केंद्र सरकार ने बच्चों और महिलाओं के पोषण व प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने के लिए सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 योजना के तहत बड़े स्तर पर सुधार किए हैं। इस योजना के अंतर्गत अब लाभार्थियों को एकीकृत रूप में छह प्रमुख सेवाएं—पूरक पोषण, प्री-स्कूल शिक्षा, पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा, टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच और रेफरल सेवाएं—एक ही प्लेटफॉर्म के जरिए उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सरकार ने देशभर में अब तक 1,03,940 आंगनवाड़ी केंद्रों को ‘सक्षम आंगनवाड़ी केंद्रों’ के रूप में अपग्रेड किया है। इन केंद्रों पर बच्चों को बेहतर पोषण के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा (ECCE) उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इस मिशन के तहत ‘पोषण भी पढ़ाई भी’ पहल की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों के समग्र विकास को सुनिश्चित करना है। इसके तहत केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं, खेल सामग्री और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से लैस किया जा रहा है, साथ ही आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। अब तक 10.58 लाख से अधिक कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
पोषण 2.0 के तहत कुपोषण को कम करने के लिए नई रणनीति अपनाई गई है, जिसमें सामुदायिक भागीदारी, जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन पर जोर दिया गया है। यह रणनीति मातृ पोषण, शिशु आहार और एनीमिया, स्टंटिंग, वेस्टिंग जैसी समस्याओं को कम करने पर केंद्रित है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत निर्धारित मानकों के अनुसार बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों को संतुलित और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जा रहा है। संशोधित पोषण मानकों में प्रोटीन, विटामिन और सूक्ष्म पोषक तत्वों को शामिल करते हुए आहार की गुणवत्ता को बेहतर बनाया गया है।
डिजिटल मॉनिटरिंग को मजबूत करने के लिए सरकार ने ‘पोषण ट्रैकर’ प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जिसके जरिए आंगनवाड़ी केंद्रों, कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों की रियल-टाइम निगरानी की जा रही है। इस सिस्टम में फेशियल रिकग्निशन और स्मार्टफोन आधारित डेटा एंट्री जैसी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं, जिससे पारदर्शिता और सटीकता बढ़ी है।
इसके अलावा, बच्चों की ग्रोथ मॉनिटरिंग के लिए सभी केंद्रों पर उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं और शिक्षण प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए सैकड़ों डिजिटल लर्निंग कंटेंट भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
सरकार का मानना है कि इस मिशन के जरिए देश में कुपोषण की समस्या को कम करने के साथ-साथ बच्चों के शुरुआती विकास और शिक्षा को भी नई मजबूती मिलेगी।

