• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home कृषि समाचार

पीएम-एमकेएसएसवाई से मत्स्य क्षेत्र को मिलेगी नई रफ्तार, 1.70 लाख रोजगार सृजन का लक्ष्य

PM-MKSSY to give new momentum to the fisheries sector; target of creating 1.70 lakh jobs.

Emran Khan by Emran Khan
August 13, 2026
in कृषि समाचार
0
मत्स्य क्षेत्र को डिजिटल पहचान से जोड़ने की पहल

मत्स्य क्षेत्र को डिजिटल पहचान से जोड़ने की पहल

0
SHARES
0
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

देश के मत्स्य पालन क्षेत्र को अधिक संगठित, आधुनिक, टिकाऊ और रोजगारपरक बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) लागू की जा रही है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के अंतर्गत संचालित इस केंद्रीय क्षेत्र की उप-योजना का अनुमानित व्यय 6,000 करोड़ रुपये है। योजना का क्रियान्वयन वित्त वर्ष 2023-24 से 2026-27 तक चार वर्षों की अवधि के लिए किया जा रहा है।

पीएम-एमकेएसएसवाई का उद्देश्य केवल मछली उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि पूरे मत्स्य मूल्य-श्रृंखला को मजबूत करना है। इसके तहत मछुआरों, मछली पालकों, मत्स्य श्रमिकों, सहकारी समितियों और सूक्ष्म एवं लघु मत्स्य उद्यमों को संस्थागत वित्त, बीमा, डिजिटल सेवाओं, बाजार संपर्क, प्रसंस्करण, शीत-श्रृंखला और आधुनिक तकनीक से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

सरकार ने इस योजना के माध्यम से कुल 1.70 लाख रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा है।

मत्स्य क्षेत्र को डिजिटल पहचान से जोड़ने की पहल

पीएम-एमकेएसएसवाई की महत्वपूर्ण विशेषताओं में मत्स्य पालन क्षेत्र का क्रमिक औपचारीकरण शामिल है। इसके लिए 11 सितंबर 2024 को राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म (NFDP) की शुरुआत की गई।

एनएफडीपी के माध्यम से मत्स्य श्रमिकों को कार्य-आधारित डिजिटल पहचान उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे सरकारी योजनाओं और सेवाओं को वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र से जुड़े लोगों का बेहतर डेटाबेस तैयार होने की संभावना है। इससे वित्तीय सेवाओं, बीमा, सरकारी सहायता और अन्य सुविधाओं का वितरण अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाया जा सकता है।

संस्थागत वित्त तक बढ़ेगी पहुंच

मत्स्य पालन में मछुआरों और मछली पालकों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक कार्यशील पूंजी और संस्थागत वित्त की उपलब्धता है। पीएम-एमकेएसएसवाई के तहत मछली पालकों, मछुआरों और सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को संस्थागत वित्त तक अधिक पहुंच उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

इसका उद्देश्य पूंजी की लागत को कम करना और मत्स्य कारोबार को विस्तार देने में मदद करना है। आसान वित्तीय पहुंच से छोटे उद्यमी बेहतर उपकरण, प्रसंस्करण सुविधाएं, भंडारण और अन्य आवश्यक संसाधनों में निवेश कर सकते हैं।

इससे छोटे स्तर के मत्स्य कारोबार को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने और उनकी व्यावसायिक क्षमता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।

मत्स्य सहकारी समितियों को मिलेगा मजबूत आधार

पीएम-एमकेएसएसवाई में मत्स्य सहकारी समितियों को भी विशेष महत्व दिया गया है। योजना के तहत सहकारी समितियों की संस्थागत क्षमता बढ़ाने, बाजार तक पहुंच सुधारने और वित्तीय संसाधनों तक पहुंच आसान बनाने का प्रावधान है।

इसके अलावा, सहकारी संस्थाओं को व्यवसाय विकास योजनाओं और आवश्यकता आधारित सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

मजबूत सहकारी समितियां छोटे मछुआरों और मछली पालकों को सामूहिक रूप से बेहतर बाजार उपलब्ध कराने, इनपुट की खरीद, प्रसंस्करण तथा उत्पादों की बिक्री में मदद कर सकती हैं।

मछली पालन बीमा पर एकमुश्त प्रोत्साहन

मछली पालन में मौसम, बीमारी और अन्य जोखिमों के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे जोखिमों को कम करने के लिए पीएम-एमकेएसएसवाई के घटक 1-बी के तहत मत्स्यपालन बीमा खरीदने वाले किसानों को एकमुश्त प्रोत्साहन दिया जाता है।

बीमा के लिए एकमुश्त प्रोत्साहन भुगतान किए गए प्रीमियम का 40 प्रतिशत है। इसकी अधिकतम सीमा 25,000 रुपये प्रति हेक्टेयर या अधिकतम 4 हेक्टेयर जल क्षेत्र के लिए प्रति किसान 1 लाख रुपये है।

