खरीफ सीजन 2026 के दौरान किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए केंद्र सरकार लगातार निगरानी बनाए हुए है। इसी क्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में नई दिल्ली में उच्चस्तरीय साप्ताहिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में खरीफ फसलों की बुवाई, दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति, संभावित एल नीनो (El Niño) के प्रभाव, कम वर्षा वाले संवेदनशील जिलों की स्थिति, उर्वरकों और बीजों की उपलब्धता, जलाशयों में जल भंडारण तथा राज्यों के साथ समन्वय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा हुई है, वहां विशेष निगरानी रखी जाए और राज्य सरकारों के साथ लगातार समन्वय स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसानों तक समय पर उर्वरक और गुणवत्तापूर्ण बीज पहुंचना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा वितरण प्रणाली में कहीं भी कमी या बाधा दिखाई दे तो उसका तत्काल समाधान किया जाए।
देशभर में 658.19 लाख हेक्टेयर में हुई खरीफ फसलों की बुवाई
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार 17 जुलाई 2026 तक देश में खरीफ फसलों की कुल बुवाई 658.19 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दर्ज की गई है। हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में कुल बुवाई क्षेत्र में कुछ कमी देखी गई है, लेकिन कई राज्यों में धान, दलहन तथा अन्य खरीफ फसलों की बुवाई में सकारात्मक प्रगति दर्ज की गई है।
शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि दलहन, तिलहन और कपास मिशनों के अंतर्गत प्रत्येक सप्ताह राज्य सरकारों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की जाए। साथ ही, खेत स्तर से प्राप्त फीडबैक के आधार पर तत्काल निर्णय लेकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि उत्पादन पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
एल नीनो और मानसून की स्थिति पर विशेष समीक्षा
समीक्षा बैठक में भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी मौसम पूर्वानुमानों और संभावित एल नीनो की स्थिति का भी गहन विश्लेषण किया गया। अधिकारियों ने देश के 270 संवेदनशील जिलों की वर्षा स्थिति, फसलों की प्रगति तथा संभावित जोखिमों पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
बैठक में राज्यों में वर्षा की वर्तमान स्थिति, जहां सामान्य से कम या अधिक बारिश हुई है, वहां की कृषि परिस्थितियों का विश्लेषण किया गया। इसके साथ ही एनडीवीआई (Normalized Difference Vegetation Index – NDVI) जैसे वैज्ञानिक संकेतकों के आधार पर फसलों की सेहत और हरियाली का भी मूल्यांकन किया गया।
कृषि मंत्री ने कहा कि मौसम में लगातार बदलाव को देखते हुए वैज्ञानिक सलाह और वास्तविक परिस्थितियों के अनुसार कृषि प्रबंधन की रणनीति अपनाई जाए, ताकि किसानों को समय रहते उचित मार्गदर्शन मिल सके।
9 जुलाई तक पूरे देश में पहुंचा दक्षिण-पश्चिम मानसून
बैठक में जानकारी दी गई कि वर्ष 2026 में दक्षिण-पश्चिम मानसून 9 जुलाई तक पूरे देश में फैल गया। राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के शेष हिस्सों में मानसून की पहुंच के साथ पूरे देश में इसकी सक्रियता दर्ज की गई।
सामान्यतः मानसून 8 जुलाई तक पूरे देश को कवर कर लेता है, जबकि इस वर्ष यह प्रक्रिया केवल एक दिन की देरी से पूरी हुई। अधिकारियों ने बताया कि मानसून के पूरे देश में पहुंचने के बाद अधिकांश राज्यों में खरीफ फसलों की बुवाई के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन गई हैं और किसानों ने तेजी से बुवाई कार्य आगे बढ़ाया है।
सामान्य से 23 प्रतिशत कम रही वर्षा
बैठक में वर्षा के आंकड़ों की समीक्षा करते हुए बताया गया कि 1 जून से 15 जुलाई 2026 के दौरान देश में औसत वर्षा सामान्य से 23 प्रतिशत कम रही।
इस अवधि में पूरे देश में 227 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि सामान्य वर्षा 294.2 मिमी होनी चाहिए थी।
सबसे अधिक वर्षा की कमी पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में दर्ज की गई, जहां 540.2 मिमी के सामान्य आंकड़े के मुकाबले केवल 348 मिमी वर्षा हुई, अर्थात 36 प्रतिशत की कमी रही।
इसी प्रकार—
- दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में 26 प्रतिशत वर्षा की कमी,
- उत्तर-पश्चिम भारत में 19 प्रतिशत की कमी,
- जबकि मध्य भारत में 13 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई।
इन आंकड़ों को देखते हुए कृषि मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वर्षा की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है तथा राज्यों के सहयोग से आवश्यक कृषि प्रबंधन और आकस्मिक (Contingency) योजनाओं को लागू किया जा रहा है।
कम वर्षा वाले जिलों पर विशेष नजर रखने के निर्देश
केंद्रीय कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कम वर्षा वाले जिलों में कृषि गतिविधियों की निरंतर निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि जहां आवश्यकता हो, वहां वैकल्पिक फसलें, वैज्ञानिक सलाह, सिंचाई प्रबंधन और अन्य कृषि उपाय समय रहते किसानों तक पहुंचाए जाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकारों के साथ नियमित संवाद बनाए रखते हुए स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार त्वरित निर्णय लिए जाएं, ताकि मौसम की चुनौतियों का प्रभाव कृषि उत्पादन पर न्यूनतम रहे।
उर्वरक और बीजों की उपलब्धता पर सरकार की नजर
बैठक में खरीफ 2026 के लिए उर्वरकों, विशेष रूप से यूरिया, तथा बीजों की उपलब्धता की भी विस्तृत समीक्षा की गई।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि खरीफ सीजन के लिए आवश्यक मात्रा में उर्वरकों और प्रमाणित बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई है तथा राज्यों के साथ नियमित समन्वय के माध्यम से उनकी आपूर्ति की लगातार निगरानी की जा रही है।
केंद्रीय मंत्री ने निर्देश दिया कि केवल कागजी रिपोर्टों पर निर्भर रहने के बजाय कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) और राज्य सरकारों से वास्तविक स्थिति की जानकारी प्राप्त की जाए।
उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार समय पर उर्वरक उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि किसी क्षेत्र में वितरण प्रणाली में बाधा, कृत्रिम कमी या आपूर्ति संबंधी समस्या सामने आती है तो उसका तत्काल समाधान किया जाए ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
वैज्ञानिक सलाह और राज्यों के समन्वय पर दिया जोर
समीक्षा बैठक के अंत में शिवराज सिंह चौहान ने कृषि मंत्रालय के दोनों विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिया कि पूरे खरीफ सीजन के दौरान राज्यों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखा जाए।
उन्होंने कहा कि मौसम आधारित कृषि प्रबंधन, वैज्ञानिक सलाह, वास्तविक समय की निगरानी तथा केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों से ही किसानों को बेहतर सहायता प्रदान की जा सकती है।
उन्होंने अधिकारियों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि केंद्र सरकार की सभी कृषि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किसानों तक समय पर पहुंचे और जरूरत पड़ने पर स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार त्वरित निर्णय लिए जाएं।
किसानों के हितों की रक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध
बैठक के समापन पर केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के हितों की रक्षा, कृषि उत्पादन बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मानसून, एल नीनो, उर्वरकों की उपलब्धता या अन्य किसी भी चुनौती के बावजूद सरकार किसानों के साथ खड़ी है और वैज्ञानिक प्रबंधन, समयबद्ध आपूर्ति तथा प्रभावी निगरानी के माध्यम से खरीफ सीजन को सफल बनाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।

