भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत कार्यरत भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. भूपेंद्र कुमार को मक्का हाइब्रिड अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रतिष्ठित डॉ. एस. के. वासल अवार्ड 2025 से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार ट्रस्ट फॉर एडवांसमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज द्वारा 13 मार्च 2026 को राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर, नई दिल्ली में आयोजित समारोह में प्रदान किया गया।
डॉ. भूपेंद्र कुमार ने मक्का अनुसंधान में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करते हुए अब तक 39 सिंगल-क्रॉस मक्का हाइब्रिड विकसित किए हैं, जिनमें से 12 हाइब्रिड 32 निजी बीज कंपनियों को लाइसेंस किए जा चुके हैं। उनके द्वारा लीड ब्रीडर के रूप में विकसित हाइब्रिड्स ने पिछले छह वर्षों से लगातार भारत सरकार के कृषि विभाग में ब्रीडर सीड की मांग में पहला स्थान प्राप्त किया है।
विशेष रूप से उनके दो प्रमुख हाइब्रिड—DMRH 1301 और DMRH 1308—को 25 बीज कंपनियों द्वारा व्यापक रूप से व्यावसायिक रूप दिया गया है। इन हाइब्रिड्स ने पिछले 9 वर्षों में लगभग 3,000 करोड़ रुपये का आर्थिक लाभ उत्पन्न किया है, जो देश के कृषि क्षेत्र में उनकी उपयोगिता और प्रभाव को दर्शाता है।
डॉ. कुमार का शोध कार्य डीएनए मार्कर आधारित तकनीकों के उपयोग पर केंद्रित है, जिसके माध्यम से मक्का फसल में जैविक (biotic) और अजैविक (abiotic) तनावों के प्रति सहनशीलता विकसित की जाती है। उन्होंने अब तक 70 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं और पिछले 15 वर्षों में कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त किए हैं।
यह सम्मान समारोह देश के प्रमुख कृषि वैज्ञानिकों और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में आयोजित हुआ, जिनमें डॉ. रमेश चंद, डॉ. आर. एस. परोड़ा, डॉ. एस. के. वासल और डॉ. एम. एल. जाट शामिल रहे।
यह पुरस्कार कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रदान किया जाता है। डॉ. भूपेंद्र कुमार की यह उपलब्धि न केवल लुधियाना बल्कि पूरे देश के कृषि वैज्ञानिक समुदाय के लिए गर्व का विषय है।

