• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home कृषि समाचार

भारत के बीज क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए मिल रही नई ताकत, 2014-25 के दौरान विकसित हुईं 2,996 जलवायु-अनुकूल फसल किस्में

India's seed sector is gaining new strength to compete globally.

Emran Khan by Emran Khan
July 22, 2026
in कृषि समाचार
0
सार्वजनिक-निजी भागीदारी को मिला बढ़ावा

सार्वजनिक-निजी भागीदारी को मिला बढ़ावा

0
SHARES
1
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

केंद्र सरकार देश के बीज क्षेत्र को मजबूत बनाने और भारतीय बीज उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए लगातार व्यापक कदम उठा रही है। सरकार उच्च गुणवत्ता वाले बीजों के अनुसंधान, उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण, निर्यात, आधुनिक तकनीकों और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को बढ़ावा देकर कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने में जुटी है। इसी का परिणाम है कि वर्ष 2014 से 2025 के बीच देश में 3,236 नई फसल किस्में विकसित एवं अधिसूचित की गईं, जिनमें 2,996 जलवायु-अनुकूल (क्लाइमेट रेजिलिएंट) किस्में शामिल हैं।

587 किस्में चरम जलवायु परिस्थितियों के लिए विकसित

सरकार के अनुसार विकसित की गई 2,996 जलवायु-अनुकूल किस्मों में 587 ऐसी किस्में शामिल हैं जो चरम मौसम की परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम हैं। इनमें—

  • 341 सूखा सहनशील (Drought Tolerant)
  • 89 बाढ़ सहनशील (Flood Tolerant)
  • 80 लवणीयता सहनशील (Salinity Tolerant)
  • 59 अधिक तापमान सहनशील (Heat Tolerant)
  • 18 शीत सहनशील (Cold Tolerant)

किस्में शामिल हैं। इनका उद्देश्य बदलते जलवायु परिदृश्य में किसानों को स्थिर उत्पादन उपलब्ध कराना और खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाना है।

अनाज, दलहन और तिलहन पर विशेष ध्यान

राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा प्रणाली (NARES) के तहत विकसित फसल किस्मों में सर्वाधिक 1,574 किस्में अनाज फसलों की हैं, जिनमें से 1,453 जलवायु-अनुकूल हैं।

इसके अलावा—

  • 444 तिलहन किस्में (397 जलवायु-अनुकूल)
  • 473 दलहन किस्में (446 जलवायु-अनुकूल)
  • 207 चारा फसलें (185 जलवायु-अनुकूल)
  • 408 रेशा फसलें (392 जलवायु-अनुकूल)
  • 96 गन्ना किस्में
  • 34 अन्य फसल किस्में

विकसित की गई हैं।

आईसीएआर और कृषि विश्वविद्यालय निभा रहे अहम भूमिका

सरकार ने बताया कि देश में 56 आईसीएआर संस्थान, 48 राज्य कृषि विश्वविद्यालय, 3 केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय तथा 39 अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (AICRP) केंद्र मिलकर बेहतर फसल किस्मों के अनुसंधान और विकास में कार्य कर रहे हैं।

इन संस्थानों द्वारा उच्च उत्पादकता, जलवायु-अनुकूलता और पोषणयुक्त (Bio-fortified) किस्मों के विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन का मजबूत नेटवर्क

देशभर में गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने मजबूत संस्थागत ढांचा विकसित किया है।

वर्तमान में देश में—

  • 229 सीड हब (Seed Hubs)
  • 384 ब्रीडर सीड उत्पादन केंद्र
  • 17 राज्य बीज निगम
  • नेशनल सीड्स कॉरपोरेशन (NSC)

सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।

इसके अलावा भारतीय बीज सहकारी समिति (BBSSL), हिंदुस्तान इंसेक्टिसाइड्स लिमिटेड (HIL), नेफेड (NAFED), नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL), कृभको (KRIBHCO), आईएफएफडीसी (IFFDC) तथा निजी बीज कंपनियां भी गुणवत्तापूर्ण बीजों के उत्पादन और वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

178 बीज परीक्षण प्रयोगशालाएं कर रहीं गुणवत्ता की निगरानी

बीजों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए देशभर में 178 अधिसूचित बीज परीक्षण प्रयोगशालाएं (Seed Testing Laboratories) कार्यरत हैं।

सरकार इन प्रयोगशालाओं को मजबूत बनाने के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान कर रही है। इसमें अंतरराष्ट्रीय बीज परीक्षण संघ (ISTA) की सदस्यता, तकनीकी ऑडिट और अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त करने में भी सहयोग दिया जा रहा है।

SATHI पोर्टल से होगी बीजों की डिजिटल ट्रैकिंग

बीजों की गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सरकार ने SATHI (Seed Authentication, Traceability and Holistic Inventory) पोर्टल शुरू किया है।

इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बीज उत्पादन, प्रमाणीकरण, भंडारण, स्टॉक प्रबंधन और वितरण की पूरी प्रक्रिया की ऑनलाइन निगरानी की जा सकेगी। इससे नकली और घटिया बीजों की बिक्री पर रोक लगाने में भी मदद मिलेगी।

