रबी और खरीफ सीजन के बीच आने वाला ज़ायद सीजन अब किसानों के लिए अतिरिक्त आय का बड़ा अवसर बनकर उभर रहा है। मार्च से जून के बीच उगाई जाने वाली ये अल्पावधि (60–90 दिन) की फसलें न केवल खाली पड़ी जमीन का बेहतर उपयोग करती हैं, बल्कि कम समय में अच्छा मुनाफा भी देती हैं। यह जानकारी CropLife India द्वारा जारी एडवाइजरी में दी गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, तरबूज, खरबूज, खीरा, लौकी, करेला जैसी सब्जियां और फल ज़ायद सीजन में प्रमुख रूप से उगाए जाते हैं। इसके अलावा मूंग, उड़द और चारा फसलें भी इस अवधि में किसानों को अतिरिक्त आय दिलाने में मदद करती हैं। गर्मियों में इन फसलों की बाजार में अधिक मांग होने के कारण किसानों को बेहतर कीमत मिलती है।
ज़ायद खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह किसानों को रबी और खरीफ के बीच खाली समय में भी उत्पादन और आय का मौका देती है। साथ ही, रबी फसल के बाद खेत में बची नमी का उपयोग कर पानी की बचत भी की जा सकती है।
कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि ज़ायद फसलों की सफलता के लिए समय पर बुवाई बेहद जरूरी है। मार्च में बुवाई करने से फसल जून तक तैयार हो जाती है और मानसून के प्रभाव से बचाव होता है। देर से बुवाई करने पर उत्पादन में गिरावट आ सकती है।
गर्मी के मौसम में पानी की कमी एक बड़ी चुनौती होती है, इसलिए सिंचाई प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। हर 5–7 दिन में सिंचाई करना आवश्यक होता है, जबकि ड्रिप इरिगेशन तकनीक अपनाने से पानी की बचत के साथ बेहतर उत्पादन संभव है।
इसके अलावा, मल्चिंग तकनीक का उपयोग भी किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है। प्लास्टिक या जैविक मल्च मिट्टी की नमी को बनाए रखने, खरपतवार नियंत्रण और तापमान संतुलन में मदद करता है।
कीट और रोग प्रबंधन भी ज़ायद खेती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गर्मी के कारण कीट तेजी से बढ़ते हैं, इसलिए समय-समय पर निगरानी और उचित नियंत्रण उपाय अपनाना जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान उन्नत और गर्मी सहनशील किस्मों का चयन करें, समय पर बुवाई करें और आधुनिक तकनीकों का उपयोग करें, तो ज़ायद फसलें उनकी आय को दोगुना करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
कुल मिलाकर, ज़ायद सीजन किसानों के लिए “कम समय में अधिक लाभ” का सुनहरा अवसर है, जो न केवल उनकी आय बढ़ाने में मदद करता है, बल्कि कृषि उत्पादन को भी निरंतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

