Exclusive interview: फसल क्रांति की पत्रकार फिज़ा काज़मी ने ADAMA India Private Limited के बिजनेस यूनिट हेड नवाब सिंह पवार से कृषि क्षेत्र में हो रहे बदलावों, कंपनी की नई रणनीतियों, आधुनिक तकनीकों और किसानों के सामने मौजूद चुनौतियों पर विशेष बातचीत की। इस दौरान उन्होंने बताया कि बदलते मौसम, बढ़ती लागत और नई कृषि चुनौतियों के बीच किसानों को बेहतर, प्रभावी और व्यावहारिक समाधान उपलब्ध कराना कंपनी की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश।
प्रश्न 1. ADAMA India Private Limited में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कौन-कौन से महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं?
नवाब सिंह पवार:
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय कृषि का स्वरूप तेजी से बदला है। जलवायु परिवर्तन, कीटों और रोगों के बदलते स्वरूप, श्रमिकों की कमी तथा खेती की बढ़ती लागत ने किसानों के सामने नई चुनौतियां खड़ी की हैं। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ADAMA India ने अपने उत्पादों और कार्यशैली दोनों में व्यापक बदलाव किए हैं।
पहले फसल सुरक्षा उत्पाद किसी एक कीट, रोग या खरपतवार के नियंत्रण तक सीमित रहते थे, लेकिन अब हमारा उद्देश्य किसानों को ऐसे समग्र समाधान देना है जो प्रभावी होने के साथ उपयोग में भी सरल हों। इसके लिए बेहतर फॉर्मुलेशन, मिश्रित उत्पाद, फसल आधारित समाधान और समय पर तकनीकी मार्गदर्शन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
किसानों तक पहुंचने के तरीकों में भी बदलाव आया है। हमारी मैदानी टीम, कृषि विशेषज्ञ, प्रदर्शन प्लॉट, किसान बैठकें और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों को उत्पादों के सुरक्षित एवं सही उपयोग की जानकारी दी जाती है। हमारा उद्देश्य केवल उत्पाद उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि किसानों की वास्तविक समस्याओं को समझकर उनका समाधान देना है।
हमारी कार्य संस्कृति का आधार “Listen, Learn and Deliver” है। यानी पहले किसान की बात सुनना, उसकी परिस्थितियों को समझना और फिर उसके अनुरूप उपयोगी समाधान उपलब्ध कराना। यही सोच ADAMA India की निरंतर प्रगति का आधार रही है।
प्रश्न 2. ADAMA के नए उत्पाद कौन-कौन से हैं और इन्हें किन किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है?
नवाब सिंह पवार:
ADAMA India देश की कई प्रमुख फसलों जैसे सोयाबीन, दलहन, गन्ना, सेब, गेहूं और धान के लिए व्यापक उत्पाद पोर्टफोलियो के साथ कार्य कर रही है। हाल ही में कंपनी ने विशेष रूप से गन्ना और धान की फसलों के लिए नए उत्पाद बाजार में उतारे हैं।
इसके अलावा कंपनी मृदा स्वास्थ्य सुधारने और पौधों की जड़ों के बेहतर विकास के लिए जैविक समाधानों पर भी लगातार काम कर रही है।
हमारे लिए केवल बड़े किसान ही नहीं, बल्कि छोटे और सीमांत किसान भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। इसलिए उत्पाद विकसित करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि वे प्रभावी होने के साथ किफायती, उपयोग में आसान और विभिन्न कृषि परिस्थितियों के अनुरूप हों।
हमारी मैदानी टीम किसानों से लगातार संवाद करती है और उनकी प्रतिक्रिया के आधार पर यह तय किया जाता है कि किस क्षेत्र और किस फसल के लिए किस प्रकार के समाधान की सबसे अधिक आवश्यकता है।
प्रश्न 3. इस वर्ष अल नीनो की स्थिति घोषित की गई है। इससे किसानों के सामने कौन-कौन सी चुनौतियां आ सकती हैं?
