लोगों को रोजाना ताजा और सुरक्षित अंडे उपलब्ध कराने के लिए तीन साल पहले नियम बनाए जा चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका पालन अब भी अधूरा है। भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने अंडों के स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार ने भी अंडों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नियम लागू किए थे, ताकि उपभोक्ताओं तक खराब अंडे न पहुंचें।
दरअसल, देश के कई राज्यों में मांग पूरी करने के लिए दूसरे राज्यों से अंडे मंगाए जाते हैं। ये अंडे सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करके बाजार तक पहुंचते हैं। ऐसे में स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट के दौरान लापरवाही की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं, जिससे अंडों की गुणवत्ता प्रभावित होती है। आम ग्राहक के लिए बिना तोड़े अंडे की गुणवत्ता पहचानना मुश्किल होता है, और खराब निकलने पर उसके पास शिकायत के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
पशुपालन विभाग के अनुसार, नियमों को लागू करने की दिशा में काम किया जा रहा है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पोल्ट्री उद्योग से जुड़े लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है ताकि वे इन नियमों का पालन करें। वहीं, पोल्ट्री एसोसिएशन का भी मानना है कि इन नियमों का सबसे बड़ा फायदा आम जनता को मिलेगा, जिन्हें बेहतर गुणवत्ता के अंडे मिल सकेंगे।
हालांकि, जमीनी स्तर पर चुनौतियां भी कम नहीं हैं। हरियाणा के बरवाला जैसे बड़े पोल्ट्री हब के किसानों का कहना है कि कई बार धार्मिक अवसरों या स्थानीय प्रतिबंधों के चलते अंडों को लंबे समय तक स्टोर करना पड़ता है। ऐसे में नियमों का पालन करना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा अंडों पर उत्पादन तिथि और अन्य जानकारी प्रिंट करने से लागत बढ़ने की चिंता भी सामने आई है।
नियमों के अनुसार, अंडों को कोल्ड स्टोरेज में रखने के लिए अलग चैम्बर होना जरूरी है, जहां तापमान 4 से 7 डिग्री और आर्द्रता 75 से 80 प्रतिशत के बीच होनी चाहिए। अंडों को अधिकतम तीन महीने तक ही स्टोर किया जा सकता है और एक बार बाहर निकालने के बाद उन्हें दोबारा कोल्ड स्टोरेज में नहीं रखा जा सकता। साथ ही, अंडों को फल और सब्जियों के साथ रखने की मनाही है।
ट्रांसपोर्ट के लिए भी सख्त नियम बनाए गए हैं। 150 किलोमीटर से अधिक दूरी के लिए अंडों को एसी वाहनों में ही ले जाना अनिवार्य किया गया है। इसके बावजूद, अभी तक देश के अधिकांश हिस्सों में इन नियमों का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा है। ऐसे में सवाल यही है कि जब कानून मौजूद है, तो आम लोगों को सुरक्षित और ताजा अंडे कब मिलेंगे।

