नई दिल्ली। कृषि विज्ञान केंद्र उजवा दिल्ली द्वारा आयोजित 10 दिवसीय वैज्ञानिक बकरी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन किया गया। यह प्रशिक्षण 6 से 16 अप्रैल 2026 तक चला, जिसमें विभिन्न राज्यों के प्रतिभागियों ने भाग लेकर आधुनिक बकरी पालन तकनीकों की जानकारी हासिल की।
कार्यक्रम की शुरुआत में केंद्र के अध्यक्ष डॉ. डी. के. राणा ने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए बकरी पालन कम लागत में अधिक लाभ देने वाला व्यवसाय है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण युवा इस व्यवसाय के माध्यम से स्वरोजगार प्राप्त कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र किसानों और युवाओं को डेयरी, मुर्गी पालन और अन्य कृषि आधारित उद्यमों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
प्रशिक्षण के दौरान पशुपालन विशेषज्ञ डॉ. जय प्रकाश ने प्रतिभागियों को बकरियों की उन्नत नस्लों, उपयुक्त जलवायु, संतुलित चारा प्रबंधन, रोगों की पहचान और रोकथाम, आवासीय व्यवस्था तथा स्वास्थ्य प्रबंधन के बारे में विस्तृत जानकारी दी। वहीं केवीके हनुमानगढ़ के डॉ. मुकेश ने वर्चुअल माध्यम से नवजात मेमनों की देखभाल और प्रसव पूर्व एवं पश्चात प्रबंधन पर व्याख्यान दिया।
इसके अलावा केवीके नोहर के डॉ. विक्रमजीत ने बकरी पालन व्यवसाय शुरू करते समय आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान बताए। उन्होंने सरकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए प्रतिभागियों को इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। केवीके सिरसा के डॉ. हरदीप कलकल ने व्यवसायिक बकरी पालन में रिकॉर्ड प्रबंधन और परजीवी रोग नियंत्रण के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में सी.एस.डब्ल्यू.आर.आई. अविकानगर के वैज्ञानिक डॉ. अरविंद सोनी ने बकरी के दूध और मांस से बनने वाले विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पादों की जानकारी दी और किसानों की आय बढ़ाने में नई तकनीकों की भूमिका बताई।
इस प्रशिक्षण में दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान से 27 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के अंत में मूल्यांकन के बाद सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. ऋतू सिंह, श्री राकेश कुमार, डॉ. समर पाल सिंह और श्री बृजेश कुमार का विशेष योगदान रहा।