वहीं, गहन मत्स्यपालन प्रणालियों जैसे फार्म, केज कल्चर, RAS, बायोफ्लॉक और रेसवे आदि के लिए भी भुगतान किए गए प्रीमियम का 40 प्रतिशत प्रोत्साहन निर्धारित है। इसकी अधिकतम सीमा 1,800 वर्ग मीटर क्षेत्र के लिए प्रति किसान 1 लाख रुपये है।

विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला लाभार्थियों को सामान्य वर्ग की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक प्रोत्साहन दिया जाता है।

यह प्रावधान छोटे मछली पालकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है, क्योंकि बीमा प्रीमियम का एक हिस्सा सरकार की ओर से प्रोत्साहन के रूप में मिलने से जोखिम प्रबंधन की लागत कम हो सकती है।

पर्यावरण अनुकूल मत्स्य पालन पर जोर

पीएम-एमकेएसएसवाई में मत्स्य क्षेत्र के आर्थिक विकास के साथ पर्यावरणीय स्थिरता को भी महत्व दिया गया है। योजना के तहत ऐसी परियोजनाओं को प्रोत्साहित किया जाता है जो कार्बन उत्सर्जन कम करने, ऊर्जा एवं जल दक्षता बढ़ाने और नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देती हैं।

इसके अलावा जलवायु-स्मार्ट तकनीक, बेहतर स्वच्छता, अपशिष्ट एवं प्रदूषण प्रबंधन और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी जैसी गतिविधियों को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

इसका उद्देश्य मत्स्य पालन और जलीय कृषि को भविष्य के लिए अधिक जलवायु-अनुकूल और टिकाऊ बनाना है।

योजना में रोग प्रबंधन, अपशिष्ट प्रबंधन, गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों, प्रमाणन और उत्पाद की ट्रेसबिलिटी यानी पता लगाने की क्षमता जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

सूक्ष्म उद्यमों को प्रदर्शन अनुदान

पीएम-एमकेएसएसवाई के घटक 2 और 3 के तहत मत्स्य मूल्य-श्रृंखला की दक्षता बढ़ाने तथा उपभोक्ताओं तक सुरक्षित मत्स्य उत्पाद पहुंचाने के लिए प्रदर्शन अनुदान का प्रावधान किया गया है।

सामान्य वर्ग के लिए यह अनुदान कुल निवेश का 25 प्रतिशत या 35 लाख रुपये, जो भी कम हो, तक दिया जाता है।

वहीं अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला स्वामित्व वाले सूक्ष्म उद्यमों के लिए यह सहायता कुल निवेश का 35 प्रतिशत या 45 लाख रुपये, जो भी कम हो, तक निर्धारित है।

इसके अलावा ग्राम स्तरीय संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, महिला एवं महिला स्वामित्व वाले संगठनों तथा सहकारी समितियों के संघों के लिए प्रदर्शन अनुदान कुल निवेश का 35 प्रतिशत या 200 लाख रुपये, जो भी कम हो, तक हो सकता है।

इस सहायता से छोटे उद्यमों को प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग और बाजार से जोड़ने के लिए निवेश करने में मदद मिलेगी।

रोजगार सृजन पर विशेष फोकस

योजना के तहत रोजगार सृजन और रोजगार बनाए रखने को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। पात्र प्रदर्शन अनुदान की सीमा के भीतर पुरुषों के लिए 10,000 रुपये प्रति वर्ष और महिलाओं के लिए 15,000 रुपये प्रति वर्ष रोजगार सृजन एवं रखरखाव के लिए प्रदान किए जाते हैं।

हालांकि यह सहायता कुल पात्र प्रदर्शन अनुदान के 50 प्रतिशत की सीमा के अधीन है।

महिलाओं के लिए अपेक्षाकृत अधिक प्रोत्साहन का प्रावधान मत्स्य मूल्य-श्रृंखला में महिला भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

समुद्री खाद्य निर्यात को मिलेगा बढ़ावा

भारत के समुद्री खाद्य क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत बनाने के लिए पीएम-एमकेएसएसवाई में गुणवत्तापूर्ण और टिकाऊ मत्स्य उत्पादन, मूल्य संवर्धन, प्रमाणन और ट्रेसबिलिटी पर जोर दिया गया है।

योजना के तहत रोग निगरानी, प्रसंस्करण सुविधाओं, शीत-श्रृंखला बुनियादी ढांचे, खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता आश्वासन जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए सहायता प्रदान की जाती है।

इससे भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनकी स्वीकार्यता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

सरकार का लक्ष्य भारतीय मत्स्य क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और मूल्य प्राप्ति को बढ़ाना है, ताकि देश के मछुआरों और मत्स्य उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से बेहतर आर्थिक अवसर मिल सकें।

आधुनिक तकनीक और प्रसंस्करण को प्रोत्साहन

आज के समय में केवल मछली उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने से पहले उसकी गुणवत्ता बनाए रखना, प्रसंस्करण करना, पैकेजिंग और उचित तापमान पर भंडारण करना भी जरूरी है।

इसी को ध्यान में रखते हुए पीएम-एमकेएसएसवाई के तहत सूक्ष्म और लघु मत्स्य उद्यमों को उन्नत तकनीक, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बाजार संबंधों को अपनाने के लिए सहायता दी जा रही है।

