केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने कुवैत के अपने समकक्ष Osama Khaled Al-Budaiwi के साथ एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक कर द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। इस बातचीत में दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और रणनीतिक सहयोग को लेकर कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी।
बैठक के दौरान श्री गोयल ने कुवैत में हालिया संघर्ष के चलते हुई जान-माल की हानि पर गहरा दुख व्यक्त किया और इसकी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में स्थायी शांति केवल क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अत्यंत आवश्यक है। भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि वह किसी भी विवाद के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को ही सबसे प्रभावी माध्यम मानता है।
चर्चा का मुख्य फोकस भारत और कुवैत के बीच आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने पर रहा। दोनों मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि व्यापार और निवेश के क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं, जिन्हें साझा प्रयासों से साकार किया जा सकता है। उन्होंने यह भी माना कि मजबूत द्विपक्षीय संबंध ही दोनों देशों की आर्थिक प्रगति और साझा समृद्धि का आधार बन सकते हैं।
ऊर्जा आपूर्ति के मुद्दे पर भी विस्तार से चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि किसी भी वैश्विक या क्षेत्रीय संकट के दौरान ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार प्रवाह बाधित नहीं होना चाहिए। इसके लिए संवाद बनाए रखना और आपसी सहयोग बढ़ाना बेहद जरूरी है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि मौजूदा परिस्थितियों में आपूर्ति श्रृंखला को सुचारु बनाए रखना दोनों देशों के हित में है।
श्री गोयल ने कुवैत में रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कल्याण के लिए वहां की सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और इस दिशा में कुवैत के सहयोग की सराहना करता है।
भारत ने इस अवसर पर यह भी दोहराया कि वह कुवैत के लिए एक भरोसेमंद और विश्वसनीय साझेदार है, खासकर खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में। श्री गोयल ने आश्वासन दिया कि यदि आपूर्ति श्रृंखला में किसी प्रकार की बाधा आती है, तो भारत उसे दूर करने में हर संभव सहयोग देगा।
बैठक में यह स्पष्ट संदेश उभरकर सामने आया कि भारत और कुवैत दोनों ही संघर्ष की बजाय सहयोग, संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता देते हैं। मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के बीच यह दृष्टिकोण न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक आर्थिक संतुलन में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की उच्चस्तरीय बातचीत से दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग और गहरा होगा। आने वाले समय में व्यापार, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भारत–कुवैत साझेदारी और मजबूत होने की उम्मीद है।

