उत्तर प्रदेश के मलिहाबाद, जिसे आम नगरी (Mango Farming) के नाम से जाना जाता है, इस बार एक नई तकनीक को लेकर चर्चा में है। यहां आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में “कवच मैंगो फ्रूट प्रोटेक्शन बैग” ने किसानों का ध्यान अपनी ओर खींचा। यह तकनीक न सिर्फ आम की फसल को सुरक्षित रखने में मददगार साबित हो रही है, बल्कि किसानों की आमदनी बढ़ाने की भी बड़ी उम्मीद जगा रही है।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “कवच मैंगो बैग” रहा, जिसे खास तौर पर आम के फलों की सुरक्षा के लिए तैयार किया गया है। इस बैग की मदद से आम को कीटों, धूल, तेज धूप और विभिन्न बीमारियों से बचाया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक के उपयोग से फलों की गुणवत्ता में काफी सुधार होता है, जिससे बाजार में उनकी कीमत भी अधिक मिलती है। बैग को स्थानीय स्तर पर तैयार किया जा रहा है, जिससे इसकी लागत भी कम है और किसान इसे आसानी से खरीद सकते हैं। इसकी खासियत यह भी है कि इसे करीब दो साल तक दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस तकनीक को विकसित करने वाले उद्यमियों मयंक सिंह और सुजीत सिंह ने किसानों को इसके उपयोग और लाभ के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह बैग न सिर्फ उत्पादन को सुरक्षित करता है, बल्कि निर्यात गुणवत्ता के आम तैयार करने में भी मददगार है।
कार्यक्रम में किसानों के लिए एक और बड़ी घोषणा की गई। “स्वीट सैफरन” नामक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए बैगिंग किए गए आमों की सीधी खरीद की जाएगी। इससे किसानों को बिचौलियों से छुटकारा मिलेगा और वे सीधे प्रीमियम बाजार से जुड़ सकेंगे। इस पहल से किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिलने की संभावना बढ़ गई है।
कार्यक्रम में केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (CISH) के निदेशक डॉ. टी. दामोदरन ने भी किसानों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि आम की खेती को केवल पारंपरिक फसल के रूप में नहीं, बल्कि एक उद्योग के रूप में देखा जाए। उन्होंने पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट, कीट नियंत्रण और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया। साथ ही उकठा रोग से बचाव और लाभकारी कीटों के संरक्षण की भी जानकारी दी गई।
उद्यान विभाग के अधिकारियों ने भी किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूक किया। उन्होंने बैगिंग पर मिलने वाली सब्सिडी, बागों की छंटाई और अन्य सहायता योजनाओं की जानकारी दी। इसके अलावा संतुलित पोषण, जैसे कैल्शियम और बोरॉन के उपयोग से फलों की गुणवत्ता सुधारने के उपाय भी बताए गए।
कार्यक्रम के दौरान किसानों ने अपनी समस्याएं भी खुलकर रखीं। उन्होंने नकली कीटनाशकों की बढ़ती समस्या, ईंट-भट्टों के धुएं से फसलों को हो रहे नुकसान और पुराने बागों के रखरखाव में आने वाली कठिनाइयों को उठाया।
कुल मिलाकर, यह “कवच आम सभा” (Mango Farming) किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हुई। नई तकनीकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के सहयोग से अब मलिहाबाद के आम किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ-साथ अपने उत्पाद का उचित और बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है।

