यूरिया फ्यूचर्स की कीमतों में अप्रैल के शिखर से तेज गिरावट देखने को मिली है। मिडिल ईस्ट में सप्लाई बाधित होने की आशंका कम होने, चीन से निर्यात पर लगी पाबंदियों में ढील और वैश्विक मांग कमजोर पड़ने से यूरिया फ्यूचर्स लगभग 400 डॉलर प्रति टन के स्तर पर आ गया है। 15 अप्रैल को यूरिया फ्यूचर्स 700 डॉलर प्रति टन से ऊपर पहुंच गया था। इस लिहाज से अप्रैल के उच्चतम स्तर से कीमतों में 40 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है।
यूरिया फ्यूचर्स में गिरावट क्यों आई?
यूरिया फ्यूचर्स में हालिया गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण मिडिल ईस्ट में सप्लाई को लेकर बनी चिंता का कम होना है। होर्मुज स्ट्रेट के जरिए जहाजों की आवाजाही और शिपिंग को सामान्य बनाने के लिए बातचीत में प्रगति के संकेत मिले हैं। इससे बाजार में यह उम्मीद मजबूत हुई है कि फर्टिलाइज़र की अंतरराष्ट्रीय सप्लाई लंबे समय तक बाधित नहीं रहेगी।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। इस क्षेत्र में किसी भी लंबे व्यवधान से फर्टिलाइज़र, कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसलिए तनाव बढ़ने पर यूरिया फ्यूचर्स जैसी कमोडिटी में जोखिम प्रीमियम बढ़ जाता है। इसके उलट तनाव कम होने पर कीमतों पर दबाव आता है।
चीन से सप्लाई बढ़ने का असर
यूरिया फ्यूचर्स पर चीन के फैसले का भी महत्वपूर्ण असर पड़ा है। चीन ने यूरिया निर्यात पर लगी पाबंदियों में ढील देने का फैसला किया है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद बनी है।
चीन दुनिया के प्रमुख यूरिया उत्पादकों में शामिल है। ऐसे में चीन से अतिरिक्त यूरिया ग्लोबल मार्केट में आने की संभावना से सप्लाई को लेकर दबाव कम हुआ है। बाजार में उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद ने यूरिया फ्यूचर्स की कीमतों को नीचे खींचा है।
होर्मुज स्ट्रेट पर नजर
अंतरराष्ट्रीय फर्टिलाइज़र बाजार में होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है। इस रास्ते से बड़ी मात्रा में ऊर्जा और कमोडिटी का व्यापार होता है। मिडिल ईस्ट में किसी भी तनाव की स्थिति में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने पर यूरिया की कीमतों में अचानक तेजी आ सकती है।
हालांकि, मौजूदा स्थिति में बातचीत से सकारात्मक संकेत मिलने के कारण बाजार ने पहले से देरी से पहुंच रहे कार्गो को भी अपनी गणना में शामिल करना शुरू कर दिया है। इससे तत्काल सप्लाई संकट की आशंका कम हुई है और यूरिया फ्यूचर्स में तेजी का दबाव कमजोर पड़ा है।
उत्तरी गोलार्ध में मांग कमजोर
यूरिया फ्यूचर्स की कीमतों पर मौसमी मांग का भी असर पड़ा है। उत्तरी गोलार्ध के ज्यादातर हिस्सों में प्रमुख फसलों की बुआई पूरी हो चुकी है। इसके कारण तत्काल यूरिया मांग में कमी आई है।
यूरिया का सबसे बड़ा इस्तेमाल कृषि क्षेत्र में नाइट्रोजन उर्वरक के रूप में किया जाता है। बुआई और फसल की शुरुआती बढ़वार के दौरान यूरिया की मांग अधिक रहती है। जैसे-जैसे प्रमुख कृषि क्षेत्रों में बुआई का काम पूरा होता है, तत्काल खरीदारी की जरूरत घटती है। इसका सीधा असर यूरिया फ्यूचर्स पर दिखाई देता है।
ब्राजील ने खरीदारी टाली
दुनिया के बड़े फर्टिलाइज़र आयातकों में शामिल ब्राजील की खरीदारी में भी कमजोरी देखने को मिली है। ब्राजील ने यूरिया की खरीदारी को टाल दिया और पिछले साल की तुलना में कम यूरिया आयात किया।
ब्राजील की ओर से कमजोर खरीदारी का मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक प्रमुख खरीदार की मांग फिलहाल कम हो गई है। जब सप्लाई बढ़ने की संभावना हो और बड़े खरीदार खरीदारी रोक दें, तो यूरिया फ्यूचर्स पर दबाव स्वाभाविक रूप से बढ़ता है।
अप्रैल के शिखर से 40% से ज्यादा गिरावट
15 अप्रैल को यूरिया फ्यूचर्स 700 डॉलर प्रति टन से ऊपर पहुंच गया था। उस समय मिडिल ईस्ट में सप्लाई बाधित होने की आशंका, शिपिंग जोखिम और वैश्विक फर्टिलाइज़र बाजार में अनिश्चितता के कारण कीमतों में तेज उछाल आया था।
अब कीमत लगभग 400 डॉलर प्रति टन के आसपास आ गई है। यानी अप्रैल के शिखर से यूरिया फ्यूचर्स में 40 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि इतनी बड़ी गिरावट के बावजूद कीमत साल की शुरुआत के मुकाबले अभी भी करीब 9 फीसदी ऊपर है।
इसका मतलब है कि यूरिया बाजार पूरी तरह मंदी में नहीं गया है। सप्लाई की स्थिति बेहतर होने और मांग में मौसमी कमजोरी के कारण कीमतें नीचे आई हैं, लेकिन साल की शुरुआत की तुलना में बाजार अभी भी ऊंचे स्तर पर है।
यूरिया क्या है और खेती में क्यों जरूरी है?
