देश में मौसम पूर्वानुमान की सटीकता बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए सरकार आधुनिक तकनीकों और उन्नत अवसंरचना पर तेजी से काम कर रही है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अनुसार, मौसम और जलवायु निगरानी के लिए उच्च-रिज़ॉल्यूशन मॉडल, उपग्रह आधारित अवलोकन प्रणाली और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस पूर्वानुमान उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है।
मंत्रालय के पास वर्तमान में एक व्यापक मौसम अवलोकन नेटवर्क मौजूद है, जिसमें मानवयुक्त वेधशालाएं, स्वचालित मौसम स्टेशन (AWS), स्वचालित वर्षामापी (ARG), एग्रो-एडब्ल्यूएस, ऊपरी-वायु वेधशालाएं, डॉप्लर मौसम रडार (DWR) और उपग्रह शामिल हैं। यह नेटवर्क देशभर में मौसम से संबंधित घटनाओं की निगरानी और पूर्वानुमान को अधिक सटीक और प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है।
सरकार ने “मिशन मौसम” की शुरुआत भी की है, जिसका उद्देश्य भारत को “मौसम के लिए तैयार और जलवायु स्मार्ट” राष्ट्र बनाना है। इस मिशन के तहत मौसम निगरानी स्टेशनों और जलवायु अनुसंधान एवं विकास अवसंरचना को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है, जिससे समय पर चेतावनी प्रणाली को मजबूत किया जा सके।
हरियाणा राज्य में भी मौसम निगरानी के लिए पर्याप्त सुविधाएं विकसित की गई हैं। यहां दैनिक डेटा रिकॉर्ड करने के लिए 8 विभागीय और गैर-विभागीय वेधशालाएं तथा 7 स्वचालित मौसम स्टेशन कार्यरत हैं। इसके अलावा नई दिल्ली, पटियाला और जयपुर में स्थापित तीन डॉप्लर मौसम रडार क्षेत्र में मौसम की सटीक जानकारी देने में सहायक हैं।
सूखा प्रभावित भिवानी-महेंद्रगढ़ क्षेत्र में भी विशेष ध्यान दिया गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा वर्ष 2022 में महेंद्रगढ़ में एक कृषि-स्वचालित मौसम केंद्र स्थापित किया गया, जिससे किसानों को स्थानीय स्तर पर मौसम संबंधी सटीक जानकारी मिल सके।
सरकार का कहना है कि इन पहलों के माध्यम से न केवल मौसम पूर्वानुमान की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है, बल्कि आपदा प्रबंधन, कृषि योजना और जलवायु अनुकूलन में भी मदद मिल रही है।

