उत्तर प्रदेश सरकार गन्ना किसानों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। किसानों को बेहतर पैदावार और अधिक आय सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार “सीड ट्रेस एंड ट्रैक” मोबाइल ऐप लॉन्च करने की तैयारी में है। इस ऐप के जरिए गन्ने के बीज को शोध केंद्र से लेकर किसान के खेत तक हर चरण में ट्रैक किया जा सकेगा। इससे बीज की गुणवत्ता, वितरण और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
गन्ना विकास और चीनी उद्योग विभाग द्वारा विकसित इस ऐप का उद्देश्य किसानों तक उच्च गुणवत्ता वाला बीज समय पर पहुंचाना है। एडिशनल केन कमिश्नर वीके शुक्ला के अनुसार, उत्तर प्रदेश देश का प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य है, इसलिए किसानों को आधुनिक सुविधाएं देना सरकार की प्राथमिकता है। इस डिजिटल पहल से न केवल बीज की गुणवत्ता सुधरेगी बल्कि उत्पादन और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।
इस नई व्यवस्था में बीज की पूरी यात्रा डिजिटल रूप से रिकॉर्ड होगी—बीज कहां से निकला, किन-किन चरणों से गुजरा और आखिर में किस किसान को मिला, इसकी पूरी जानकारी ऐप पर उपलब्ध रहेगी। इससे बीज की कालाबाजारी पर भी रोक लगेगी और किसानों को भरोसेमंद बीज मिल सकेगा।
वर्तमान में गन्ने का बीज किसानों तक पहुंचने में तीन से चार चरणों से गुजरता है। पहले यह शोध केंद्र से निकलता है, फिर गन्ना विकास परिषद के आधार बीज केंद्र तक पहुंचता है। इसके बाद यह प्राथमिक बीज उत्पादन नर्सरी में जाता है और अंत में किसानों को वितरित किया जाता है। इतने चरणों में पहले ट्रैकिंग संभव नहीं थी, लेकिन अब यह काम मोबाइल ऐप के जरिए आसान हो जाएगा।
इस ऐप की एक खास सुविधा यह भी होगी कि किसान खुद अपने मोबाइल से बीज की उपलब्धता देख सकेंगे और जरूरत के अनुसार डिमांड भी भेज सकेंगे। इसके आधार पर संबंधित विभाग और गन्ना पर्यवेक्षक मांग के अनुसार आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे। इससे वितरण प्रक्रिया तेज और व्यवस्थित होगी।
इसके अलावा, जिन किसानों को बीज मिलेगा, उनका पूरा डेटा भी ऐप में सुरक्षित रहेगा। इससे भविष्य में उत्पादन का विश्लेषण करना और बेहतर किस्मों का चयन करना आसान होगा। सरकार को यह समझने में मदद मिलेगी कि कौन-सी गन्ना वैरायटी बेहतर उत्पादन दे रही है और उसी के आधार पर आगे की रणनीति बनाई जा सकेगी।
यह ऐप उत्तर प्रदेश रिमोट सेंसिंग एप्लिकेशन सेंटर और गुजरात के भास्कराचार्य नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लिकेशन एंड जियो-इंफॉर्मेटिक्स (BISAG-N) के सहयोग से तैयार किया जा रहा है। खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट पर विभाग का कोई अतिरिक्त खर्च नहीं हो रहा, बल्कि इसे पीएम गति शक्ति योजना के तहत विकसित किया जा रहा है।
फिलहाल ऐप की टेस्टिंग जारी है और अगले एक से दो महीने में इसे लॉन्च किया जा सकता है। सरकार को उम्मीद है कि इस डिजिटल पहल से गन्ना किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा और राज्य में कृषि क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी।