यूरिया एक प्रमुख नाइट्रोजन उर्वरक है। पौधों की अच्छी बढ़वार के लिए नाइट्रोजन आवश्यक पोषक तत्व है। यूरिया पौधों को नाइट्रोजन उपलब्ध कराता है, जिससे पत्तियों और तनों की वृद्धि बेहतर होती है।
नाइट्रोजन पौधों में क्लोरोफिल के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। क्लोरोफिल की मदद से पौधे प्रकाश संश्लेषण यानी फोटोसिंथेसिस करते हैं। इसलिए उचित मात्रा में यूरिया का इस्तेमाल फसल की वृद्धि और उत्पादकता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
हालांकि, यूरिया का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल भी नुकसानदायक हो सकता है। इससे मिट्टी के पोषक संतुलन पर असर पड़ सकता है और नाइट्रोजन का नुकसान पर्यावरणीय समस्या पैदा कर सकता है। इसलिए कृषि विशेषज्ञ आमतौर पर संतुलित उर्वरक इस्तेमाल की सलाह देते हैं।
यूरिया फ्यूचर्स क्या होते हैं?
यूरिया फ्यूचर्स ऐसे वित्तीय कॉन्ट्रैक्ट हैं जिनके माध्यम से बाजार के प्रतिभागी भविष्य में यूरिया की कीमतों में होने वाले बदलाव के जोखिम को मैनेज कर सकते हैं। उत्पादक, बड़े उपभोक्ता और ट्रेडर इन कॉन्ट्रैक्ट का इस्तेमाल कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाव यानी हेजिंग के लिए कर सकते हैं।
इसके अलावा, कुछ बाजार प्रतिभागी कीमतों में संभावित बदलाव से लाभ कमाने के उद्देश्य से भी यूरिया फ्यूचर्स में ट्रेड करते हैं। इस तरह फ्यूचर्स बाजार यूरिया की भविष्य की कीमतों के बारे में बाजार की अपेक्षाओं को समझने में भी मदद करता है।
CBOT और यूरिया की कीमत
यूरिया फ्यूचर्स की ट्रेडिंग से जुड़े बाजारों में शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड यानी CBOT का भी उल्लेख किया जाता है। फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट वित्तीय इंस्ट्रूमेंट होते हैं, जिनका इस्तेमाल उत्पादकों, बड़े उपभोक्ताओं और ट्रेडर्स द्वारा कीमतों में होने वाले बदलाव के जोखिम को मैनेज करने के लिए किया जा सकता है।
वहीं, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दिखाई जाने वाली यूरिया की कीमतें हमेशा किसी एक भौतिक बाजार की स्पॉट कीमत का सीधा प्रतिनिधित्व नहीं करतीं। कई मामलों में ये OTC यानी ओवर-द-काउंटर और CFD यानी कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफरेंस जैसे वित्तीय इंस्ट्रूमेंट पर आधारित होती हैं।
आगे यूरिया फ्यूचर्स का रुख क्या रहेगा?
आने वाले समय में यूरिया फ्यूचर्स की दिशा कई प्रमुख कारकों पर निर्भर करेगी। सबसे पहले मिडिल ईस्ट और होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति महत्वपूर्ण रहेगी। अगर शिपिंग सामान्य रहती है तो सप्लाई संबंधी जोखिम कम रह सकता है।
दूसरा महत्वपूर्ण कारक चीन का यूरिया निर्यात होगा। यदि चीन से निर्यात बढ़ता है तो ग्लोबल सप्लाई में इजाफा होगा और यूरिया फ्यूचर्स पर दबाव बना रह सकता है। इसके विपरीत अगर निर्यात फिर सीमित होता है तो कीमतों में तेजी लौट सकती है।
तीसरा कारक ब्राजील समेत बड़े आयातकों की खरीदारी होगी। कमजोर मांग कीमतों को नीचे रख सकती है, जबकि बड़े देशों की खरीदारी बढ़ने पर यूरिया फ्यूचर्स में तेजी का माहौल बन सकता है।
कुल मिलाकर, अप्रैल के 700 डॉलर से अधिक के शिखर से लगभग 400 डॉलर प्रति टन तक आना यूरिया फ्यूचर्स में बड़ा करेक्शन है। मिडिल ईस्ट सप्लाई जोखिम में कमी, चीन से संभावित अतिरिक्त सप्लाई, उत्तरी गोलार्ध में मौसमी मांग में कमजोरी और ब्राजील की कम खरीदारी ने कीमतों पर दबाव बनाया है। फिर भी साल की शुरुआत से कीमत करीब 9 फीसदी ऊपर होने के कारण बाजार में तेजी का कुछ हिस्सा अभी कायम है। आने वाले महीनों में वैश्विक सप्लाई, शिपिंग रूट और फर्टिलाइज़र की मांग यूरिया फ्यूचर्स की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

