LPG Price Hike: देश में महंगाई एक बार फिर आम लोगों की चिंता बढ़ाने लगी है। पेट्रोल, डीजल, खाद्य पदार्थों और बिजली के बाद अब रसोई गैस यानी LPG सिलेंडर की बढ़ती कीमतों ने घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। जनवरी 2026 से अब तक LPG सिलेंडर के दामों में कई बार बढ़ोतरी की जा चुकी है। हालिया मूल्य वृद्धि के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि पिछले पांच महीनों में गैस सिलेंडर की कीमतों में सात बार इजाफा किया गया है, जिससे उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में उतार-चढ़ाव, डॉलर की मजबूती और परिवहन लागत बढ़ने के कारण घरेलू बाजार में LPG महंगी हुई है। इसका असर शहरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक देखने को मिल रहा है।
जनवरी से अब तक लगातार बढ़ी कीमतें
साल 2026 की शुरुआत से ही LPG सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है। तेल विपणन कंपनियों ने अलग-अलग समय पर कीमतों में संशोधन करते हुए उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार डाला है। हर बार बढ़ोतरी भले ही कुछ रुपये की रही हो, लेकिन लगातार हुए संशोधनों ने कुल लागत को काफी बढ़ा दिया है।
जनवरी में जहां घरेलू गैस सिलेंडर अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध था, वहीं मई और जून तक पहुंचते-पहुंचते इसकी कीमत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कई शहरों में उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में काफी अधिक राशि चुकानी पड़ रही है।
रसोई का बजट हुआ प्रभावित
LPG सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे अधिक असर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है। पहले जहां एक परिवार महीने में एक सिलेंडर का उपयोग करके बजट संतुलित रख लेता था, वहीं अब गैस की बढ़ती कीमतों के कारण घरेलू खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है। गृहिणियों का कहना है कि खाद्य तेल, सब्जियां, दूध और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें पहले से ही ऊंचे स्तर पर हैं। ऐसे में गैस सिलेंडर का महंगा होना रसोई के खर्च को और बढ़ा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी बढ़ी चिंता
ग्रामीण भारत में उज्ज्वला योजना के तहत करोड़ों परिवारों को LPG कनेक्शन उपलब्ध कराया गया था। हालांकि लगातार बढ़ती कीमतों के कारण कई परिवारों के लिए सिलेंडर रिफिल कराना चुनौती बनता जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों के कई उपभोक्ता मानते हैं कि गैस की कीमतें बढ़ने से वे फिर से पारंपरिक ईंधनों जैसे लकड़ी और उपलों की ओर लौटने को मजबूर हो सकते हैं। इससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की सरकारी कोशिशों पर भी असर पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार LPG की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार से प्रभावित होती हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर कीमत बढ़ने का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ता है।
हाल के महीनों में भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने आयात लागत बढ़ाई है। इसका सीधा असर गैस कंपनियों के खर्च पर पड़ा, जिसे बाद में उपभोक्ताओं तक पहुंचाया गया।
कमर्शियल सिलेंडर भी हुआ महंगा
घरेलू गैस के साथ-साथ कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और छोटे व्यवसाय इससे प्रभावित हुए हैं। व्यवसायियों का कहना है कि गैस महंगी होने से उनकी परिचालन लागत बढ़ गई है। कई छोटे कारोबारी अब खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। इसका असर आम उपभोक्ताओं पर भी देखने को मिल सकता है।
सरकार पर राहत देने का दबाव
लगातार बढ़ती LPG कीमतों के बीच सरकार पर उपभोक्ताओं को राहत देने का दबाव बढ़ रहा है। विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साध रहे हैं और सब्सिडी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें स्थिर नहीं होती हैं तो आने वाले महीनों में LPG की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। ऐसे में सरकार को राहत पैकेज या अतिरिक्त सब्सिडी जैसे विकल्पों पर विचार करना पड़ सकता है।
उज्ज्वला लाभार्थियों की बढ़ी परेशानी
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतें एक बड़ी चुनौती बन रही हैं। योजना का उद्देश्य स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना था, लेकिन बढ़ती कीमतों के कारण कई लाभार्थी नियमित रूप से सिलेंडर रिफिल नहीं करा पा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवारों का कहना है कि उन्हें गैस और अन्य घरेलू जरूरतों के बीच संतुलन बनाना कठिन हो रहा है।
आगे क्या हो सकती है स्थिति
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आती है तो LPG की कीमतों में राहत मिल सकती है। हालांकि यदि कच्चे तेल और गैस की अंतरराष्ट्रीय कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो उपभोक्ताओं को अभी और महंगाई का सामना करना पड़ सकता है।
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में सरकार और तेल कंपनियों की नीतियां यह तय करेंगी कि LPG की कीमतें किस दिशा में जाएंगी। फिलहाल उपभोक्ताओं को बढ़ते खर्च के बीच अपने घरेलू बजट को नए सिरे से संतुलित करना पड़ रहा है।
निष्कर्ष
जनवरी 2026 से अब तक LPG सिलेंडर की कीमतों में लगातार हुई सात बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। घरेलू बजट पर इसका सीधा असर पड़ रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका प्रभाव साफ दिखाई दे रहा है। यदि जल्द राहत नहीं मिली तो रसोई गैस की बढ़ती कीमतें देश के करोड़ों परिवारों के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती बन सकती हैं।
