के अनुसार, खरीफ 2019 के दौरान कंपनी ने करीब 27 लाख टन फर्टिलाइज़र की बिक्री की। पिछले वर्ष की समान अवधि में कंपनी की बिक्री इससे लगभग 25 फीसदी कम थी। इस लिहाज से एक साल में बिक्री में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई।
कंपनी ने बताया कि खरीफ सीजन में किसानों की ओर से अलग-अलग तरह के फर्टिलाइज़र की मांग मजबूत रही। यूरिया के साथ-साथ DAP, म्यूरेट ऑफ पोटाश यानी MoP, NPK और पानी में घुलनशील फर्टिलाइज़र की बिक्री भी महत्वपूर्ण रही।
कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मनोज मिश्रा ने बिक्री के आंकड़ों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि NFL ने खरीफ सीजन के दौरान सभी प्रमुख फर्टिलाइज़र की बड़ी मात्रा में बिक्री की। उनके मुताबिक, कंपनी ने किसानों की जरूरत के अनुसार फर्टिलाइज़र उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया।
यूरिया की बिक्री में 20 फीसदी बढ़ोतरी
NFL की कुल फर्टिलाइज़र बिक्री में यूरिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी की यूरिया बिक्री में करीब 20 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
भारत में यूरिया सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला नाइट्रोजन फर्टिलाइज़र है। खरीफ फसलों जैसे धान, मक्का, कपास, गन्ना और कई अन्य फसलों में किसान नाइट्रोजन की जरूरत पूरी करने के लिए यूरिया का इस्तेमाल करते हैं।
यूरिया की बिक्री में 20 फीसदी की वृद्धि से यह संकेत मिलता है कि खरीफ सीजन में किसानों की नाइट्रोजन उर्वरक की मांग मजबूत रही। मानसून की शुरुआत और बुआई के बढ़ने के साथ फसलों में पोषक तत्वों की जरूरत बढ़ने पर यूरिया की मांग भी बढ़ती है।
DAP की बिक्री में 80 फीसदी उछाल
NFL की फर्टिलाइज़र बिक्री में सबसे बड़ी वृद्धि DAP में देखने को मिली। कंपनी के अनुसार, वित्त वर्ष की पहली तिमाही में DAP की बिक्री करीब 80 फीसदी बढ़ी।
DAP किसानों के बीच प्रमुख फॉस्फेटिक फर्टिलाइज़र है। इसमें नाइट्रोजन और फॉस्फोरस दोनों पोषक तत्व होते हैं। किसान इसे खास तौर पर फसल की शुरुआती बढ़वार और जड़ विकास के लिए इस्तेमाल करते हैं।
DAP की बिक्री में 80 फीसदी की वृद्धि बताती है कि खरीफ सीजन में किसानों की फॉस्फोरस आधारित उर्वरकों की मांग भी काफी मजबूत रही। बुआई के समय फसल को शुरुआती पोषण देने के लिए DAP की मांग सामान्य तौर पर बढ़ जाती है।
5.73 लाख टन फर्टिलाइज़र का आयात
मांग को पूरा करने के लिए NFL ने घरेलू उत्पादन के साथ आयात का भी सहारा लिया। कंपनी ने लगभग 5.73 लाख टन DAP, MoP, NPK फर्टिलाइज़र और पानी में घुलनशील फर्टिलाइज़र का आयात किया।
कंपनी ने स्पष्ट किया कि आयात किए गए इन फर्टिलाइज़र को घरेलू बाजार में किसानों की जरूरत पूरी करने के लिए बेचा जा रहा है। इससे पता चलता है कि कंपनी ने घरेलू उत्पादन के साथ आयात के जरिए भी बाजार में उर्वरकों की उपलब्धता बनाए रखने की कोशिश की।
भारत की कृषि अर्थव्यवस्था में फर्टिलाइज़र की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। खरीफ सीजन के दौरान यदि किसी प्रमुख उर्वरक की कमी होती है तो इसका असर किसानों की फसल लागत और उत्पादन पर पड़ सकता है। ऐसे में आयात के जरिए अतिरिक्त फर्टिलाइज़र उपलब्ध कराना सप्लाई को बनाए रखने में मदद करता है।
विजयपुर यूनिट में उत्पादन प्रभावित
NFL की रिकॉर्ड बिक्री की खास बात यह रही कि कंपनी को इस दौरान उत्पादन से जुड़ी चुनौती का भी सामना करना पड़ा। कंपनी ने बताया कि विजयपुर इकाई में तकनीकी समस्याओं के कारण जून-जुलाई 2019 के दौरान पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में यूरिया उत्पादन करीब 1.22 लाख टन कम रहा।
इसके बावजूद कंपनी ने बिक्री में रिकॉर्ड बनाया। इसका मतलब है कि NFL ने उपलब्ध घरेलू उत्पादन के साथ अपने स्टॉक और आयातित फर्टिलाइज़र का इस्तेमाल करके बाजार की मांग को पूरा करने की कोशिश की।
उत्पादन में कमी और बिक्री में बढ़ोतरी के बीच संतुलन बनाना फर्टिलाइज़र कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती होती है। खासकर खरीफ जैसे व्यस्त कृषि सीजन में किसी उत्पादन इकाई में तकनीकी समस्या आने से सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
मजबूत मांग ने बढ़ाई बिक्री
NFL की बिक्री के आंकड़े बताते हैं कि खरीफ सीजन में फर्टिलाइज़र की मांग मजबूत रही। अच्छी मानसूनी परिस्थितियों और खेती के क्षेत्र में गतिविधियों के बढ़ने से किसानों की उर्वरक जरूरत में तेजी आ सकती है।
खरीफ फसल का सीजन आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत के साथ शुरू होता है। जून के आसपास बुआई की गतिविधियां शुरू होती हैं और अगले कुछ महीनों में किसान फसल की बढ़वार के अनुसार अलग-अलग पोषक तत्वों वाले फर्टिलाइज़र का इस्तेमाल करते हैं।
धान, कपास, मक्का, सोयाबीन और अन्य खरीफ फसलों के लिए किसानों को नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्वों की जरूरत होती है। यही वजह है कि खरीफ सीजन में यूरिया, DAP, NPK और MoP की मांग में तेजी देखी जा सकती है।
खरीफ सीजन खत्म, अब कटाई पर नजर
NFL ने बताया कि खरीफ का गर्मी का मौसम समाप्त हो चुका है। खरीफ फसलों की कटाई की प्रक्रिया शुरू होने के बाद फसलें धीरे-धीरे बाजार में पहुंचती हैं।
खरीफ फसल का उत्पादन देश के कृषि बाजार के लिए महत्वपूर्ण है। अच्छी फसल से किसानों की आय, ग्रामीण मांग और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को समर्थन मिल सकता है। वहीं फसल उत्पादन अच्छा रहने पर अगले कृषि सीजन में फर्टिलाइज़र की मांग भी प्रभावित हो सकती है।
कंपनी की रिकॉर्ड बिक्री ऐसे समय में सामने आई जब खरीफ सीजन की कृषि गतिविधियां अपने चरम पर थीं। इससे फर्टिलाइज़र मार्केट में मजबूत मांग का संकेत मिला।
NFL के लिए रिकॉर्ड बिक्री क्यों महत्वपूर्ण?
