उत्तर प्रदेश दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। इसी उपलब्धि को रेखांकित करते हुए राज्य के दुग्धशाला विकास विभाग ने अपने स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने पर ‘दुग्ध स्वर्ण महोत्सव 2026’ का भव्य आयोजन किया। लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम का समापन बड़े उत्साह के साथ हुआ, जिसमें प्रदेशभर से पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों और निवेशकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भेजे गए शुभकामना संदेश को पढ़कर सुनाया गया। अपने संदेश में उन्होंने दुग्ध विकास को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए इस क्षेत्र में निरंतर नवाचार और निवेश पर जोर दिया।
महोत्सव में लगभग 10 हजार प्रतिभागियों ने प्रत्यक्ष रूप से हिस्सा लिया, जबकि लाखों लोग वेबकास्टिंग के माध्यम से इससे जुड़े। समापन दिवस पर विशेषज्ञों ने ‘स्वदेशी नस्ल के गौ-पालन’ और ‘नवीनतम डेयरी टेक्नोलॉजी’ जैसे अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा की। इन चर्चाओं का उद्देश्य प्रदेश को दुग्ध उत्पादन में देश के अग्रणी राज्य के रूप में बनाए रखना है।
कार्यक्रम के दौरान अपर प्रमुख सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने स्वदेशी नस्ल के पशुपालन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह न केवल दूध उत्पादन बढ़ाने में सहायक है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देता है। वहीं दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के. ने राज्य सरकार की योजनाओं और प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश का डेयरी सेक्टर आज सकल मूल्यवर्धन में ₹1.72 लाख करोड़ का योगदान दे रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि ‘नंद बाबा दुग्ध मिशन’ के तहत अब तक 10 हजार से अधिक लाभार्थियों को ₹84 करोड़ की धनराशि सीधे डीबीटी के माध्यम से दी जा चुकी है। इससे छोटे और मध्यम स्तर के पशुपालकों को आर्थिक मजबूती मिली है।
निवेश के मोर्चे पर भी प्रदेश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अब तक ₹25 हजार करोड़ से अधिक के 796 एमओयू साइन किए जा चुके हैं, जिनसे लगभग 60 हजार रोजगार सृजित होने की संभावना है। ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी 5.0 के तहत ₹2 हजार करोड़ की 72 परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं। महोत्सव के दौरान ₹3 हजार करोड़ से अधिक के 59 नए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए, जिनमें आनन्दा, ज्ञान और परम डेयरी जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। इनसे करीब 13 हजार नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
इसके अलावा प्रदेश में 4 हजार से अधिक नई दुग्ध सहकारी समितियां गठित की गई हैं, जिससे करीब 1.50 लाख दुग्ध उत्पादकों को सीधा या परोक्ष लाभ मिला है। कार्यक्रम में कई सफल दुग्ध उत्पादकों ने अपनी प्रेरणादायक कहानियां साझा कीं, जिससे अन्य किसानों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली।
कुल मिलाकर ‘दुग्ध स्वर्ण महोत्सव 2026’ ने यह साबित कर दिया कि उत्तर प्रदेश न केवल कृषि बल्कि डेयरी क्षेत्र में भी देश की अगुवाई कर रहा है और आने वाले समय में यह क्षेत्र ग्रामीण समृद्धि का बड़ा आधार बनेगा।

