केंद्र सरकार देश के डेयरी और पशुपालन क्षेत्र को अधिक आधुनिक, सशक्त और किसानों के लिए लाभकारी बनाने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने बताया कि सरकार डेयरी किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए डेयरी अवसंरचना के विस्तार, पशु चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने, डिजिटल पशुधन प्रबंधन और निवेश को प्रोत्साहन देने पर विशेष ध्यान दे रही है।
मंत्री ने विभिन्न प्रश्नों के उत्तर में सरकार की प्रमुख योजनाओं और पहलों की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि डेयरी क्षेत्र में उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और पशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए कई स्तरों पर कार्य किया जा रहा है।
दूध पर एमएसपी लागू करने का कोई प्रस्ताव नहीं
लोकसभा में दूध के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में राजीव रंजन सिंह ने स्पष्ट किया कि सरकार के पास दूध पर एमएसपी लागू करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।
उन्होंने बताया कि देश में दूध की कीमतें डेयरी सहकारी समितियां और निजी डेयरी कंपनियां बाजार की परिस्थितियों, मांग और आपूर्ति को ध्यान में रखते हुए तय करती हैं।
हालांकि मंत्री ने कहा कि सरकार डेयरी किसानों को अप्रत्यक्ष रूप से मजबूत बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है। इनके माध्यम से दूध की खरीद बढ़ाने, प्रसंस्करण क्षमता का विस्तार करने, गांव स्तर पर डेयरी सहकारी समितियों को मजबूत करने, दूध की गुणवत्ता जांच सुविधाओं में सुधार तथा आधुनिक डेयरी अवसंरचना विकसित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
एएचआईडीएफ से बढ़ रहा निवेश और किसानों की आय
मंत्री ने पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (Animal Husbandry Infrastructure Development Fund-AHIDF) की जानकारी देते हुए कहा कि यह योजना डेयरी प्रसंस्करण, मांस प्रसंस्करण, पशु आहार संयंत्रों और मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) से जुड़े उद्योगों में निवेश को बढ़ावा दे रही है।
उन्होंने बताया कि योजना के बारे में अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करने के लिए राज्य सरकारों, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) और विभिन्न उद्योग संगठनों के सहयोग से नियमित रूप से जागरूकता अभियान, प्रशिक्षण कार्यक्रम और हितधारकों की बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
सरकार का मानना है कि एएचआईडीएफ के तहत विकसित हो रही नई अवसंरचना से पशुपालकों को अपने उत्पादों के बेहतर बाजार मिल रहे हैं, जिससे उन्हें अधिक लाभकारी मूल्य प्राप्त हो रहा है और उनकी आय में वृद्धि हो रही है।
राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन से मिलेगा प्रत्येक पशु का डिजिटल रिकॉर्ड
सरकार ने राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन (National Digital Livestock Mission-NDLM) के तहत पशुधन प्रबंधन को डिजिटल बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
राजीव रंजन सिंह ने बताया कि इस मिशन के अंतर्गत पंजीकृत प्रत्येक पशु को 12 अंकों की एक विशिष्ट टैग आईडी (Unique Tag ID) प्रदान की जाती है।
इस डिजिटल पहचान के माध्यम से पशु के पूरे जीवनकाल में टीकाकरण, प्रजनन, उपचार, स्वास्थ्य परीक्षण और अन्य पशु चिकित्सा सेवाओं का ऑनलाइन रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाता है। इससे पशुओं की स्वास्थ्य निगरानी अधिक प्रभावी होगी और बीमारी नियंत्रण कार्यक्रमों को भी मजबूती मिलेगी।
पशुधन डेटा को मिलेगी उच्चस्तरीय सुरक्षा
मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन का पोर्टल आधुनिक साइबर सुरक्षा मानकों के अनुरूप विकसित किया गया है।
इसमें AES-256 एन्क्रिप्शन और ट्रांसपोर्ट लेयर सिक्योरिटी (TLS) जैसी तकनीकों का उपयोग किया गया है, जिससे पशुधन संबंधी डेटा को सरकारी स्तर की सुरक्षा प्राप्त होती है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में मोबाइल वेटरनरी यूनिट्स इस पोर्टल से एकीकृत नहीं हैं। इसके अलावा बैंकिंग एपीआई (API) को जोड़ने के संबंध में भी अभी तक कोई औपचारिक प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है।
डेयरी विकास योजनाओं से बढ़ेगा ग्रामीण रोजगार
लोकसभा में डेयरी विकास कार्यक्रमों से जुड़े प्रश्नों का उत्तर देते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार कई प्रमुख योजनाओं के माध्यम से दूध उत्पादन बढ़ाने, किसानों की आय में वृद्धि करने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए कार्य कर रही है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM), पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (LHDCP) तथा पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (AHIDF) जैसी योजनाएं उद्यमिता विकास, नस्ल सुधार, पशु रोग नियंत्रण, पशु चिकित्सा अवसंरचना और सस्ती पशु चिकित्सा दवाओं की उपलब्धता को बढ़ावा दे रही हैं।
इन योजनाओं के माध्यम से किसानों को आधुनिक पशुपालन अपनाने, उत्पादन लागत कम करने और बेहतर गुणवत्ता वाले डेयरी उत्पाद तैयार करने में सहायता मिल रही है।
महाराष्ट्र में 4,700 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं स्वीकृत
मंत्री ने जानकारी दी कि महाराष्ट्र में एएचआईडीएफ के अंतर्गत 113 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनकी कुल लागत 4,700.13 करोड़ रुपये है।
इन परियोजनाओं के लिए सरकार द्वारा 123.46 करोड़ रुपये की ब्याज अनुदान (Interest Subvention) सहायता भी जारी की जा चुकी है। इससे राज्य में डेयरी प्रसंस्करण, पशु आहार उत्पादन, कोल्ड चेन और अन्य आधुनिक सुविधाओं का तेजी से विकास हो रहा है।
पशुपालकों की आय बढ़ाने पर सरकार का फोकस
केंद्र सरकार का कहना है कि डेयरी और पशुपालन क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इसलिए सरकार इस क्षेत्र में आधुनिक अवसंरचना, डिजिटल तकनीक, बेहतर पशु स्वास्थ्य सेवाएं और निजी निवेश को बढ़ावा देकर किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
सरकार का विश्वास है कि इन पहलों से न केवल दूध उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि पशुपालकों को बेहतर बाजार, आधुनिक सुविधाएं और अधिक आय के अवसर भी प्राप्त होंगे, जिससे देश का डेयरी एवं पशुपालन क्षेत्र और अधिक सशक्त एवं आत्मनिर्भर बन सकेगा।