NFL भारत की प्रमुख फर्टिलाइज़र कंपनियों में शामिल है। कंपनी का मुख्य कारोबार किसानों को जरूरी फर्टिलाइज़र उपलब्ध कराना है। ऐसे में 27 लाख टन की रिकॉर्ड बिक्री कंपनी के वितरण नेटवर्क और बाजार में उसकी मौजूदगी को दर्शाती है।
यूरिया के अलावा DAP, MoP, NPK और पानी में घुलनशील फर्टिलाइज़र की बिक्री बढ़ने से कंपनी के उत्पाद पोर्टफोलियो को भी फायदा हुआ। खास तौर पर DAP में 80 फीसदी की वृद्धि एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।
रिकॉर्ड बिक्री से कंपनी को किसानों के बीच अपनी पहुंच मजबूत करने में मदद मिल सकती है। साथ ही यह आंकड़ा देश में फर्टिलाइज़र की मांग और कृषि क्षेत्र की गतिविधियों को समझने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
आयात ने सप्लाई बनाए रखने में निभाई भूमिका
विजयपुर इकाई में यूरिया उत्पादन कम होने के बावजूद NFL ने आयात के माध्यम से सप्लाई को संतुलित किया। करीब 5.73 लाख टन DAP, MoP, NPK और पानी में घुलनशील फर्टिलाइज़र का आयात कंपनी की सप्लाई रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
फर्टिलाइज़र आयात भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश की कुल कृषि जरूरत को पूरा करने के लिए कुछ उर्वरकों और उनके कच्चे माल के मामले में भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर रहना पड़ता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में फर्टिलाइज़र की कीमत, उपलब्धता, शिपिंग लागत और मुद्रा विनिमय दर जैसे कारक आयात की लागत को प्रभावित करते हैं। इसलिए घरेलू उत्पादन और आयात के बीच संतुलन बनाए रखना फर्टिलाइज़र कंपनियों के लिए जरूरी है।
किसानों के लिए क्या मायने रखती है रिकॉर्ड बिक्री?
NFL की रिकॉर्ड फर्टिलाइज़र बिक्री किसानों की मजबूत मांग को दर्शाती है। हालांकि, किसानों के लिए केवल फर्टिलाइज़र की उपलब्धता ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उसकी कीमत, सही समय पर उपलब्धता और उचित मात्रा में इस्तेमाल भी जरूरी है।
यूरिया, DAP और NPK जैसे फर्टिलाइज़र का संतुलित इस्तेमाल मिट्टी में पोषक तत्वों की जरूरत पूरी करने में मदद करता है। कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार किसानों को मिट्टी परीक्षण और फसल की जरूरत के आधार पर उर्वरकों का इस्तेमाल करना चाहिए।
आगे फर्टिलाइज़र बाजार की दिशा
NFL की खरीफ 2019 की रिकॉर्ड बिक्री से उस समय देश में फर्टिलाइज़र की मजबूत मांग का संकेत मिला। यूरिया में 20 फीसदी और DAP में 80 फीसदी की बिक्री वृद्धि खास तौर पर उल्लेखनीय रही।
हालांकि, फर्टिलाइज़र बाजार की भविष्य की दिशा कई कारकों पर निर्भर करती है। इनमें मानसून, फसल क्षेत्र, किसानों की खरीद क्षमता, सरकारी नीतियां, उर्वरक सब्सिडी, अंतरराष्ट्रीय कीमतें और घरेलू उत्पादन शामिल हैं।
कुल मिलाकर, NFL ने खरीफ सीजन में 27 लाख टन फर्टिलाइज़र की रिकॉर्ड बिक्री कर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। उत्पादन में तकनीकी चुनौती के बावजूद कंपनी ने आयात और उपलब्ध स्टॉक के जरिए बाजार में सप्लाई बनाए रखी। यूरिया की 20 फीसदी और DAP की 80 फीसदी बिक्री वृद्धि बताती है कि उस खरीफ सीजन में किसानों की उर्वरक मांग काफी मजबूत थी। आने वाले समय में घरेलू उत्पादन बढ़ाने, आयात को संतुलित रखने और किसानों तक सही समय पर उचित मात्रा में फर्टिलाइज़र पहुंचाने की रणनीति कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

