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1 रुपये लीटर दूध पर मचा बवाल: BAMUL अध्यक्ष का Flipkart पर आरोप, CCI से जांच की मांग

Fiza by Fiza
March 16, 2026
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1 रुपये लीटर दूध पर मचा बवाल: BAMUL अध्यक्ष का Flipkart पर आरोप, CCI से जांच की मांग
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बेंगलुरु: ई-कॉमर्स कंपनी Flipkart पर 1 रुपये प्रति लीटर दूध बेचने के आरोप को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बैंगलोर मिल्क यूनियन लिमिटेड (BAMUL) के अध्यक्ष डी.के. सुरेश ने दावा किया है कि Flipkart अपने प्लेटफॉर्म पर भारी छूट देकर दूध बेच रही है, जिससे डेयरी किसानों और सहकारी संस्थाओं को गंभीर नुकसान हो सकता है। इस मामले को लेकर सुरेश ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) में शिकायत दर्ज कराने की बात कही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ईमेल लिखकर पूरे मामले की जांच की मांग भी की है।

डी.के. सुरेश के अनुसार, दूध जैसी जरूरी वस्तु को अत्यधिक छूट के साथ बेचना सिर्फ एक मार्केटिंग रणनीति नहीं है, बल्कि इससे देश के डेयरी सेक्टर पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि यदि बड़ी कंपनियां निवेशकों के पैसे के सहारे ऐसे डिस्काउंट ऑफर चलाती हैं, तो इससे डेयरी सहकारी समितियों की प्रतिस्पर्धा क्षमता कमजोर हो सकती है और किसानों की आय पर भी असर पड़ सकता है।

हालांकि Flipkart ने इन आरोपों पर सफाई दी है। कंपनी ने कहा कि वह समय-समय पर ग्राहकों को बेहतर कीमत देने के लिए सीमित समय के प्रमोशनल ऑफर चलाती है। कंपनी के मुताबिक, कई बार ये ऑफर उसके बैंकिंग पार्टनर्स के साथ मिलकर दिए जाते हैं। Flipkart के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि प्लेटफॉर्म पर किसी भी उत्पाद की कीमत विक्रेता खुद तय करते हैं और सभी विक्रेताओं को उनके उत्पाद की पूरी तय कीमत दी जाती है। इसलिए किसानों से खरीदे जाने वाले दूध की कीमत पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ता।

Flipkart ने यह भी कहा कि कंपनी देशभर में किसानों, सहकारी समितियों और छोटे विक्रेताओं के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। कंपनी का दावा है कि वह अपने प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों और छोटे कारोबारियों को बड़े बाजार तक पहुंचाने और उनके व्यवसाय को बढ़ाने में मदद कर रही है।

इस विवाद के बीच डी.के. सुरेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दूध कोई 1 रुपये की “फ्लैश डील” नहीं है, बल्कि यह लाखों किसानों की रोजी-रोटी से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि दूध के हर एक लीटर के पीछे किसानों की मेहनत और पसीना लगा होता है। अगर कंपनियां अत्यधिक छूट देकर इसे बेचती हैं, तो इससे देश की डेयरी सहकारी व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है।

सुरेश ने केंद्र और राज्य सरकार से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि दूध केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि लाखों डेयरी किसानों की आजीविका का आधार है। इसलिए इस तरह की बिक्री व्यवस्था पर कड़ी निगरानी जरूरी है।

साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसानों और सहकारी संस्थाओं का समर्थन करें और कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) के स्थानीय डेयरी ब्रांड ‘नंदिनी’ को प्राथमिकता दें। सुरेश ने कहा कि वह Flipkart के खिलाफ प्रतिस्पर्धा कानून की धारा 19(1)(a) के तहत CCI में औपचारिक शिकायत दर्ज कराएंगे। उनका आरोप है कि अत्यधिक कम कीमत पर उत्पाद बेचकर बाजार पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है, जिससे डेयरी किसानों और सहकारी संस्थाओं को दीर्घकाल में नुकसान हो सकता है।

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