नवाब सिंह पवार:
अल नीनो का सबसे अधिक प्रभाव वर्षा के वितरण और तापमान पर पड़ सकता है। इसका मतलब यह नहीं कि हर क्षेत्र में बारिश कम होगी, बल्कि कई स्थानों पर मानसून अनियमित हो सकता है। कहीं लंबे समय तक सूखे जैसी स्थिति बन सकती है तो कहीं बहुत कम समय में अत्यधिक वर्षा हो सकती है।
ऐसी परिस्थितियों में सबसे बड़ी चुनौती बुआई के सही समय का चयन करना होता है। कई बार शुरुआती बारिश के बाद किसान बुआई कर देते हैं, लेकिन यदि उसके बाद लंबे समय तक वर्षा नहीं होती तो बीज अंकुरण और शुरुआती फसल विकास प्रभावित हो जाता है। इससे दोबारा बुआई करनी पड़ सकती है और खेती की लागत बढ़ जाती है।
इसके अलावा सिंचाई के पानी की उपलब्धता, मिट्टी में नमी बनाए रखना, उर्वरकों का संतुलित उपयोग और उपयुक्त फसल का चयन भी बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। अधिक तापमान से कुछ कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है, जबकि अचानक बढ़ी नमी से रोग फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए किसानों को मौसम आधारित निर्णय लेने की आवश्यकता है।
प्रश्न 4. कृषि क्षेत्र में बढ़ते तकनीकी आधुनिकीकरण को आप किस प्रकार देखते हैं? तकनीक आधारित उत्पाद विकसित करते समय किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?
नवाब सिंह पवार:
तकनीक भारतीय कृषि के भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ड्रोन, सेंसर, उपग्रह आधारित निगरानी, मोबाइल एप्लिकेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और प्रिसिजन फार्मिंग जैसी आधुनिक तकनीकें किसानों को सही समय पर बेहतर निर्णय लेने में मदद कर रही हैं।
इन तकनीकों के माध्यम से किसान यह जान सकता है कि फसल को कब सिंचाई की आवश्यकता है, किस स्थान पर पोषक तत्वों की कमी है और कहां कीट या रोग का प्रकोप शुरू हो रहा है। समय पर सही जानकारी मिलने से लागत कम करने, संसाधनों की बचत करने और उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ाने में सहायता मिलती है।
हालांकि केवल आधुनिक तकनीक विकसित कर लेना पर्याप्त नहीं है। उसे किसानों के लिए सरल, उपयोगी और आर्थिक रूप से व्यवहारिक बनाना भी जरूरी है। भारत में किसानों की जोत का आकार, भाषा, आर्थिक स्थिति और कृषि परिस्थितियां अलग-अलग हैं। इसलिए किसी भी तकनीक आधारित उत्पाद को विकसित करते समय इन सभी पहलुओं का ध्यान रखना पड़ता है।
सबसे बड़ी चुनौती प्रयोगशाला में विकसित तकनीक को खेत की वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप बनाना होती है। तापमान, मिट्टी, पानी, फसल और किसानों की कार्यशैली लगातार बदलती रहती है। इसलिए व्यापक परीक्षण के बाद ही किसी तकनीक या उत्पाद को किसानों तक पहुंचाया जाता है। हमारा मानना है कि तकनीक का उद्देश्य खेती को जटिल बनाना नहीं, बल्कि उसे अधिक सरल और प्रभावी बनाना होना चाहिए।
प्रश्न 5. फसल क्रांति के माध्यम से आप देश के किसान भाइयों को क्या संदेश देना चाहेंगे?
नवाब सिंह पवार:
आज खेती तेजी से बदल रही है। बदलते मौसम, बढ़ती उत्पादन लागत और नई चुनौतियों के बीच केवल पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। किसानों को अपने अनुभव के साथ-साथ नई वैज्ञानिक जानकारी और आधुनिक तकनीकों को भी अपनाना चाहिए।फसल का चयन करने से पहले अपने क्षेत्र की मिट्टी, पानी की उपलब्धता, मौसम और बाजार की मांग का आकलन अवश्य करें। बीज, उर्वरक और फसल सुरक्षा उत्पाद खरीदते समय केवल बड़े दावों पर भरोसा न करें, बल्कि प्रमाणित उत्पादों का ही चयन करें और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उनका उपयोग करें।
यदि फसल में किसी कीट या रोग के लक्षण दिखाई दें तो बिना सही पहचान किए दवा का छिड़काव न करें। सही उत्पाद, सही मात्रा, सही समय और सही विधि अपनाने से लागत कम होती है, फसल सुरक्षित रहती है और पर्यावरण पर भी अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता।
देश की खाद्य सुरक्षा और कृषि अर्थव्यवस्था किसानों की मेहनत पर आधारित है। ADAMA India किसानों की समस्याओं को समझने, उनसे सीखने और उन्हें सरल, प्रभावी तथा टिकाऊ समाधान उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

