रांची स्थित Birsa Agricultural University में 9 अप्रैल 2026 को 69वीं वार्षिक मक्का कार्यशाला का भव्य शुभारंभ किया गया। इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन में राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा प्रणाली (NARES) से जुड़े वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं और कृषि विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य मक्का उत्पादन प्रणाली को अधिक टिकाऊ, उत्पादक और भविष्य के अनुरूप बनाना है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि Dr. M. L. Jat, सचिव (DARE) एवं महानिदेशक, Indian Council of Agricultural Research (आईसीएआर) ने अपने संबोधन में मक्का उत्पादन को बेहतर बनाने के लिए “सिस्टम आधारित दृष्टिकोण” अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि फसल सुधार और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के बीच मजबूत तालमेल ही भविष्य की कृषि का आधार बनेगा। जलवायु परिवर्तन और संसाधनों की सीमितता को देखते हुए अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर समग्र और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना समय की मांग है।
इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में ‘एआईसीआरपी मक्का रियल-टाइम डेटा पोर्टल’ का शुभारंभ किया गया। यह पोर्टल देशभर में मक्का अनुसंधान से जुड़े आंकड़ों को एकीकृत कर वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं को त्वरित और सटीक निर्णय लेने में सहायता करेगा। डेटा-आधारित यह पहल राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत कृषि डेटाबेस तैयार करने में अहम भूमिका निभाएगी।
कार्यशाला के दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। इसमें उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence) की स्थापना, कीट पूर्वानुमान प्रणाली (Pest Prediction System), जर्मप्लाज्म विविधीकरण और पोषक तत्वों के कुशल उपयोग वाली उन्नत प्रजनन तकनीकों पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि इन पहलों के माध्यम से मक्का की उत्पादकता और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
सतत कृषि को बढ़ावा देने के लिए ‘सस्टेनेबल इंटेंसिफिकेशन’ और अंतरवर्तीय खेती (Intercropping) जैसे मॉडल्स पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा, जैविक समाधानों जैसे बीएनआई (Biological Nitrification Inhibition), कृषि यंत्रीकरण और मक्का को चारे की फसल के रूप में विकसित करने की संभावनाओं को भी प्रमुखता से रखा गया। ये उपाय न केवल उत्पादन बढ़ाने में सहायक होंगे, बल्कि लागत कम करने और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देंगे।
कार्यशाला में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग (Public-Private Partnership) को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया। विशेष रूप से फीड, एथेनॉल और स्टार्च उद्योग में मक्का की बढ़ती मांग को देखते हुए इस क्षेत्र में निवेश और नवाचार की आवश्यकता पर बल दिया गया। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि ICAR-Indian Institute of Maize Research के नेतृत्व में भारत वर्ष 2030 तक पॉपकॉर्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
इस आयोजन का समग्र उद्देश्य भारत को मक्का अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है। टिकाऊ कृषि पद्धतियों और डेटा-आधारित अनुसंधान के माध्यम से मक्का उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
कुल मिलाकर, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित यह कार्यशाला मक्का उत्पादन के भविष्य को नई दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो रही है, जो किसानों की आय बढ़ाने और देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभाएगी।

