देश में किसानों, कृषि जोतों और खेती की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए संचालित 11वीं कृषि जनगणना (2021-22) का फील्ड कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा कर लिया गया है। यह जनगणना वर्ष 2022 से शुरू हुई थी और अब इसके तीनों चरणों में डेटा संग्रहण का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है। कृषि जनगणना से प्राप्त आंकड़े केंद्र और राज्य सरकारों को कृषि नीतियां बनाने, भूमि उपयोग की बेहतर योजना तैयार करने तथा किसानों के लिए लक्षित योजनाएं लागू करने में महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेंगे।
भारत में कृषि जनगणना प्रत्येक पांच वर्ष के अंतराल पर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के सहयोग से आयोजित की जाती है। इसका उद्देश्य देश में कृषि जोतों की संख्या, आकार, स्वामित्व, सिंचाई, फसल प्रणाली, भूमि उपयोग और कृषि संसाधनों की वास्तविक स्थिति का व्यापक आकलन करना है।
तीन चरणों में हुआ डेटा संग्रह
कृषि जनगणना का फील्ड कार्य तीन अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाता है।
पहले चरण में देश की सभी कृषि जोतों का पूर्ण गणना (Complete Enumeration) के आधार पर सर्वेक्षण किया जाता है। इसमें कृषि जोतों की प्राथमिक विशेषताओं तथा संचालित भूमि क्षेत्र से संबंधित जानकारी एकत्र की जाती है।
दूसरे चरण में प्रत्येक तहसील के यादृच्छिक रूप से चुने गए 20 प्रतिशत नमूना गांवों से खेती के स्वरूप, फसल प्रणाली, सिंचाई की स्थिति तथा कृषि जोतों की अन्य विशेषताओं से जुड़ा विस्तृत डेटा एकत्र किया जाता है।
तीसरे चरण में प्रत्येक तहसील के 7 प्रतिशत चयनित नमूना गांवों में कृषि जोतों पर उर्वरकों, बीज, सिंचाई, मशीनरी और अन्य कृषि आदानों (Inputs) के उपयोग से संबंधित जानकारी संकलित की जाती है।
कृषि नीतियों के निर्माण में मिलेगी मदद
कृषि जनगणना से प्राप्त आंकड़े सरकार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन आंकड़ों के आधार पर कृषि क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का विश्लेषण कर नई योजनाएं और नीतियां तैयार की जाती हैं।
जनगणना से यह जानकारी मिलती है कि देश में सीमांत, लघु, अर्द्ध-मध्यम, मध्यम और बड़े किसानों की संख्या कितनी है तथा उनकी कृषि जोतों का आकार और वितरण कैसा है। इसके अलावा भूमि स्वामित्व, बटाई व्यवस्था (टेनेंसी), भूमि समेकन (Consolidation) और भूमि वितरण से संबंधित विस्तृत जानकारी भी उपलब्ध होती है।
भूमि उपयोग और सिंचाई योजनाओं को मिलेगा आधार
कृषि जनगणना के आंकड़े भूमि संसाधनों के बेहतर उपयोग, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल विविधीकरण, कृषि यंत्रीकरण तथा अन्य कृषि निवेशों की योजना बनाने में सहायक होंगे। इससे विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुसार योजनाएं तैयार करना आसान होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि विश्वसनीय आंकड़ों के आधार पर कृषि क्षेत्र में निवेश और संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकता है।
महिला किसानों पर भी रहेगा विशेष फोकस
कृषि जनगणना में महिला किसानों द्वारा संचालित कृषि जोतों का अलग से डेटा भी एकत्र किया जाता है। इससे महिला किसानों की वास्तविक भागीदारी का आकलन संभव होगा और उनके लिए विशेष कृषि योजनाएं एवं लैंगिक समानता (Gender-based) आधारित कार्यक्रम तैयार करने में सहायता मिलेगी।
सब्सिडी और ग्रामीण विकास योजनाओं में होगी उपयोगिता
कृषि जनगणना के आंकड़े सरकार को उर्वरक सब्सिडी, कृषि ऋण, सिंचाई योजनाओं, ग्रामीण विकास कार्यक्रमों तथा अन्य किसान हितैषी योजनाओं का लाभ सही पात्र किसानों तक पहुंचाने में मदद करेंगे। साथ ही राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर कृषि विकास की प्राथमिकताओं को निर्धारित करने में भी यह डेटा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
शोध और योजना निर्माण के लिए महत्वपूर्ण स्रोत
कृषि जनगणना से तैयार होने वाला डेटा शोधकर्ताओं, कृषि वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, योजनाकारों तथा अन्य संबंधित संस्थाओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण आधार बनेगा। इससे कृषि क्षेत्र में दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने तथा किसानों की आय में सुधार लाने के लिए प्रभावी निर्णय लेने में सहायता मिलेगी।
सरकार का मानना है कि कृषि जनगणना 2021-22 के आंकड़े भविष्य की कृषि नीतियों को अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और किसान-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे तथा कृषि क्षेत्र के समग्र विकास को नई दिशा प्रदान करेंगे।

