देश की प्रमुख स्वास्थ्य योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) ने पुणे में दो-दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन किया। इस शिविर में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के कार्यान्वयन की समीक्षा के साथ-साथ उसे तेज और मजबूत बनाने पर गहन चर्चा की गई।
इस आयोजन में केंद्र और विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया, जहां इन योजनाओं की प्रगति का मूल्यांकन किया गया और भविष्य के लिए एक मजबूत रोडमैप तैयार करने पर विचार-विमर्श हुआ। उद्घाटन सत्र को महाराष्ट्र सरकार की सार्वजनिक स्वास्थ्य राज्यमंत्री मेघना सकोरे-बोर्डीकर ने संबोधित किया। उन्होंने निवारक, समावेशी और तकनीक-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर देते हुए कहा कि भविष्य की स्वास्थ्य प्रणाली जागरूकता, रोकथाम और डिजिटल तकनीकों पर आधारित होगी।
चिंतन शिविर के पहले दिन कई महत्वपूर्ण पहलें सामने आईं। NHA ने AB PM-JAY के कार्यान्वयन को सुव्यवस्थित करने के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए। साथ ही, स्वास्थ्य दावों की प्रक्रिया को सरल और एकीकृत बनाने के लिए नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज (NHCX) की रणनीति पेश की गई। इसके अलावा, राज्यों में ABDM के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए ABDM इंडेक्स भी लॉन्च किया गया।
स्वास्थ्य क्षेत्र में क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के लिए NHA डिजिटल हेल्थ अकादमी की शुरुआत की गई, जिसका उद्देश्य भविष्य की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यबल तैयार करना है। इसके साथ ही प्रशिक्षण और अनुसंधान को मजबूत करने के लिए विभिन्न संस्थानों के साथ समझौते भी किए गए।
चर्चा के दौरान NHA के सीईओ डॉ. सुनील कुमार बर्नवाल ने स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल प्लेटफॉर्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से दावों का स्वतः निपटान, डेटा विश्लेषण और रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव हो रही है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता में सुधार हो रहा है।
शिविर में AB PM-JAY के तहत उपलब्धियों की डेटा-आधारित समीक्षा भी प्रस्तुत की गई। इस दौरान आयुष्मान ऐप और व्हाट्सएप चैटबॉट जैसे डिजिटल माध्यमों का प्रदर्शन किया गया, जिससे लाभार्थियों के लिए सेवाओं तक पहुंच और आसान हो गई है।
वहीं ABDM के संदर्भ में, केवल जागरूकता तक सीमित न रहकर इसके व्यापक उपयोग और गहन एकीकरण पर जोर दिया गया। राज्यों ने अपने अनुभव साझा करते हुए डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में हो रही प्रगति को रेखांकित किया।
विशेष रूप से नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज (NHCX) को स्वास्थ्य दावों की प्रणाली में एक परिवर्तनकारी सुधार के रूप में प्रस्तुत किया गया। इससे दावों के निपटान में तेजी, पारदर्शिता और मानकीकरण सुनिश्चित होगा। इसके साथ ही ‘सही’ और ‘बोध’ जैसी पहलों को ABDM के अगले चरण के लिए महत्वपूर्ण माना गया।
शिविर में वित्तीय प्रबंधन पर भी चर्चा हुई, जिसमें समय पर फंड जारी करने, उसके सही उपयोग और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
यह चिंतन शिविर राज्यों और केंद्र के बीच सहयोग को मजबूत करने का एक अहम मंच साबित हुआ, जहां सर्वोत्तम प्रथाओं और नवाचारों को साझा किया गया। इस पहल से देश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच दोनों में सुधार होने की उम्मीद है, जो “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

