भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के लिए यह दिन एक महत्वपूर्ण पड़ाव का प्रतीक है। ठीक एक वर्ष पूर्व, 21 अप्रैल 2025 को डॉ. एम. एल. जाट ने सचिव (डीएआरई) एवं महानिदेशक, आईसीएआर के रूप में पदभार संभाला था। उनके नेतृत्व में बीते एक वर्ष ने न केवल संस्थागत कार्यप्रणाली को गति दी, बल्कि भारतीय कृषि अनुसंधान और नवाचार को एक नई दिशा भी प्रदान की है।
डॉ. जाट के कार्यकाल का प्रमुख फोकस अनुसंधान को अधिक प्रभावी, परिणामोन्मुखी और किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना रहा है। उन्होंने वैज्ञानिक खोजों को खेत तक पहुंचाने की प्रक्रिया को तेज करने पर विशेष जोर दिया। इसके परिणामस्वरूप कई नई तकनीकों, उन्नत बीजों और टिकाऊ खेती के मॉडल्स का तेजी से प्रसार हुआ है, जिससे किसानों की उत्पादकता और आय में सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।
आईसीएआर के अंतर्गत अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए भी व्यापक प्रयास किए गए। संस्थानों के बीच समन्वय बढ़ाया गया, नई साझेदारियां विकसित की गईं और निजी क्षेत्र के साथ सहयोग को प्रोत्साहित किया गया। इस एकीकृत दृष्टिकोण ने कृषि अनुसंधान को अधिक व्यावहारिक और बाजार उन्मुख बनाने में मदद की है।
डॉ. जाट के नेतृत्व में “लास्ट-माइल डिलीवरी” यानी अंतिम छोर तक तकनीक और सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) की भूमिका को सशक्त किया गया, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से सलाहकार सेवाओं को बढ़ावा दिया गया और किसानों को वास्तविक समय में जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। इससे छोटे और सीमांत किसानों को भी आधुनिक कृषि तकनीकों का लाभ मिल रहा है।
सतत कृषि (Sustainable Agriculture) के क्षेत्र में भी आईसीएआर ने उल्लेखनीय पहल की है। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य सुधार, जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने जैसे कदम उठाए गए हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य न केवल उत्पादन बढ़ाना है, बल्कि कृषि को पर्यावरण के अनुकूल और दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाना भी है।
नीति सुधारों के क्षेत्र में भी आईसीएआर ने सक्रिय भूमिका निभाई है। वैज्ञानिक शोध के आधार पर तैयार की गई सिफारिशों को नीति निर्माण में शामिल किया गया, जिससे कृषि क्षेत्र में संरचनात्मक सुधारों को गति मिली है। इससे किसानों के लिए बेहतर बाजार अवसर, मूल्य समर्थन और जोखिम प्रबंधन की संभावनाएं बढ़ी हैं।
डॉ. जाट ने अपने एक वर्ष के कार्यकाल पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धियां आईसीएआर के वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और हितधारकों की सामूहिक प्रतिबद्धता का परिणाम हैं। उन्होंने भविष्य के लिए भी सहयोग, नवाचार और विज्ञान-आधारित विकास को प्राथमिकता देने की बात कही।
आगे की दिशा में आईसीएआर का लक्ष्य भारतीय कृषि को अधिक लचीला, समावेशी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप बनाना है। विज्ञान और तकनीक के समन्वय से न केवल किसानों की समृद्धि सुनिश्चित की जाएगी, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और आर्थिक विकास को भी मजबूती मिलेगी।
इस एक वर्ष की उपलब्धियां यह स्पष्ट करती हैं कि मजबूत नेतृत्व, स्पष्ट दृष्टि और समर्पित प्रयासों के साथ भारतीय कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव संभव है। आईसीएआर की यह परिवर्तनकारी यात्रा आने वाले वर्षों में और भी प्रभावशाली परिणाम देने की दिशा में अग्रसर है।

