दलहनी सब्जियों की खेती में उत्पादकता और पोषण गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। ICAR–Indian Institute of Vegetable Research (आईसीएआर-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान), वाराणसी द्वारा ‘काशी सूक्ष्म-शक्ति प्लस’ नामक एक उन्नत तरल पोषक उत्पाद विकसित किया गया है, जो किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहा है।
यह अभिनव फॉर्मूलेशन सूक्ष्म पोषक तत्वों (माइक्रोन्यूट्रिएंट्स) और पादप वृद्धि नियामकों (प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर्स) का संतुलित मिश्रण है, जिसे वर्मीवॉश आधारित घोल में तैयार किया गया है। इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पौधों द्वारा आसानी से अवशोषित हो जाता है, जिससे पोषक तत्वों की प्रभावशीलता बढ़ जाती है। इसके साथ ही इसका उपयोग करना भी किसानों के लिए सरल और सुविधाजनक है।
विशेष रूप से मटर और फ्रेंच बीन जैसी दलहनी सब्जियों में इसके उपयोग से उल्लेखनीय परिणाम सामने आए हैं। फील्ड परीक्षणों में यह पाया गया कि ‘काशी सूक्ष्म-शक्ति प्लस’ के प्रयोग से फसल की उपज में लगभग 12 से 13 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा पौधों की वृद्धि में भी स्पष्ट सुधार देखा गया, जैसे कि शाखाओं की संख्या में वृद्धि, पौधों की सघनता (बायोमास) में बढ़ोतरी और समग्र रूप से बेहतर फसल विकास।
इस उत्पाद का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू ‘बायोफोर्टिफिकेशन’ है, जिसके माध्यम से फसल की पोषण गुणवत्ता में सुधार होता है। इसके उपयोग से मटर और फ्रेंच बीन जैसी सब्जियों में प्रोटीन की मात्रा बढ़ती है और साथ ही जिंक, आयरन और मैंगनीज जैसे आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की मात्रा भी अधिक हो जाती है। यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि उपभोक्ताओं को अधिक पोषक और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इस तकनीक को वाराणसी और मिर्जापुर के विभिन्न अनुसंधान परीक्षणों और किसानों के खेतों पर सफलतापूर्वक परखा गया है। इन परीक्षणों में ‘काशी सूक्ष्म-शक्ति प्लस’ ने वास्तविक खेती की परिस्थितियों में भी निरंतर और प्रभावी प्रदर्शन किया है। मिर्जापुर के एक किसान के खेत पर इसकी विशेष सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यह तकनीक बड़े पैमाने पर अपनाई जा सकती है और इसका लाभ व्यापक स्तर पर किसानों तक पहुंचाया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी आज भारतीय कृषि के सामने एक बड़ी चुनौती है, जो फसल की गुणवत्ता और उत्पादकता दोनों को प्रभावित करती है। ऐसे में ‘काशी सूक्ष्म-शक्ति प्लस’ जैसी तकनीक इस समस्या का प्रभावी समाधान प्रस्तुत करती है। यह न केवल मिट्टी और फसल में पोषक तत्वों के संतुलन को सुधारती है, बल्कि फसलों को अधिक पोषक और बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त करने योग्य भी बनाती है।
कुल मिलाकर, ‘काशी सूक्ष्म-शक्ति प्लस’ दलहनी सब्जियों की खेती के लिए एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है। इसकी आसान उपयोग विधि, उच्च प्रभावशीलता और पोषण सुधार की क्षमता इसे किसानों के लिए एक आकर्षक विकल्प बनाती है। यह नवाचार कृषि को पोषण-संवेदनशील (न्यूट्रिशन-सेंसिटिव) बनाने, किसानों की आय बढ़ाने और देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

