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महाराष्ट्र में ‘इंस्पेक्टर राज’ को लेकर बढ़ी चिंता; एग्री-इनपुट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशनों ने डीलर्स के बंद के आह्वान को दिया समर्थन

Fiza by Fiza
April 23, 2026
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महाराष्ट्र में ‘इंस्पेक्टर राज’ को लेकर बढ़ी चिंता; एग्री-इनपुट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशनों ने डीलर्स के बंद के आह्वान को दिया समर्थन
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मुंबई: महाराष्ट्र में हाल ही में लागू सरकारी आदेश (GR) के बाद राज्य में “इंस्पेक्टर राज” जैसे हालात को लेकर एग्री-इनपुट सेक्टर में गंभीर चिंता जताई जा रही है। डीलर, डिस्ट्रीब्यूटर और मैन्युफैक्चरर्स का कहना है कि ज़मीन स्तर पर बढ़ते दबाव, बार-बार जांच और नकारात्मक प्रचार के कारण उद्योग पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

उद्योग से जुड़े लोगों का आरोप है कि नए नियमों के तहत कठोर कार्रवाई, अनावश्यक दबाव और खराब छवि बनाने की स्थिति पैदा हो रही है, जिससे ईमानदारी से काम करने वाले व्यापारियों में डर का माहौल है और सामान्य कामकाज प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि इससे किसानों तक जरूरी कृषि उत्पादों की समय पर उपलब्धता भी प्रभावित हो सकती है।

इसी के विरोध में महाराष्ट्र फर्टिलाइजर्स, पेस्टिसाइड्स एंड सीड्स डीलर्स एसोसिएशन (MAFDA) और ऑल इंडिया डीलर एसोसिएशन (AIDA) ने राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन बंद का ऐलान किया है।

इस निर्णय को समर्थन देते हुए AIDA, BASAI, IMMA, OAMA, PMFAI, SFIA, VIA, MMA, TAPMA और IAIMA सहित 10 प्रमुख एग्री-इनपुट एसोसिएशनों ने 27 अप्रैल को एक दिन का बंद रखने का निर्णय लिया है। इस आंदोलन को अन्य राज्यों की एसोसिएशनों का भी समर्थन मिल रहा है।

यह संयुक्त कदम “ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस” को लेकर बढ़ती चिंताओं को दर्शाता है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि सोर्स रजिस्ट्रेशन में देरी, नए उत्पादों को लाने में बाधाएं और नए व्यवसाय शुरू करने में मुश्किलें पहले से ही मौजूद थीं, जिन पर अब अत्यधिक निगरानी और नकारात्मक माहौल ने और दबाव बढ़ा दिया है। इससे एग्री-उद्यमियों पर मानसिक, सामाजिक और आर्थिक प्रभाव पड़ रहा है।

इस बंद में 10,000 से अधिक मैन्युफैक्चरर्स और महाराष्ट्र के करीब 85,000 डीलर और डिस्ट्रीब्यूटर शामिल हो सकते हैं, जिससे राज्य में कृषि उत्पादों की सप्लाई प्रभावित होने की संभावना है।

ओएएमए (OAMA) के अध्यक्ष श्री विजय ठाकुर ने कहा:
“यह कदम एग्री-उद्यमियों की गरिमा बचाने के लिए जरूरी है। अत्यधिक दबाव और कड़ी कार्रवाई से न केवल व्यवसाय प्रभावित होता है, बल्कि इसका असर किसानों तक भी पहुंचता है।”

आईपीएनएम एसपीसी के संयोजक डॉ. सुहास बुद्धे ने कहा:
“इतनी बड़ी संख्या में एसोसिएशनों का समर्थन इस मुद्दे की गंभीरता को दिखाता है। किसानों और उद्योग दोनों के हितों की रक्षा के लिए संतुलित और पारदर्शी नीति जरूरी है।”

साथ ही, समिति ने महाराष्ट्र के माननीय कृषि मंत्री से मुलाकात का समय भी मांगा है, ताकि MSME एग्री-उद्यमियों की समस्याओं को सामने रखा जा सके और “मेक इन इंडिया” के तहत सुधारों पर चर्चा की जा सके।

महाराष्ट्र ऑल इंडिया डीलर एंड डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन के महासचिव श्री बिपिन कसलीवाल ने कहा:
“हम जमीनी स्तर पर कई गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं। सब्सिडी वाले उर्वरकों के साथ गैर-सब्सिडी उत्पाद खरीदने का दबाव बनाया जाता है। ‘इंस्पेक्टर राज’ के कारण हमेशा डर का माहौल बना रहता है। अगर किसी बैच का एक पैक भी फेल हो जाए तो डीलर का लाइसेंस रद्द करने की धमकी दी जाती है, जबकि उसी बैच के बाकी पैक सही होते हैं। कई बार खराबी के कारण स्टोरेज, मौसम, पानी या प्रशिक्षण की कमी भी हो सकती है, लेकिन इसका पूरा बोझ डीलर, डिस्ट्रीब्यूटर और मैन्युफैक्चरर्स पर डाल दिया जाता है। इस व्यवस्था की तुरंत समीक्षा जरूरी है।”

IPNM SPC एक संयुक्त मंच है, जिसमें AIDA, BASAI, IMMA, OAMA, PMFAI, SFIA, VIA, MMA, TAPMA और IAIMA जैसी प्रमुख संस्थाएं शामिल हैं, जो एग्री-इनपुट सेक्टर में सतत विकास और बेहतर कारोबारी माहौल के लिए काम कर रही हैं।

#agriculturenews #Fasalkranti  

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