मध्य प्रदेश के रायसेन में 11 से 13 अप्रैल तक आयोजित होने जा रहा राष्ट्रीय स्तर का ‘उन्नत कृषि महोत्सव’ अब पूरी तरह तैयार है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस महोत्सव को देश की खेती की सूरत बदलने वाला बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल एक मेला नहीं, बल्कि किसानों के लिए आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक खेती का व्यावहारिक प्रशिक्षण मंच है।
मंत्री ने बताया कि Narendra Modi के नेतृत्व में सरकार का मुख्य लक्ष्य देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, किसानों की आय बढ़ाना और 140 करोड़ से अधिक आबादी तक पोषणयुक्त आहार पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि देश की लगभग 46 प्रतिशत आबादी खेती पर निर्भर है, इसलिए कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
श्री चौहान ने स्पष्ट किया कि अब केवल अनाज उत्पादन बढ़ाना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि फसल विविधीकरण के माध्यम से दाल, तिलहन, फल, सब्जियां और दुग्ध उत्पादन को भी बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि गेहूं और धान में देश आत्मनिर्भर है, लेकिन दलहन और तिलहन में अभी भी आयात पर निर्भरता बनी हुई है। ऐसे में इन फसलों की उत्पादकता और क्षेत्र विस्तार पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
छोटी जोत की चुनौती पर उन्होंने कहा कि भारत में औसत कृषि जोत 1 हेक्टेयर से भी कम रह गई है, जिससे किसानों की आय बढ़ाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। इसका समाधान ‘इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम’ के रूप में सामने आया है, जिसमें एक ही खेत में फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मछली पालन और कृषि वानिकी जैसी गतिविधियों को जोड़ा जाता है। इससे किसानों की आय के कई स्रोत विकसित होते हैं और जोखिम भी कम होता है।
महोत्सव की खासियत बताते हुए उन्होंने कहा कि इसमें 20 तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनके लिए चार अलग-अलग हॉल बनाए गए हैं। इन सत्रों में कृषि मशीनीकरण, प्राकृतिक खेती, पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन, एआई आधारित समाधान, दलहन-तिलहन उत्पादन, बागवानी और उच्च मूल्य की फसलों जैसे विषय शामिल होंगे। हर सत्र में विशेषज्ञों के साथ उन्नत किसान भी अपने अनुभव साझा करेंगे और किसानों के सवालों का समाधान करेंगे।
इसके साथ ही महोत्सव में लाइव डेमोंस्ट्रेशन भी आयोजित किए जाएंगे, जिनमें आधुनिक कृषि उपकरणों और तकनीकों का प्रदर्शन होगा। रीपर, पावर वीडर, सीडर, स्प्रेयर, रोटावेटर और कृषि ड्रोन जैसी मशीनों के उपयोग को किसानों के सामने प्रदर्शित किया जाएगा। माइक्रो इरिगेशन, सोलर पंपिंग, फर्टिगेशन और प्रिसिजन फार्मिंग के मॉडल भी दिखाए जाएंगे, ताकि किसान नई तकनीकों को आसानी से समझ सकें।
श्री चौहान ने ‘लैब टू लैंड’ की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि अब वैज्ञानिक शोध को सीधे खेतों तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए देश को विभिन्न एग्रो-क्लाइमेटिक जोन में बांटकर रीजनल कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही हैं, जिससे क्षेत्र विशेष के अनुसार खेती की रणनीति तैयार की जा सके।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के प्रयासों पर उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य लाखों किसानों को इस पद्धति से जोड़ना है। अभी तक करीब 18 लाख किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं और 8 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इसका विस्तार हुआ है। इससे लागत में कमी और पर्यावरण संरक्षण दोनों संभव हैं।
फर्टिलाइज़र सब्सिडी पर उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि के बावजूद सरकार किसानों को यूरिया और डीएपी सस्ती दरों पर उपलब्ध करा रही है। इसके लिए अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया गया है, ताकि किसानों पर आर्थिक बोझ न पड़े। साथ ही, फार्मर आईडी के माध्यम से खाद वितरण में पारदर्शिता और नियंत्रण सुनिश्चित किया जाएगा।
मंत्री ने किसानों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस महोत्सव में भाग लें, नई तकनीकों को समझें और अपने खेतों में अपनाएं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह महोत्सव देश में कृषि के आधुनिकीकरण और किसानों की समृद्धि की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगा।