बीज आयात-निर्यात प्रक्रिया हुई आसान

सरकार ने बीज और पौध सामग्री के आयात-निर्यात को सरल बनाने के लिए प्रक्रियाओं में सुधार किया है। अक्टूबर 2024 में EXIM समिति समाप्त होने के बाद अब आयात और निर्यात की स्वीकृतियां डीजीएफटी (DGFT) के डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से दी जा रही हैं।

साथ ही पौध संगरोध (Plant Quarantine) और अन्य नियामकीय मानकों का पालन भी सुनिश्चित किया जा रहा है।

बीज निर्यात में लगातार बढ़ोतरी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत का बीज निर्यात लगातार बढ़ रहा है।

  • 2024-25 में भारत ने 92.06 हजार मीट्रिक टन बीजों का निर्यात किया, जिसकी कीमत 2,323.39 करोड़ रुपये रही।
  • 2025-26 में निर्यात बढ़कर 123.82 हजार मीट्रिक टन पहुंच गया और इसका मूल्य 3,023.16 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
  • 2026-27 में मई तक ही 18.46 हजार मीट्रिक टन बीजों का निर्यात हो चुका है, जिसकी कीमत 582.19 करोड़ रुपये रही।

यह बढ़ोतरी भारतीय बीज उद्योग की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाती है।

अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ बढ़ रहा सहयोग

भारत इंटरनेशनल ट्रीटी ऑन प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेज फॉर फूड एंड एग्रीकल्चर (ITPGRFA) का संस्थापक सदस्य है, जिससे भारतीय वैज्ञानिकों को वैश्विक जर्मप्लाज्म तक पहुंच मिलती है।

इसके अलावा सरकार IRRI, ICRISAT, CIMMYT, ICARDA और CIAT जैसे अंतरराष्ट्रीय कृषि अनुसंधान संस्थानों के साथ मिलकर जलवायु-अनुकूल बीज तकनीकों, अनुसंधान और ज्ञान के आदान-प्रदान पर काम कर रही है।

वाराणसी में आईआरआरआई दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (ISARC) पहले से कार्यरत है, जबकि अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (CIP) का दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थापित करने को भी मंजूरी दी जा चुकी है।

सार्वजनिक-निजी भागीदारी को मिला बढ़ावा

सरकार बीज क्षेत्र में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) को भी बढ़ावा दे रही है। इसके तहत आईसीएआर, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीय बीज निगम, राज्य बीज निगमों और निजी बीज कंपनियों के बीच सहयोग बढ़ाया जा रहा है।

पिछले तीन वर्षों (2023-24 से 2025-26) के दौरान 27 आईसीएआर संस्थानों ने बीज, फसल किस्मों और रोपण सामग्री के लिए 1,317 लाइसेंसिंग समझौते सार्वजनिक और निजी संस्थाओं के साथ किए हैं।

आधुनिक तकनीकों से तैयार हो रही नई किस्में

सरकार ने बताया कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और खाद्य सुरक्षा मजबूत करने के लिए मार्कर असिस्टेड सिलेक्शन (MAS), जीन एडिटिंग (Gene Editing) तथा स्पीड ब्रीडिंग (Speed Breeding) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ाया जा रहा है।

इन तकनीकों की मदद से कम समय में अधिक उत्पादक, जलवायु-अनुकूल और पोषणयुक्त फसल किस्में विकसित की जा रही हैं।

किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

सरकार का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण और जलवायु-अनुकूल बीजों की उपलब्धता से किसानों की उत्पादकता बढ़ेगी, उत्पादन लागत कम होगी और बदलती जलवायु परिस्थितियों में भी खेती अधिक सुरक्षित एवं लाभकारी बनेगी। अनुसंधान, आधुनिक तकनीक, मजबूत गुणवत्ता नियंत्रण, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से भारत का बीज क्षेत्र तेजी से आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

Tags: AgricultureFarming
Previous Post

प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को मिलेगी आर्थिक सहायता, प्रति एकड़ ₹4,000 तक प्रोत्साहन राशि

Next Post

पीएम कृषि सिंचाई योजना से सिंचाई क्षमता बढ़ाने पर जोर, राज्यों को मिल रही केंद्रीय सहायता

Next Post
तीन प्रमुख घटकों के तहत संचालित हो रही योजना

पीएम कृषि सिंचाई योजना से सिंचाई क्षमता बढ़ाने पर जोर, राज्यों को मिल रही केंद्रीय सहायता

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • Matsya Bima Yojana: मछली पालकों के लिए सुरक्षा कवच, जोखिम कम और आय बढ़ाने की बड़ी पहल
  • Pig Farming Scheme: किसानों की आय बढ़ाने का नया अवसर, जानिए कैसे बदल सकती है आपकी आर्थिक स्थिति
  • Exclusive Interview: किसानों की बदलती जरूरतों के अनुरूप समाधान विकसित करना हमारी प्राथमिकता: नवाब सिंह पवार
  • प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से उत्तर प्रदेश में मत्स्य पालन को मिला बढ़ावा, चंदौली के 229 किसानों को लाभ
  • डेयरी और पशुपालन क्षेत्र को नई मजबूती: बुनियादी ढांचे, डिजिटल सेवाओं और पशु स्वास्थ्य पर सरकार का बड़ा फोकस

Recent Comments

No comments to show.
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Subscribe Now

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.