इससे मछली और अन्य मत्स्य उत्पादों का मूल्य बढ़ाने के साथ कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने में भी मदद मिल सकती है।

गांव से बाजार तक मजबूत होगी मत्स्य मूल्य-श्रृंखला

योजना का व्यापक उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र को केवल उत्पादन केंद्रित गतिविधि के बजाय एक मजबूत मूल्य-श्रृंखला के रूप में विकसित करना है।

इसमें मछली पालन से लेकर कटाई, संग्रहण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, कोल्ड चेन, परिवहन और बाजार तक पहुंच को मजबूत करने पर ध्यान दिया गया है।

यदि इन सभी कड़ियों को बेहतर तरीके से जोड़ा जाता है, तो मछुआरों और मछली पालकों को अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल सकता है। साथ ही उपभोक्ताओं तक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण मत्स्य उत्पाद पहुंचाने की व्यवस्था भी मजबूत होगी।

सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू

पीएम-एमकेएसएसवाई एक मांग-आधारित उप-योजना है और इसे आंध्र प्रदेश सहित सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया गया है।

योजना में किसी विशेष जिले के लिए अलग से रोजगार लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले सहित किसी भी जिले के लिए अलग जिला-वार रोजगार लक्ष्य तय नहीं है।

हालांकि, योजना का देशव्यापी लक्ष्य कुल 1.70 लाख रोजगार सृजित करना है।

किसानों और उद्यमियों के लिए क्या मायने रखती है योजना?

पीएम-एमकेएसएसवाई को व्यापक रूप से देखा जाए तो यह योजना मत्स्य क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों को एक साथ मजबूत करने का प्रयास करती है। मछली पालकों को बीमा सुरक्षा, उद्यमियों को वित्त और प्रदर्शन अनुदान, सहकारी समितियों को संस्थागत सहायता तथा निर्यातकों को बेहतर गुणवत्ता और प्रसंस्करण व्यवस्था उपलब्ध कराने पर जोर है।

इसके साथ ही डिजिटल पहचान और राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र को अधिक औपचारिक एवं तकनीक आधारित बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना भारत के मत्स्य क्षेत्र को अधिक संगठित, सुरक्षित, टिकाऊ और बाजार उन्मुख बनाने की दिशा में एक व्यापक पहल है। 6,000 करोड़ रुपये के अनुमानित व्यय वाली इस योजना में मछुआरों और मछली पालकों की वित्तीय पहुंच बढ़ाने से लेकर बीमा, डिजिटल पहचान, सहकारी समितियों को मजबूत करने, सूक्ष्म उद्यमों को प्रदर्शन अनुदान देने और समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने तक कई पहल शामिल हैं।

विशेष रूप से 1.70 लाख रोजगार सृजन का लक्ष्य, महिलाओं और एससी/एसटी लाभार्थियों के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन, जलवायु-अनुकूल मत्स्य पालन और आधुनिक प्रसंस्करण तकनीकों को बढ़ावा देने के प्रावधान इसे मत्स्य क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बनाते हैं।

आने वाले वर्षों में यदि योजना के तहत उपलब्ध वित्तीय और तकनीकी सहायता को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाता है, तो इससे छोटे मछली पालकों, मछुआरों और मत्स्य उद्यमियों की आय बढ़ाने के साथ-साथ भारत के मत्स्य उत्पादों की घरेलू और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को भी मजबूत किया जा सकता है।

 

Tags: #DelhiGovernment #WheatMSP #FarmersRelief #RabiSeason #MSPRules #AgricultureNews #FarmersSupport #WheatProcurement #RainDamage #OlaVrishti #KisanSamachar #IndiaAgricultureFarming
Previous Post

Mustard Farming: सही बुवाई से बेहतर पैदावार तक, जानें मिट्टी, समय, कीट प्रबंधन और सरकारी सहायता की पूरी जानकारी

Recent Posts

  • पीएम-एमकेएसएसवाई से मत्स्य क्षेत्र को मिलेगी नई रफ्तार, 1.70 लाख रोजगार सृजन का लक्ष्य
  • Mustard Farming: सही बुवाई से बेहतर पैदावार तक, जानें मिट्टी, समय, कीट प्रबंधन और सरकारी सहायता की पूरी जानकारी
  • ईईजेड में मछली पकड़ने के लिए 9,650 डिजिटल एक्सेस पास जारी, छोटे मछुआरों को गहरे समुद्र में नए अवसर
  • अवैध कीटनाशकों के खिलाफ 13 राज्यों में डिजिटल अभियान, 25 लाख से अधिक किसानों तक पहुंचेगा संदेश
  • हरियाली अमावस्या पर 31 राज्यों में 50 हजार से अधिक पौधारोपण, वृक्ष मित्र परिवार ने दिया देशव्यापी हरित आंदोलन का संदेश

Recent Comments

No comments to show.
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Quick Links

  • Privacy policy
  • Terms and Conditions

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.